दांडी मार्च: महिलाओं का ऐतिहासिक योगदान और नमक सत्याग्रह की जनक्रांति

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दांडी मार्च: महिलाओं का ऐतिहासिक योगदान और नमक सत्याग्रह की जनक्रांति

सारांश

दांडी मार्च ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया। महात्मा गांधी के नेतृत्व में यह आंदोलन न केवल नमक पर कर के खिलाफ था, बल्कि यह एक जनक्रांति का प्रतीक बन गया। जानें कैसे यह आंदोलन समाज को जागरूक करने में सफल रहा।

Key Takeaways

  • महात्मा गांधी की नेतृत्व में दांडी मार्च ने नमक कर के खिलाफ जन जागरूकता बढ़ाई।
  • महिलाओं ने इस आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • यह आंदोलन गांधी-इरविन समझौता का आधार बना।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस आंदोलन ने ब्रिटिश राज की आलोचना की।
  • दांडी मार्च ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी।

नई दिल्ली, 5 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। 1930 के समय में अंग्रेजों ने नमक पर अत्यधिक करमहात्मा गांधी ने 'नमक' को एक हथियार बनाने का विचार प्रस्तुत किया, तो जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल जैसे प्रमुख नेता भी संदेह में पड़ गए। उन्हें यह समझ नहीं आया कि साधारण नमक से क्या क्रांति हो सकती है। लेकिन गांधी जी की दूरदर्शिता उस समय के अन्य नेताओं की सोच से कहीं आगे थी।

1882 का 'ब्रिटिश साल्ट एक्ट' एक ऐसा कठोर कानून था, जिसने भारतीयों को अपने देश के समुद्र से नमक बनाने से रोक दिया था। इसके कारण नमक इतना महंगा हो गया कि गरीबों की थाली से स्वाद और स्वास्थ्य दोनों छिन गए।

12 मार्च 1930 को अहमदाबाद के साबरमती आश्रम के बाहर हजारों लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई। 61 वर्षीय महात्मा गांधी ने 78 चुने हुए स्वयंसेवकों के साथ अपनी पदयात्रा आरंभ की। इसमें 19 वर्ष का गुजराती युवक पृथ्वीराज से लेकर 44 वर्ष के बंगाली दुर्गेश चंद्र तक शामिल थे। नेपाल के महावीर गिरी और उत्तराखंड के पहाड़ों से आए ज्योतिराम कांडपाल जैसे लोग भी इस दल में थे।

240 मील (करीब 388 किलोमीटर) दूर नवसारी जिले के एक छोटे से तटीय गांव दांडी तक पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। अगले 24 दिनों तक यह जत्था प्रतिदिन 16 से 24 किलोमीटर नंगे पैर या साधारण चप्पलों में चला। रास्ते में हजारों लोग इस आंदोलन से जुड़ते गए।

5 अप्रैल की शाम को यह विशाल जनसैलाब दांडी के तट पर पहुंचा। अगले दिन 6 अप्रैल की सुबह 8:30 बजे गांधी जी ने समुद्र के पानी में स्नान किया। इसके बाद वे कीचड़ भरे तट पर झुके और वाष्पीकरण से बने प्राकृतिक नमक को अपनी मुट्ठी में उठा लिया। गांधी जी ने कहा था कि इस नमक के साथ मैं ब्रिटिश साम्राज्य की नींव को हिला रहा हूं।

इसके बाद, तमिलनाडु से लेकर बंगाल तक लाखों लोगों ने समुद्र के किनारे अवैध रूप से नमक बनाना शुरू कर दिया। इस आंदोलन की सबसे विशेष बात यह थी कि पहली बार हजारों महिलाएं अपने घरों की चौखट लांघकर सड़कों पर आ गईं। उन्होंने विदेशी कपड़ों की होली जलाई और शराब की दुकानों के बाहर धरना दिया।

इस विरोध प्रदर्शन के कारण अंग्रेज सरकार बौखला गई। 4 मई की आधी रात को गांधी जी को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद धरसाना में जो हुआ, उसने सबको रुला दिया। 21 मई को सरोजिनी नायडू के नेतृत्व में 2,500 शांतिपूर्ण सत्याग्रहियों पर ब्रिटिश पुलिस ने जो अमानवीय प्रहार किया, वह क्रूरता थी। अमेरिकी पत्रकार वेब मिलर ने जब इस बर्बरता की रिपोर्टिंग की, तो पूरी दुनिया में ब्रिटिश राज की निंदा हुई। 'टाइम मैगजीन' ने गांधी जी को 'मैन ऑफ द ईयर' घोषित किया।

इस मार्च ने अंग्रेजों के आर्थिक ढांचे को हिला दिया। मजबूर होकर वायसराय लॉर्ड इरविन को गांधी जी के साथ बराबरी के दर्जे पर बैठकर 'गांधी-इरविन समझौता' (1931) करना पड़ा। यह समझौता, जिसे 'दिल्ली समझौता' के नाम से भी जाना जाता है, के माध्यम से कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को तुरंत बंद करने पर सहमति जताई। ब्रिटिश सरकार ने उन सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा करने के लिए तैयार हो गई जिन पर हिंसा का आरोप नहीं था। समुद्र तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को अपने उपभोग के लिए बिना कर दिए नमक बनाने की अनुमति दी गई। शराब और विदेशी कपड़ों की दुकानों के बाहर शांतिपूर्ण धरना देने का अधिकार स्वीकार कर लिया गया। कांग्रेस ने दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए सहमति दी। सरकार ने आंदोलन के दौरान जब्त की गई संपत्ति (जो अभी बेची नहीं गई थी) को वापस करने का आश्वासन दिया।

Point of View

बल्कि यह साबित किया कि स्वतंत्रता केवल पुरुषों का नहीं, बल्कि सभी का अधिकार है। इस आंदोलन ने भारतीय जनमानस में एक नई चेतना जागृत की।
NationPress
08/04/2026

Frequently Asked Questions

दांडी मार्च का मुख्य उद्देश्य क्या था?
दांडी मार्च का मुख्य उद्देश्य नमक पर लगे कर के खिलाफ विरोध करना और भारतीयों के लिए अपने ही देश में नमक बनाने का अधिकार मांगना था।
महिलाओं की भूमिका दांडी मार्च में कैसे थी?
दांडी मार्च में महिलाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया और घरों से बाहर निकलकर इस आंदोलन को बल दिया, जिससे यह आंदोलन और भी व्यापक हो गया।
गांधी-इरविन समझौता क्या था?
गांधी-इरविन समझौता 1931 में हुआ, जिसमें कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को समाप्त करने पर सहमति दी और ब्रिटिश सरकार ने राजनीतिक बंदियों को रिहा करने का आश्वासन दिया।
इस आंदोलन का अंतरराष्ट्रीय प्रभाव क्या था?
दांडी मार्च के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटिश शासन की निंदा की और गांधी जी को 'मैन ऑफ द ईयर' के रूप में मान्यता दी।
दांडी मार्च की ऐतिहासिक महत्वता क्या है?
दांडी मार्च ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण मोड़ दिया और यह दिखाया कि सामूहिक प्रयास से किसी भी अन्याय का मुकाबला किया जा सकता है।
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