26 जून 2026
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फोर्टिस अस्पताल शालीमार बाग की जांच के आदेश, दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने जनसुनवाई शिकायत पर लिया एक्शन

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फोर्टिस अस्पताल शालीमार बाग की जांच के आदेश, दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने जनसुनवाई शिकायत पर लिया एक्शन

सारांश

जनसुनवाई में एक शिकायत आई और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने तुरंत एक्शन लिया — शालीमार बाग के फोर्टिस अस्पताल में निरीक्षण दल भेजा गया, अनियमितताएँ मिलीं और पूर्ण जाँच के आदेश दे दिए गए। यह वही अस्पताल है जो 2017 से NICU लापरवाही मामले में कानूनी विवाद में घिरा है।

मुख्य बातें

दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने 25 जून 2026 को 'सीएम जन सुनवाई' में मिली शिकायत पर फोर्टिस अस्पताल शालीमार बाग का तत्काल निरीक्षण कराया।
निरीक्षण टीम को अस्पताल में कुछ अनियमितताएँ मिलीं, जिसके बाद सरकार ने पूर्ण जाँच के आदेश दिए।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने चेतावनी दी कि अनियमितता साबित होने पर सख्त कार्रवाई होगी।
'सीएम जन सुनवाई' पहल फरवरी 2026 में शुरू हुई थी, जिसमें नगर निगम, DDA और दिल्ली पुलिस सहित विभागों में शिकायत दर्ज होती है।
दिल्ली उच्च न्यायालय पहले ही अस्पताल के दो डॉक्टरों की योग्यता की पुनः जाँच के आदेश दे चुका है; दिल्ली मेडिकल काउंसिल ने उन्हें सुपर-स्पेशलिस्ट बताने से रोका है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 25 जून 2026 को 'सीएम जन सुनवाई' कार्यक्रम में प्राप्त एक शिकायत पर तत्काल कार्रवाई करते हुए शालीमार बाग स्थित फोर्टिस अस्पताल का निरीक्षण कराने के आदेश दिए। अधिकारियों की एक टीम ने मौके पर पहुँचकर जाँच की, जिसमें कुछ अनियमितताएँ सामने आईं और सरकार ने पूर्ण जाँच के निर्देश जारी कर दिए हैं।

मुख्यमंत्री कार्यालय का बयान

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, 'जाँच के दौरान यदि कोई अनियमितता साबित होती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली का हर अस्पताल मरीजों को जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ सेवा देने के लिए बाध्य है और मरीजों के समय पर और सम्मानजनक इलाज के अधिकार से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।'

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पहले भी स्पष्ट कर चुकी हैं कि जन सुनवाई केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि नागरिकों की समस्याओं के प्रभावी समाधान का माध्यम है। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से शिकायतों के निपटारे के निर्देश दिए हैं।

क्या है 'सीएम जन सुनवाई' पहल

यह जन शिकायत निवारण कार्यक्रम दिल्ली सरकार ने फरवरी 2026 में शुरू किया था। इसके पोर्टल और मोबाइल ऐप के ज़रिए नागरिक एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर नगर निगम, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और दिल्ली पुलिस समेत विभिन्न विभागों में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता स्वयं अपने शालीमार बाग विधानसभा क्षेत्र से आने वाली शिकायतों को व्यक्तिगत रूप से सुनती रही हैं — यह निरीक्षण उसी क्षेत्र से जुड़े अस्पताल से संबंधित है।

फोर्टिस अस्पताल की पृष्ठभूमि

फोर्टिस अस्पताल शालीमार बाग पहले से ही कानूनी विवादों के केंद्र में रहा है। 2017 के एक हाई-प्रोफाइल मामले में इस पर चिकित्सीय लापरवाही के आरोप लगे थे, जिसमें एक बच्चे को नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में इलाज के दौरान गंभीर और स्थायी ब्रेन डैमेज होने का आरोप है।

हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय ने अस्पताल से जुड़े दो डॉक्टरों की योग्यता की पुनः जाँच के आदेश दिए हैं। दिल्ली मेडिकल काउंसिल पहले ही इन दोनों डॉक्टरों को 'नियोनेटोलॉजिस्ट' या सुपर-स्पेशलिस्ट के रूप में खुद को प्रस्तुत करने से तब तक रोक चुकी है, जब तक उनकी योग्यता की जाँच पूरी नहीं हो जाती।

आगे क्या होगा

सरकार ने स्पष्ट किया है कि निरीक्षण टीम की रिपोर्ट की विस्तृत समीक्षा की जाएगी और अनियमितता प्रमाणित होने पर सख्त कदम उठाए जाएँगे। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब दिल्ली में निजी अस्पतालों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल पहले से उठते रहे हैं। आने वाले दिनों में जाँच रिपोर्ट और सरकार की अगली कार्रवाई पर सबकी नज़र रहेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली CM ने फोर्टिस अस्पताल की जाँच का आदेश क्यों दिया?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को 'सीएम जन सुनवाई' कार्यक्रम में शालीमार बाग के फोर्टिस अस्पताल के खिलाफ एक शिकायत मिली, जिसके बाद उन्होंने तत्काल निरीक्षण के आदेश दिए। निरीक्षण में कुछ अनियमितताएँ पाई गईं, जिससे पूर्ण जाँच शुरू की गई है।
'सीएम जन सुनवाई' कार्यक्रम क्या है?
यह दिल्ली सरकार की जन शिकायत निवारण पहल है, जिसे फरवरी 2026 में शुरू किया गया था। इसके पोर्टल और मोबाइल ऐप के ज़रिए नागरिक नगर निगम, DDA और दिल्ली पुलिस सहित विभिन्न सरकारी विभागों में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
फोर्टिस अस्पताल शालीमार बाग पहले किन विवादों में रहा है?
फोर्टिस अस्पताल शालीमार बाग 2017 के एक हाई-प्रोफाइल मामले में चिकित्सीय लापरवाही के आरोपों को लेकर कानूनी विवाद में है, जिसमें एक बच्चे को NICU में इलाज के दौरान गंभीर और स्थायी ब्रेन डैमेज होने का आरोप है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने अस्पताल के दो डॉक्टरों की योग्यता की पुनः जाँच के आदेश दिए हैं।
दिल्ली मेडिकल काउंसिल ने अस्पताल के डॉक्टरों पर क्या प्रतिबंध लगाया है?
दिल्ली मेडिकल काउंसिल ने फोर्टिस अस्पताल के दो संबंधित डॉक्टरों को 'नियोनेटोलॉजिस्ट' या सुपर-स्पेशलिस्ट के रूप में खुद को प्रस्तुत करने से तब तक रोक दिया है, जब तक उनकी योग्यता की जाँच पूरी नहीं हो जाती।
फोर्टिस अस्पताल जाँच में आगे क्या होगा?
सरकार ने कहा है कि निरीक्षण टीम की रिपोर्ट की विस्तृत समीक्षा की जाएगी और अनियमितता प्रमाणित होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि मरीजों के अधिकारों से कोई समझौता नहीं होगा।
राष्ट्र प्रेस
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