दसवें दीपोत्सव पर उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन बोले — मोदी और योगी दोनों जी रहे हैं श्रीराम का आचरण
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 7 नवंबर 2026 को अयोध्या के राम कथा पार्क में आयोजित दसवें दीपोत्सव समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आज देश में दो योगी भगवान श्रीराम के चरित्र और आचरण का अनुसरण कर रहे हैं — एक 'कर्मयोगी' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दूसरे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। उन्होंने कहा कि वास्तविक महानता सत्ता या पद में नहीं, बल्कि चरित्र बल और कर्तव्यों के प्रति अटूट निष्ठा में निहित होती है।
समारोह का मुख्य घटनाक्रम
राम कथा पार्क में आयोजित इस भव्य समारोह में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम, माता सीता एवं अनुज लक्ष्मण का प्रतीकात्मक पुष्पक विमान से अयोध्या आगमन हुआ। 'भरत मिलाप' के पश्चात श्रीराम और माता जानकी का विधि विधान से पूजन अर्चन और आरती वंदन सम्पन्न हुई। त्रेतायुग की स्मृतियों को ताज़ा करते हुए प्रभु श्रीराम का प्रतीकात्मक राज्याभिषेक भी संपन्न हुआ, जिसके साक्षी हज़ारों श्रद्धालु बने। समारोह में 'आलोकित अयोध्या अलौकिक अयोध्या' की परिकल्पना भी जीवंत रूप में दर्शाई गई।
योगी आदित्यनाथ को 'हिंदू हृदय सम्राट' की उपाधि
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा करते हुए उन्हें 'हिंदू हृदय सम्राट' कहकर संबोधित किया। उन्होंने संसद के पुराने दिनों को याद करते हुए कहा, "हमारे हिंदू हृदय सम्राट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उस समय संसद में मेरे सहयोगी हुआ करते थे। वह बिल्कुल युवा थे और मुझे अच्छी तरह याद है कि उनके भाषणों में उस समय भी वैसा ही ओज था, जितने ओजस्वी वह आज हैं।"
माँ की यादें और राम मंदिर आंदोलन
उपराष्ट्रपति ने भावुक होते हुए अपनी माँ की यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि जब अशोक सिंघल ने रामशिला पूजन का आह्वान किया था, तब उनकी माँ ने राम मंदिर के लिए अपने सिर पर ईंट ढोई थी और शिला पूजन का नेतृत्व किया था। उन्होंने कहा, "उस समय मेरी माँ ने यह कल्पना भी नहीं की होगी कि सुदूर दक्षिण, रामेश्वरम से चलकर उनका बेटा एक दिन देश का उपराष्ट्रपति बनेगा और राम जन्मभूमि पर इस समारोह का हिस्सा बनकर गर्व की अनुभूति करेगा।"
उन्होंने कहा कि 500 वर्षों के संघर्ष और साधु संतों की तपस्या के बाद राम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर साकार हुआ है। राधाकृष्णन ने यह भी कहा कि वे एक सामान्य कृषक परिवार से आते हैं और आज उपराष्ट्रपति के पद तक पहुँचे हैं — यह रामभक्तों के बलिदान का फल है।
यूपी की कानून व्यवस्था और आर्थिक प्रगति
उपराष्ट्रपति ने उत्तर प्रदेश की सुधरी कानून व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि पहले जब वे उत्तर प्रदेश आते थे, तो उन्हें सुरक्षित महसूस नहीं होता था और कानून व्यवस्था पुलिस के नहीं, गुंडों के हाथों में होती थी। उन्होंने वाराणसी के एक व्यक्ति का उदाहरण दिया, जिसने अपराध की राह छोड़कर एक छोटे व्यापारी के रूप में बेखौफ काम शुरू कर दिया है।
आर्थिक प्रगति पर बोलते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश देश की जीडीपी में 9 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। 2026 27 के लिए ₹9 लाख करोड़ से अधिक के ऐतिहासिक बजट को उन्होंने मुख्यमंत्री की विकास दृष्टि का प्रमाण बताया, और कहा कि जल्द ही यह राज्य 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है।
महाकुंभ और विकसित भारत का विज़न
उपराष्ट्रपति ने प्रयागराज में आयोजित पिछले महाकुंभ का उल्लेख करते हुए कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ के बावजूद एक भी अप्रिय घटना का न होना यूपी के सुरक्षित और विकसित मॉडल का प्रमाण है। उन्होंने पूरे विश्वास के साथ कहा कि उत्तर प्रदेश 'विकसित भारत 2047' की यात्रा में सभी राज्यों का नेतृत्व करेगा। अंत में उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य दूसरों पर राज करना नहीं, बल्कि सबको साथ लेकर देश को विश्व की महाशक्ति बनाना है।