2 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दिल्ली में आपदा प्रबंधन कर्मियों के मानदेय में 100% वृद्धि, CM रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दिल्ली में आपदा प्रबंधन कर्मियों के मानदेय में 100% वृद्धि, CM रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला

सारांश

16 साल तक ₹25,000 और ₹20,000 के सीमित मानदेय पर दिल्ली की आपदा व्यवस्था की रीढ़ बने रहे DSDMA कर्मियों को CM रेखा गुप्ता ने बड़ी राहत दी है — मानदेय में 100% तक वृद्धि की अनुशंसा की गई है। यह फैसला 3.2 करोड़ दिल्लीवासियों की सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करेगा।

मुख्य बातें

CM रेखा गुप्ता ने 2 अगस्त 2026 को DSDMA कर्मियों के मानदेय में 100% तक वृद्धि को मंजूरी दी।
प्रोजेक्ट ऑफिसर और डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट ऑफिसर का मानदेय ₹25,000 तथा प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर का ₹20,000 — 16 वर्षों से अपरिवर्तित था।
ये पद 2009 में UNDP के सहयोग से स्थापित हुए थे और नियमित वेतन संरचना से कभी नहीं जोड़े गए।
कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में समकक्ष पदों पर ₹45,000–₹50,000 या अधिक मानदेय दिया जाता है।
सरकार भविष्य में प्रदर्शन आधारित वेतन वृद्धि, चिकित्सा सुरक्षा और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों पर भी विचार करेगी।
यह निर्णय 3.2 करोड़ दिल्लीवासियों की आपदा सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में उठाया गया कदम बताया गया है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 2 अगस्त 2026 को दिल्ली राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DSDMA) के अंतर्गत कार्यरत प्रोजेक्ट ऑफिसर (PO), डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट ऑफिसर (DPO) और प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर (PC) के मानदेय में 100 प्रतिशत तक की वृद्धि को मंजूरी दी। यह निर्णय उन कर्मियों के लिए राहत लेकर आया है, जिनका मानदेय पिछले 16 वर्षों से अपरिवर्तित था।

16 साल की अनदेखी का अंत

वर्ष 2009 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के सहयोग से स्थापित इन पदों पर नियुक्त कर्मियों का मासिक मानदेय डेढ़ दशक से जस का तस बना हुआ था। प्रोजेक्ट ऑफिसर और डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट ऑफिसर को मात्र ₹25,000 और प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर को ₹20,000 प्रतिमाह मिल रहे थे। गौरतलब है कि इस अवधि में महंगाई लगातार बढ़ी, आपदा प्रबंधन की जटिलताएँ गहरी हुईं और इन कर्मियों की जिम्मेदारियाँ भी विस्तृत होती रहीं — फिर भी न वेतन संशोधन हुआ, न महंगाई भत्ते (DA) का लाभ मिला।

मुख्यमंत्री गुप्ता ने स्पष्ट किया कि इन पदों को प्रारंभ में दिल्ली सरकार की किसी नियमित वेतन संरचना से नहीं जोड़ा गया था, जिसके कारण ये कर्मी समय-समय पर होने वाले वेतन पुनरीक्षण के दायरे से बाहर रहे।

अन्य राज्यों से तुलना

मुख्यमंत्री ने बताया कि कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में समान जिम्मेदारियाँ निभाने वाले अधिकारियों को ₹45,000 से ₹50,000 अथवा उससे अधिक का मानदेय दिया जाता है। दिल्ली सरकार के अन्य विभागों में भी समान स्तर के संविदा पदों का पारिश्रमिक इससे कहीं अधिक था। राष्ट्रीय राजधानी जैसे उच्च जोखिम वाले महानगर में यह असमानता अनुचित थी।

इन कर्मियों की भूमिका क्या है

ये कर्मी केवल कार्यालयी कार्य नहीं करते — आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत इन पर वैधानिक जिम्मेदारियाँ हैं। ये जिला स्तरीय आपदा प्रबंधन योजनाएँ तैयार करते हैं, संवेदनशील क्षेत्रों और कमज़ोर आबादी का जोखिम मूल्यांकन करते हैं और आपदा की स्थिति में इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (EOC) का संचालन करते हुए NDRF, SDRF, अग्निशमन सेवा, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के बीच वास्तविक समय में समन्वय स्थापित करते हैं। इसके अलावा ये बड़े पैमाने पर मॉक ड्रिल और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करते हैं।

नई वेतन संरचना और भविष्य की योजनाएँ

मुख्यमंत्री गुप्ता ने बताया कि नई वेतन संरचना के तहत मानदेय में 100 प्रतिशत तक की वृद्धि की अनुशंसा की गई है। उन्होंने इसे 'अनुग्रह राशि' नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों, अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता के अनुरूप न्यायसंगत एवं प्रतिस्पर्धी वेतन संरचना करार दिया।

सरकार भविष्य में प्रदर्शन आधारित वार्षिक वेतन वृद्धि, कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए चिकित्सा सुरक्षा तथा क्षमता निर्माण कार्यक्रमों पर भी विचार करेगी।

आम जनता पर असर

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय लगभग 3.2 करोड़ दिल्लीवासियों की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। बेहतर मानदेय से इन पदों पर प्रतिभाशाली और अनुभवी कर्मियों को बनाए रखना आसान होगा, जिससे राजधानी की आपदा तैयारी में दीर्घकालिक सुधार की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह स्वागत योग्य है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि संशोधित मानदेय कब से लागू होगा और क्या इसे नियमित वेतन संरचना से जोड़ा जाएगा — अन्यथा अगले 16 साल बाद फिर यही स्थिति उत्पन्न होगी। प्रदर्शन आधारित वेतन वृद्धि और चिकित्सा सुरक्षा की घोषणाएँ अभी इरादे के स्तर पर हैं; इन्हें समयबद्ध नीतिगत ढाँचे में बदलना ज़रूरी है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली सरकार ने DSDMA कर्मियों के मानदेय में कितनी वृद्धि की है?
दिल्ली सरकार ने DSDMA के प्रोजेक्ट ऑफिसर, डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट ऑफिसर और प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर के मानदेय में 100 प्रतिशत तक वृद्धि की अनुशंसा की है। यह निर्णय CM रेखा गुप्ता ने 2 अगस्त 2026 को लिया।
DSDMA कर्मियों का मानदेय पहले कितना था और कब से था?
प्रोजेक्ट ऑफिसर और डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट ऑफिसर का मानदेय ₹25,000 तथा प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर का ₹20,000 प्रतिमाह था। यह मानदेय वर्ष 2009 से लगातार 16 वर्षों तक अपरिवर्तित रहा।
DSDMA के ये पद कब और कैसे बने थे?
ये पद वर्ष 2009 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के सहयोग से स्थापित किए गए थे। इन्हें दिल्ली सरकार की नियमित वेतन संरचना से कभी नहीं जोड़ा गया, जिसके कारण ये कर्मी DA और समय-समय पर होने वाले वेतन संशोधन से वंचित रहे।
अन्य राज्यों में इन पदों पर कितना मानदेय मिलता है?
कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में समान जिम्मेदारियाँ निभाने वाले अधिकारियों को ₹45,000 से ₹50,000 अथवा उससे अधिक मानदेय दिया जाता है। दिल्ली सरकार के अन्य विभागों में भी समकक्ष संविदा पदों का पारिश्रमिक इससे कहीं अधिक था।
इस फैसले से दिल्लीवासियों को क्या फायदा होगा?
CM रेखा गुप्ता के अनुसार, बेहतर मानदेय से अनुभवी और प्रतिभाशाली कर्मियों को इन पदों पर बनाए रखना संभव होगा, जिससे लगभग 3.2 करोड़ दिल्लीवासियों की आपदा सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। सरकार भविष्य में प्रदर्शन आधारित वेतन वृद्धि और चिकित्सा सुरक्षा जैसे कल्याणकारी उपायों पर भी विचार करेगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले