दिल्ली कैबिनेट का बड़ा फैसला: आशा वर्करों का मासिक भत्ता दोगुना, अब ₹6,000 मिलेंगे
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में दिल्ली कैबिनेट ने 15 सितंबर 2026 को एक अहम निर्णय लेते हुए राजधानी की आशा वर्करों का मासिक प्रोत्साहन भत्ता ₹3,000 से बढ़ाकर ₹6,000 कर दिया। यह बढ़ोतरी दिल्ली में कार्यरत सभी 6,725 आशा वर्करों पर तत्काल प्रभाव से लागू होगी, जबकि अन्य प्रोत्साहन भत्ते पूर्ववत जारी रहेंगे।
मुख्य घटनाक्रम
दिल्ली सरकार ने मंगलवार को कैबिनेट बैठक में यह ऐतिहासिक फैसला लिया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार इस मुद्दे पर लंबे समय से विचार-विमर्श कर रही थी और अब इस पर निर्णय ले लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मासिक प्रोत्साहन भत्ते में यह वृद्धि केवल नियमित भत्ते तक सीमित है — अन्य प्रकार के प्रोत्साहन भत्ते यथावत बने रहेंगे।
आशा वर्करों की भूमिका और उनका महत्व
मुख्यमंत्री ने आशा वर्करों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि वे दिल्ली की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की एक अनिवार्य कड़ी हैं। प्रत्येक आशा वर्कर औसतन लगभग 2,000 लोगों या 400 परिवारों की ज़िम्मेदारी संभालती है। इनका कार्य क्षेत्र व्यापक है — घर-घर जाकर स्वास्थ्य जानकारी देना, परिवारों को टीकाकरण के लिए प्रेरित करना, गर्भवती महिलाओं और नई माताओं की देखभाल में सहयोग करना, तथा स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस, जागरूकता कार्यक्रमों, सर्वेक्षणों और सामुदायिक बैठकों में सक्रिय भागीदारी।
गौरतलब है कि कोविड-19 महामारी के दौरान भी आशा वर्करों ने जोखिम उठाते हुए ज़मीनी स्तर पर अनिवार्य स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कीं, जो उनके योगदान की गहराई को दर्शाता है।
सरकार की प्रतिक्रिया और औचित्य
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, 'मासिक प्रोत्साहन भत्ते में बढ़ोतरी आशा वर्करों के योगदान को मान्यता देने और उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि इससे आशा वर्करों का मनोबल बढ़ेगा, उनकी सेवाओं में निरंतरता आएगी और दिल्ली में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में सहयोग मिलेगा।
आम जनता और महिला सशक्तिकरण पर असर
यह फैसला न केवल आशा वर्करों की आर्थिक सुरक्षा को मज़बूती देगा, बल्कि दिल्ली में महिला आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी एक व्यावहारिक कदम माना जा रहा है। आशा वर्करें मुख्यतः महिलाएं होती हैं जो समाज के निचले पायदान पर काम करती हैं। बेहतर मानदेय से उनकी पारिवारिक आय में सुधार होगा और वे अपनी सेवाएं अधिक समर्पण के साथ दे सकेंगी, जिसका सीधा लाभ दिल्ली के लाखों परिवारों को मिलेगा।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में आशा वर्करों के मानदेय को लेकर चर्चा जारी है और विभिन्न राज्यों में उनके न्यूनतम वेतन की माँग उठती रही है। दिल्ली का यह निर्णय अन्य राज्य सरकारों के लिए एक संदर्भ बिंदु बन सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि बढ़ा हुआ भत्ता किस महीने से लागू होगा और इसके क्रियान्वयन की समयसीमा क्या होगी।