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दिल्ली कैबिनेट का बड़ा फैसला: आशा वर्करों का मासिक भत्ता दोगुना, अब ₹6,000 मिलेंगे

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दिल्ली कैबिनेट का बड़ा फैसला: आशा वर्करों का मासिक भत्ता दोगुना, अब ₹6,000 मिलेंगे

सारांश

दिल्ली कैबिनेट ने आशा वर्करों का मासिक प्रोत्साहन भत्ता एक झटके में ₹3,000 से ₹6,000 कर दिया — यानी पूरे 100% की बढ़ोतरी। राजधानी की 6,725 आशा वर्करों को सीधा फायदा मिलेगा, जो हर रोज़ लगभग 400 परिवारों के स्वास्थ्य की देखभाल करती हैं।

मुख्य बातें

दिल्ली कैबिनेट ने 15 सितंबर 2026 को आशा वर्करों का मासिक प्रोत्साहन भत्ता ₹3,000 से बढ़ाकर ₹6,000 करने का फैसला किया।
यह बढ़ोतरी दिल्ली में कार्यरत सभी 6,725 आशा वर्करों पर लागू होगी।
प्रत्येक आशा वर्कर औसतन लगभग 2,000 लोगों या 400 परिवारों की स्वास्थ्य देखभाल से जुड़ी होती है।
अन्य प्रोत्साहन भत्ते पहले की तरह ही मिलते रहेंगे — केवल मासिक निश्चित भत्ता दोगुना हुआ है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे महिला आर्थिक सशक्तिकरण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत करने की दिशा में अहम कदम बताया।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में दिल्ली कैबिनेट ने 15 सितंबर 2026 को एक अहम निर्णय लेते हुए राजधानी की आशा वर्करों का मासिक प्रोत्साहन भत्ता ₹3,000 से बढ़ाकर ₹6,000 कर दिया। यह बढ़ोतरी दिल्ली में कार्यरत सभी 6,725 आशा वर्करों पर तत्काल प्रभाव से लागू होगी, जबकि अन्य प्रोत्साहन भत्ते पूर्ववत जारी रहेंगे।

मुख्य घटनाक्रम

दिल्ली सरकार ने मंगलवार को कैबिनेट बैठक में यह ऐतिहासिक फैसला लिया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार इस मुद्दे पर लंबे समय से विचार-विमर्श कर रही थी और अब इस पर निर्णय ले लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मासिक प्रोत्साहन भत्ते में यह वृद्धि केवल नियमित भत्ते तक सीमित है — अन्य प्रकार के प्रोत्साहन भत्ते यथावत बने रहेंगे।

आशा वर्करों की भूमिका और उनका महत्व

मुख्यमंत्री ने आशा वर्करों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि वे दिल्ली की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की एक अनिवार्य कड़ी हैं। प्रत्येक आशा वर्कर औसतन लगभग 2,000 लोगों या 400 परिवारों की ज़िम्मेदारी संभालती है। इनका कार्य क्षेत्र व्यापक है — घर-घर जाकर स्वास्थ्य जानकारी देना, परिवारों को टीकाकरण के लिए प्रेरित करना, गर्भवती महिलाओं और नई माताओं की देखभाल में सहयोग करना, तथा स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस, जागरूकता कार्यक्रमों, सर्वेक्षणों और सामुदायिक बैठकों में सक्रिय भागीदारी।

गौरतलब है कि कोविड-19 महामारी के दौरान भी आशा वर्करों ने जोखिम उठाते हुए ज़मीनी स्तर पर अनिवार्य स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कीं, जो उनके योगदान की गहराई को दर्शाता है।

सरकार की प्रतिक्रिया और औचित्य

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, 'मासिक प्रोत्साहन भत्ते में बढ़ोतरी आशा वर्करों के योगदान को मान्यता देने और उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि इससे आशा वर्करों का मनोबल बढ़ेगा, उनकी सेवाओं में निरंतरता आएगी और दिल्ली में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में सहयोग मिलेगा।

आम जनता और महिला सशक्तिकरण पर असर

यह फैसला न केवल आशा वर्करों की आर्थिक सुरक्षा को मज़बूती देगा, बल्कि दिल्ली में महिला आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी एक व्यावहारिक कदम माना जा रहा है। आशा वर्करें मुख्यतः महिलाएं होती हैं जो समाज के निचले पायदान पर काम करती हैं। बेहतर मानदेय से उनकी पारिवारिक आय में सुधार होगा और वे अपनी सेवाएं अधिक समर्पण के साथ दे सकेंगी, जिसका सीधा लाभ दिल्ली के लाखों परिवारों को मिलेगा।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में आशा वर्करों के मानदेय को लेकर चर्चा जारी है और विभिन्न राज्यों में उनके न्यूनतम वेतन की माँग उठती रही है। दिल्ली का यह निर्णय अन्य राज्य सरकारों के लिए एक संदर्भ बिंदु बन सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि बढ़ा हुआ भत्ता किस महीने से लागू होगा और इसके क्रियान्वयन की समयसीमा क्या होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ₹6,000 प्रति माह अब भी किसी भी न्यूनतम मज़दूरी मानक से काफी नीचे है — खासकर दिल्ली जैसे महंगे शहर में। असली सवाल यह है कि क्या यह वृद्धि आशा वर्करों को 'स्वयंसेवक' की श्रेणी से निकालकर नियमित स्वास्थ्य कर्मचारी का दर्जा देने की दिशा में पहला कदम है, या सिर्फ एक राजनीतिक संकेत। देशभर में आशा वर्करों की 'नियमितीकरण' की माँग वर्षों से लंबित है और दिल्ली का यह फैसला उस बहस को नई हवा दे सकता है — लेकिन भत्ता बढ़ाना और रोज़गार का कानूनी दर्जा देना दो अलग-अलग बातें हैं।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में आशा वर्करों का नया मासिक भत्ता कितना है?
दिल्ली कैबिनेट के 15 सितंबर 2026 के फैसले के बाद आशा वर्करों का मासिक प्रोत्साहन भत्ता ₹3,000 से बढ़ाकर ₹6,000 कर दिया गया है। यह बढ़ोतरी दिल्ली में कार्यरत सभी 6,725 आशा वर्करों पर लागू होगी।
दिल्ली में कुल कितनी आशा वर्कर हैं और वे क्या काम करती हैं?
दिल्ली में अभी 6,725 आशा वर्कर कार्यरत हैं। प्रत्येक आशा वर्कर लगभग 2,000 लोगों या 400 परिवारों को स्वास्थ्य सेवाएं, टीकाकरण प्रोत्साहन, मातृ एवं शिशु देखभाल और स्वास्थ्य जागरूकता से जोड़ने का काम करती हैं।
क्या अन्य भत्ते भी बढ़ाए गए हैं?
नहीं, केवल मासिक प्रोत्साहन भत्ता ₹3,000 से ₹6,000 किया गया है। दिल्ली सरकार के अनुसार अन्य प्रोत्साहन भत्ते पहले की तरह ही जारी रहेंगे।
यह फैसला किसने और कब लिया?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में दिल्ली कैबिनेट ने 15 सितंबर 2026 को यह फैसला लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार लंबे समय से इस विषय पर विचार-विमर्श कर रही थी और अब निर्णय ले लिया गया है।
इस भत्ता वृद्धि का महत्व क्या है?
यह वृद्धि आशा वर्करों की आर्थिक सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बेहतर मानदेय से उनका मनोबल बढ़ेगा और दिल्ली की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं अधिक प्रभावी हो सकेंगी।
राष्ट्र प्रेस
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