क्या बिहार विधानसभा चुनाव में दरभंगा ग्रामीण में राजद की बादशाहत को भाजपा-जेडीयू चुनौती दे पाएगी?

सारांश
Key Takeaways
- दरभंगा ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र की महत्वपूर्ण स्थिति।
- राजद का यहाँ विजय का लंबा इतिहास।
- भाजपा और जदयू की बढ़ती चुनौती।
- स्थानीय मुद्दे: रोजगार, पलायन, और बुनियादी सुविधाएँ।
- जनता का मूड विकास और रोजगार पर आधारित।
नई दिल्ली, 29 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। दरभंगा ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र बिहार की राजनीति में एक अद्वितीय स्थान रखता है। यह क्षेत्र दरभंगा लोकसभा सीट का हिस्सा है और इसमें संपूर्ण मनीगाछी प्रखंड तथा दरभंगा ब्लॉक की 17 ग्राम पंचायतें शामिल हैं।
भौगोलिक दृष्टि से यह इलाका दरभंगा शहर की नगरपालिका सीमा से निकटता रखता है, जिससे यहाँ ग्रामीण और उभरते शहरी स्वरूप का संगम देखने को मिलता है। कृषि यहाँ की मुख्य पहचान बनी हुई है, लेकिन शहर के नजदीक होने के कारण शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों तक पहुँच में आसानी हो गई है।
दरभंगा ग्रामीण विधानसभा का गठन 1977 में हुआ था। शुरुआत में यह सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित थी। हालाँकि, 2008 में परिसीमन आयोग की सिफारिश से इसे सामान्य श्रेणी में परिवर्तित किया गया। इस आरक्षण के बदलाव के बावजूद यहाँ राजनीतिक वर्चस्व पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा।
वर्ष 2000 से अब तक, राजद ने लगातार छह चुनावों में यहाँ विजय प्राप्त की है। 2000 और 2005 में पिताम्बर पासवान ने राजद की तरफ से जीत हासिल की, जबकि 2010, 2015 और 2020 में लालित कुमार यादव लगातार तीन बार विधायक बने। इससे पहले जनता पार्टी और जनता दल ने 1977, 1980, 1990 और 1995 में दो-दो बार जीत दर्ज की थी। इस सीट पर कांग्रेस को केवल 1985 में जीत मिली थी।
2020 के विधानसभा चुनाव में राजद ने अपनी सीट बरकरार रखी, लेकिन जीत का अंतर बहुत कम हो गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि यहाँ विपक्ष धीरे-धीरे अपनी पैठ बना रहा है और राजद के लिए चुनौतियाँ बढ़ रही हैं। इस क्षेत्र की सामाजिक और राजनीतिक संरचना अभी भी दलित वोट बैंक और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था से प्रभावित है। विशेषकर मनीगाछी ब्लॉक में दलित मतदाता निर्णायक माने जाते हैं। वहीं, दरभंगा शहर से जुड़ाव ने इलाके में बदलाव भी लाया है। आंतरिक पंचायतों में अभी भी सड़क संपर्क, सिंचाई, बिजली और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी हुई है, जबकि शहर के निकटवर्ती क्षेत्रों में अपेक्षाकृत विकास दिखाई देता है।
स्थानीय मुद्दों की बात करें तो रोजगार और पलायन सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। हर साल बड़ी संख्या में लोग काम की तलाश में बाहर जाते हैं। इसके अलावा, सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर क्रियान्वयन मतदाताओं की प्राथमिकता में है।
चुनाव आयोग के 2024 के आंकड़ों के अनुसार कुल मतदाता 2,98,481 हैं, जिनमें 1,57,135 पुरुष, 1,41,344 महिलाएं और 2 थर्ड जेंडर शामिल हैं।
2025 के चुनावी समीकरण पर नजर डालें तो राजद यहाँ परंपरागत रूप से मजबूत है, लेकिन 2020 के कम अंतर की जीत यह संकेत देती है कि भाजपा और जदयू धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं। भाजपा का शहरी और युवा वर्ग में प्रभाव बढ़ा है, जबकि जेडीयू ग्रामीण विकास योजनाओं को भुनाने में लगी है। फिर भी, दलित और परंपरागत वोट बैंक पर मजबूत पकड़ के कारण राजद अब भी इस सीट का प्रमुख दावेदार बना हुआ है।
कुल मिलाकर, चुनाव बहुत दिलचस्प होने वाला है। राजद अपनी परंपरागत पकड़ को बनाए रखने के लिए संघर्ष करेगा, जबकि भाजपा और जेडीयू के लिए यह सीट अपनी पैठ मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकती है। जनता का मूड इस बार विकास और रोजगार पर टिका है और यही तय करेगा कि दरभंगा ग्रामीण में कौन बाजी मारेगा।