अयोध्या दीपोत्सव 2026: 10वें महोत्सव पर 56 घाट दीयों से जगमगाएंगे, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन करेंगे उद्घाटन
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या में 10वें दीपोत्सव 2026 की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं — सरयू नदी के किनारे 56 घाटों को लाखों दीयों से रोशन किया जाएगा और श्री राम जन्मभूमि मंदिर रंग-बिरंगी रोशनी व पुष्प सज्जा से भव्य रूप धारण कर चुका है। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन साधुओं और धार्मिक नेताओं की उपस्थिति में इस महोत्सव का औपचारिक उद्घाटन करेंगे, जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी समारोह में शामिल होंगे। यह आयोजन 8 नवंबर 2026 को दिवाली से एक दिन पहले शनिवार को होगा — और इस वर्ष यह महोत्सव अपनी 10वीं वर्षगांठ का ऐतिहासिक पड़ाव भी है।
मंदिर परिसर की भव्य सज्जा
श्री राम जन्मभूमि मंदिर के सभी प्रवेश द्वारों को आकर्षक पुष्पों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है। मंदिर प्रांगण से लेकर राम लला के मुख्य द्वार तक प्रकाश सज्जा की गई है, जिससे देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यह प्रमुख आकर्षण का केंद्र बन गया है। विशेष सेल्फी पॉइंट भी बनाए गए हैं ताकि आगंतुक इस ऐतिहासिक अवसर की स्मृति अपने साथ ले जा सकें।
मुख्यमंत्री योगी का विस्तृत कार्यक्रम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दोपहर लगभग 2:40 बजे राम कथा पार्क के निकट स्थित हेलीपैड पर पहुंचेंगे। वे भव्य दीपोत्सव झांकी देखेंगे और रथ-संचालन समारोह में भाग लेंगे।
इसके बाद भगवान राम, देवी सीता और लक्ष्मण की प्रतिमाओं से सुसज्जित हेलीकॉप्टर से अयोध्या पर पुष्प पंखुड़ियां बरसाई जाएंगी। तीनों दिव्य हस्तियों का प्रतीकात्मक राज्याभिषेक समारोह भी संपन्न होगा, जिसके बाद मुख्यमंत्री साधुओं, संतों, निवासियों और भक्तों को राम कथा पार्क में संबोधित करेंगे।
सरयू आरती और तकनीकी प्रदर्शनी
समारोह के प्रमुख आकर्षणों में राम की पैड़ी पर सरयू आरती, 101 दीयों का प्रतीकात्मक प्रज्वलन और राम मंदिर के प्रांगण में विशेष दीप-स्तंभ शामिल हैं। इसके साथ ही भगवान राम के जीवन और कथा को दर्शाने वाले प्रोजेक्शन मैपिंग, लेजर शो और ड्रोन शो भी इस उत्सव के मुख्य आकर्षण होंगे।
दीपोत्सव का ऐतिहासिक महत्त्व
गौरतलब है कि अयोध्या दीपोत्सव की शुरुआत 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हुई थी। तब से यह आयोजन हर वर्ष अधिक भव्य होता गया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है। 2023 में श्री राम जन्मभूमि मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यह पहला दशकीय आयोजन है, जो इसे विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण बनाता है।
यह ऐसे समय में आया है जब अयोध्या धार्मिक पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर तेज़ी से उभर रही है और केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार दोनों इस क्षेत्र में अवसंरचना विकास में भारी निवेश कर रही हैं। आने वाले वर्षों में यह दीपोत्सव और भी बड़े स्वरूप में आयोजित होने की संभावना है।