महिला आरक्षण बिल: नारी शक्ति को मिलेगा नया बल, महिलाओं की भागीदारी होगी बढ़ी : अनुपमा होस्केरे
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण बिल महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
- इससे महिलाओं की संख्या लोकसभा और विधानसभा में बढ़ेगी।
- अनुपमा होस्केरे ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताया है।
- यह निर्णय भारत की विविधता के अनुरूप है।
- महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से समाज में संतुलन आएगा।
बेंगलुरु, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महिला आरक्षण बिल पर कर्नाटक की प्रसिद्ध कठपुतली कलाकार अनुपमा होस्केरे ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने इसे महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक और लंबे समय से आवश्यक कदम बताया।
अनुपमा होस्केरे ने राष्ट्र प्रेस से कहा कि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का निर्णय बहुत पहले हो जाना चाहिए था। भारत जैसे सबसे बड़े लोकतंत्र में महिलाओं का प्रतिनिधित्व जनसंख्या के अनुपात में अब तक सही तरीके से नहीं हो पाया है। इस बिल के लागू होने के बाद जब महिलाएं लोकसभा और विधानसभा में सक्रिय रूप से भाग लेंगी, तो देश का असली प्रतिनिधित्व सामने आएगा।
उन्होंने भारत के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे देश में प्राचीन समय से ही महिलाओं को प्रशासन, वित्त और रक्षा जैसे क्षेत्रों में बराबरी का स्थान मिला है। वैदिक काल से लेकर ऐतिहासिक काल तक महिलाओं के योगदान के अनेक उदाहरण मिलते हैं। ऐसे में यह निर्णय स्वाभाविक एवं समय की आवश्यकता प्रतीत होता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी टीम की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक नीति नहीं बल्कि भारत के दृष्टिकोण और दर्शन को दर्शाता है। उन्होंने इसे 'शानदार सोच' बताते हुए बधाई दी।
'नारी शक्ति' के दृष्टिकोण पर चर्चा करते हुए अनुपमा ने कहा कि यह बिल महिलाओं की अपार क्षमता को उजागर करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि जब समाज में महिला और पुरुष का संतुलन बेहतर होगा, तो एक शांतिपूर्ण और प्रगतिशील समाज का निर्माण होगा।
उन्होंने सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे महिलाओं के लिए एलपीजी कनेक्शन, शौचालय, छात्रवृत्ति और जरूरतमंद माताओं के लिए आर्थिक सहायता जैसी योजनाएं लागू की गई हैं।
अनुपमा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि एक महिला के तौर पर उन्हें कई बार चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, क्योंकि समाज में अब भी कई जगह पुरुष प्रधान सोच विद्यमान है। उन्होंने कहा कि मैं शिक्षित और सफल हूं, लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि अगर एक महिला सांसद हो, तो मैं उसके साथ बैठकर समाज और समुदाय की जरूरतों पर बेहतर तरीके से बात कर सकती हूं।
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के बाद महिला सांसदों की संख्या बढ़ेगी, जिससे आम महिलाओं की पहुंच और संवाद भी सरल होगा। इससे देश की जरूरतों को समझने का एक नया दृष्टिकोण मिलेगा और विभिन्न विचारों के मेल से बेहतर नीतियां बनाई जाएंगी।
अनुपमा होस्केरे ने कहा कि इस प्रकार के कानून को लागू करना भारत जैसे बड़े और विविधतापूर्ण देश में सरल नहीं होता। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि निर्णय लेना एक बात है, लेकिन उसे लागू करना बहुत बड़ी बात है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस बार आरक्षण को मौजूदा जनगणना से नहीं जोड़ा गया है, जिससे इसे लागू करने में कोई देरी नहीं होगी। प्रधानमंत्री को धन्यवाद देते हुए अनुपमा होस्केरे ने कहा कि यह निर्णय महिलाओं को मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक मजबूत कदम है और इससे देश के विकास को नई गति मिलेगी।
बता दें कि अनुपमा होस्केरे को पारंपरिक भारतीय कठपुतली कला को पुनर्जीवित करने के लिए 2024 में पद्म श्री और 2018 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।