क्या सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांग वकीलों के लिए दिल्ली बार काउंसिल चुनाव में राहत दी?
सारांश
Key Takeaways
- सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांग वकीलों के लिए नामांकन फीस को 15 हजार रुपए कर दिया।
- पहली बार दिव्यांगों के लिए दिल्ली बार काउंसिल में चुनाव लड़ना आसान हुआ।
- आरक्षण की मांग पर आगे सुनवाई होगी।
नई दिल्ली, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली बार काउंसिल (डीबीसी) के चुनाव में शारीरिक रूप से विकलांग वकीलों को एक महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को यह निर्णय लिया कि दिल्ली बार काउंसिल के चुनाव में भाग लेने के लिए शारीरिक रूप से विकलांग उम्मीदवारों की नामांकन फीस को 1.25 लाख रुपए से घटाकर 15 हजार रुपए कर दिया जाएगा। इस निर्णय को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह मामला वकील पंकज सिन्हा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। पंकज सिन्हा स्वयं दृष्टिहीन हैं और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दो प्रमुख मांगें रखी थीं। पहली मांग यह थी कि दिल्ली बार काउंसिल के चुनाव में नामांकन पत्र दाखिल करने की फीस बहुत अधिक है, जिसे शारीरिक रूप से विकलांग उम्मीदवारों के लिए कम किया जाना चाहिए। दूसरी मांग में उन्होंने दिल्ली बार काउंसिल में शारीरिक रूप से विकलांग वकीलों के लिए आरक्षण की व्यवस्था लागू करने की अपील की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को याचिकाकर्ता की पहली मांग को मान लिया और नामांकन शुल्क को घटाकर 15 हजार रुपए करने का निर्णय लिया।
हालांकि, याचिकाकर्ता की दूसरी मांग, यानी दिल्ली बार काउंसिल में शारीरिक रूप से विकलांग वकीलों को आरक्षण देने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं सुनाया है। इस विषय पर आगे विस्तृत बहस की जाएगी और सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत कोई निर्णय लेगी।