ऑपरेशन सीवाई-हॉक-4: दिल्ली में साइबर और वित्तीय धोखाधड़ी के गिरोह का भंडाफोड़, 113 आरोपी गिरफ्तार

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ऑपरेशन सीवाई-हॉक-4: दिल्ली में साइबर और वित्तीय धोखाधड़ी के गिरोह का भंडाफोड़, 113 आरोपी गिरफ्तार

सारांश

दिल्ली की साइबर पुलिस ने ऑपरेशन सीवाई-हॉक-4 के तहत कई फाइनेंशियल फ्रॉड गिरोहों का भंडाफोड़ किया है। 113 आरोपियों की गिरफ्तारी और 22 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का खुलासा किया गया है। जानिए इस ऑपरेशन की पूरी कहानी।

Key Takeaways

  • ऑपरेशन सीवाई-हॉक-4 में 113 आरोपी गिरफ्तार किए गए।
  • 22 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।
  • पुलिस ने 17 लाख रुपए को रोका।
  • 47 लाख 79 हजार की रकम और अन्य सामान जब्त किए गए।
  • फेक लोन ऐप रैकेट में 6 लोग गिरफ्तार हुए।

नई दिल्ली, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। साउथ-वेस्ट डिस्ट्रिक्ट की साइबर पुलिस ने ऑपरेशन सीवाई-हॉक-4 के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। इस ऑपरेशन के जरिए अंतरराज्यीय साइबर और फाइनेंशियल फ्रॉड से जुड़े कई गिरोहों का खुलासा किया गया। कुल 57 मामलों में 113 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और 303 शिकायतों को सीधे जुड़े म्यूल अकाउंट्स और मोबाइल नेटवर्क्स से जोड़ा गया।

जानकारी के अनुसार, लगभग 22 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की गई, जिसे विभिन्न म्यूल और स्कैमस्टर अकाउंट्स से जोड़ा गया। पुलिस की सक्रियता से 17 लाख को बेनिफिशियरी अकाउंट्स में रोका गया।

इस ऑपरेशन में कुल 47 लाख 79 हजार रुपए, 1 मर्सिडीज एस क्लास कार, 6 लैपटॉप, 85 मोबाइल फोन, 11 पासबुक, 42 डेबिट कार्ड, 135 म्यूल सिम, 1 वाई-फाई राउटर और 1 पैन कार्ड जब्त किया गया। इसके अलावा 488 लोगों से पूछताछ की गई और 164 नोटिसेज जारी किए गए। साथ ही 23 नए एफआईआर भी दर्ज किए गए।

ऑपरेशन सीवाई-हॉक-4 के अंतर्गत सबसे बड़ी कार्रवाई एयर टिकट फ्रॉड रैकेट के खिलाफ की गई। यह गिरोह दिल्ली, गोवा और मुंबई से संचालित हो रहा था और एनआरआई को ठग रहा था। इसके मुख्य मास्टरमाइंड मृदुल जोशी को गिरफ्तार किया गया, जो दिल्ली पटेल नगर और गोवा में फेक कॉल सेंटर चलाता था। उसके साथ जुड़े म्यूल अकाउंट्स और सहयोगियों की भी गिरफ्तारी हुई। इस रैकेट में लगभग 47 लाख रुपए कैश, 1 मर्सिडीज कार, कई मोबाइल, लैपटॉप, एटीएम कार्ड और फेक एसआईएम कार्ड जब्त किए गए। एक शिकायतकर्ता को 3.8 लाख रुपए का नुकसान हुआ था।

साइबर टीम ने इस गिरोह की गतिविधियों को डिजिटल और तकनीकी तरीके से ट्रेस किया। इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, गूगल और मोबाइल नेटवर्क्स के डेटा का विश्लेषण करके मास्टरमाइंड और उसके सहयोगियों की लोकेशन का पता लगाया गया। म्यूल अकाउंट्स और नकली बैंक अकाउंट्स का नेटवर्क भी सामने आया, जिसके जरिए धोखाधड़ी की रकम निकाली जा रही थी।

दूसरे बड़े ऑपरेशन में फेक लोन ऐप फ्रॉड रैकेट का खुलासा हुआ। इस गिरोह के छह आरोपी पकड़े गए, जिन्होंने पाकिस्तान और बांग्लादेश के वर्चुअल नंबरों का इस्तेमाल करके लोन ऐप के पीड़ितों को लक्ष्य बनाया। आरोपियों ने अपने यूपीआई क्यूआर को अन्य गिरोह सदस्यों को दे दिया, जिससे धोखाधड़ी की रकम म्यूल अकाउंट्स में ट्रांसफर होती रही। तकनीकी जांच में व्हाट्सएप चैट और डिजिटल ट्रेल्स मिली, जिससे पूरे नेटवर्क की पहचान हुई। इस मामले में कुल 7 एनआरसीपी शिकायतें लिंक हुईं।

इस गिरोह का काम करने का तरीका बहुत संगठित था। पीड़ितों को लोन देने के बहाने मोबाइल और डेटा पर नियंत्रण कर लिया जाता था और उन्हें धमकियां दी जाती थीं। धोखाधड़ी की रकम म्यूल अकाउंट्स में आती, जिसे गिरोह के सदस्य निकालकर यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी में बदल देते थे, ताकि पैसे का कोई ट्रेल न रहे।

इन आरोपियों के पास से 6 मोबाइल फोन जब्त किए गए, जिनमें सभी डिजिटल सबूत और वित्तीय डेटा मौजूद थे।

Point of View

क्योंकि यह न केवल साइबर अपराधों के खिलाफ एक सख्त संदेश देता है, बल्कि लोगों को जागरूक भी करता है। सरकार की इस पहल से यह स्पष्ट होता है कि साइबर सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
NationPress
10/04/2026

Frequently Asked Questions

ऑपरेशन सीवाई-हॉक-4 का उद्देश्य क्या था?
इस ऑपरेशन का उद्देश्य अंतरराज्यीय साइबर और फाइनेंशियल फ्रॉड से जुड़े गिरोहों का भंडाफोड़ करना था।
इस ऑपरेशन में कितने आरोपी गिरफ्तार हुए?
इस ऑपरेशन में कुल 113 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने कितनी राशि को रोका?
पुलिस ने 17 लाख रुपए को बेनिफिशियरी अकाउंट्स में रोका।
इस ऑपरेशन के दौरान क्या सामान जब्त किया गया?
इस दौरान 47 लाख 79 हजार रुपए, 1 मर्सिडीज एस क्लास कार, लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य सामान जब्त किए गए।
फेक लोन ऐप फ्रॉड रैकेट का क्या हुआ?
फेक लोन ऐप फ्रॉड रैकेट में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिन्होंने वर्चुअल नंबरों का इस्तेमाल किया।
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