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कांवड़ यात्रा 2026: दिल्ली सरकार ने बड़े शिविरों की अनुदान राशि बढ़ाकर ₹15 लाख की, 1,200 यूनिट मुफ्त बिजली जारी

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कांवड़ यात्रा 2026: दिल्ली सरकार ने बड़े शिविरों की अनुदान राशि बढ़ाकर ₹15 लाख की, 1,200 यूनिट मुफ्त बिजली जारी

सारांश

दिल्ली सरकार ने कांवड़ यात्रा 2026 के लिए बड़े शिविरों की अनुदान राशि ₹11 लाख से सीधे ₹15 लाख कर दी है। 2024 में 170 से बढ़कर 2025 में 308 हो चुके शिविरों की ज़रूरतों को देखते हुए यह फैसला लिया गया — साथ में 1,200 यूनिट मुफ्त बिजली और DBT से सीधा भुगतान।

मुख्य बातें

दिल्ली सरकार ने 20,000 वर्गफुट से बड़े कांवड़ शिविरों (6-12 दिन) की अनुदान राशि ₹11 लाख से बढ़ाकर ₹15 लाख करने का निर्णय लिया।
सभी श्रेणियों के शिविरों की सहायता राशि में वृद्धि; सबसे छोटे शिविरों के लिए अनुदान ₹1.50 लाख से बढ़कर ₹2 लाख तक।
कांवड़ समितियों को 1,200 यूनिट तक मुफ्त बिजली की सुविधा पूर्ववत जारी रहेगी।
अनुदान अब DBT के ज़रिए सीधे जिलाधिकारी कार्यालय से दो किस्तों में जारी होगा।
दिल्ली में कांवड़ शिविरों की संख्या 2024 में 170 से बढ़कर 2025 में 308 हो गई।
प्रस्तावों को दिल्ली मंत्रिमंडल की बैठक में अनुमोदन के लिए रखा जाएगा।

दिल्ली सरकार ने 27 जुलाई 2026 को कांवड़ यात्रा 2026 के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बड़े कांवड़ शिविरों को दी जाने वाली अनुदान राशि को ₹11 लाख से बढ़ाकर ₹15 लाख कर दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या, महंगाई और शिविर संचालन पर बढ़ते खर्च को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। इन सभी प्रस्तावों को मंगलवार को होने वाली दिल्ली मंत्रिमंडल की बैठक में अनुमोदन के लिए रखा जाएगा।

अनुदान राशि में क्या-क्या बदलाव हुए

20,000 वर्गफुट से अधिक क्षेत्र में 6 से 12 दिन तक संचालित होने वाले बड़े शिविरों की सहायता राशि ₹11 लाख से बढ़ाकर ₹15 लाख की जाएगी। इसी श्रेणी के 3 से 5 दिन वाले शिविरों के लिए यह राशि ₹6 लाख से बढ़कर ₹9 लाख होगी।

15,001 से 20,000 वर्गफुट वाले शिविरों के लिए 3 से 5 दिन की अवधि में अनुदान ₹4 लाख से ₹8 लाख और 6 से 12 दिन की अवधि में ₹7 लाख से ₹9 लाख किया जाएगा। 10,001 से 15,000 वर्गफुट वाले शिविरों के लिए क्रमशः ₹4 लाख से ₹6 लाख और ₹7 लाख से ₹8 लाख की बढ़ोतरी होगी।

5,001 से 10,000 वर्गफुट के शिविरों के लिए सहायता ₹2.50 लाख से ₹3 लाख और ₹4 लाख से ₹5 लाख की जाएगी। 5,000 वर्गफुट तक के छोटे शिविरों के लिए यह राशि ₹1.50 लाख से ₹2 लाख और ₹2 लाख से ₹3 लाख होगी।

मुफ्त बिजली और अन्य सुविधाएं

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि कांवड़ समितियों को पूर्ववत 1,200 यूनिट तक मुफ्त बिजली की सुविधा मिलती रहेगी। बीएसईएस और टीपीडीडीएल यात्रा शुरू होने से पहले समय पर बिजली कनेक्शन और सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करेंगे। यदि किसी शिविर की खपत 1,200 यूनिट से अधिक होती है, तो अतिरिक्त व्यय संबंधित समिति को स्वयं वहन करना होगा।

प्रशासनिक प्रक्रिया होगी सरल

अनुदान वितरण में देरी रोकने के लिए प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जाएगा। अब अग्रिम और अंतिम दोनों किस्तें सीधे संबंधित जिलाधिकारी (डीएम) कार्यालय से जारी की जाएंगी, जिससे राजस्व मुख्यालय के माध्यम से वित्त विभाग से अलग-अलग स्वीकृति लेने की आवश्यकता समाप्त होगी। अनुदान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से दो किस्तों में दिया जाएगा — 50 प्रतिशत अग्रिम और शेष 50 प्रतिशत यात्रा पूरी होने के बाद सत्यापन के उपरांत।

विभागीय समन्वय और सुरक्षा व्यवस्था

सिंगल विंडो सिस्टम के तहत नगर निगम (MCD) सफाई, कूड़ा उठान और फॉगिंग सुनिश्चित करेगा। स्वास्थ्य विभाग और CATS चौबीसों घंटे डॉक्टर, एम्बुलेंस और प्राथमिक उपचार केंद्र उपलब्ध रखेंगे। दिल्ली जल बोर्ड स्वच्छ पेयजल और टैंकर की व्यवस्था करेगा, जबकि DUSIB मोबाइल शौचालय उपलब्ध कराएगा। दिल्ली पुलिस और ट्रैफिक पुलिस सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और संवेदनशील स्थानों पर CCTV की व्यवस्था करेंगी।

शिविरों की बढ़ती संख्या और आगे की राह

गौरतलब है कि वर्ष 2024 में दिल्ली में 170 कांवड़ शिविर लगाए गए थे, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 308 हो गए। यह ऐसे समय में आया है जब शिविर संचालन की लागत और श्रद्धालुओं की संख्या दोनों में तेज़ वृद्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि 2025 में जिन कांवड़ समितियों और स्थलों को स्वीकृति दी गई थी, उसी सूची को 2026 के लिए अंतिम माना जाएगा और इस वर्ष किसी नई समिति या स्थल को अनुमति नहीं दी जाएगी। SDM और तहसीलदार जियो-टैग फोटो और सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर यात्रा से पहले और बाद में शिविरों का निरीक्षण करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह सवाल उठता है कि अनुदान में वृद्धि वास्तव में बढ़ी लागत के अनुपात में है या नहीं। DBT और जियो-टैगिंग जैसी पारदर्शिता की व्यवस्थाएं सराहनीय हैं, लेकिन जब तक सत्यापन तंत्र स्वतंत्र और सार्वजनिक न हो, इनकी प्रभावशीलता सीमित रहेगी।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली सरकार ने कांवड़ शिविरों के लिए कितनी अनुदान राशि बढ़ाई है?
दिल्ली सरकार ने 20,000 वर्गफुट से बड़े और 6 से 12 दिन चलने वाले शिविरों की अनुदान राशि ₹11 लाख से बढ़ाकर ₹15 लाख कर दी है। अन्य सभी श्रेणियों के शिविरों की सहायता राशि में भी आनुपातिक वृद्धि की गई है।
कांवड़ समितियों को मुफ्त बिजली कितनी मिलेगी?
कांवड़ समितियों को पूर्ववत 1,200 यूनिट तक मुफ्त बिजली की सुविधा मिलती रहेगी। 1,200 यूनिट से अधिक खपत होने पर अतिरिक्त व्यय संबंधित समिति को स्वयं वहन करना होगा।
अनुदान राशि कैसे और कब मिलेगी?
अनुदान DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से दो किस्तों में दिया जाएगा — 50 प्रतिशत अग्रिम और शेष 50 प्रतिशत यात्रा पूरी होने के बाद सत्यापन उपरांत। अब यह राशि सीधे जिलाधिकारी कार्यालय से जारी होगी, जिससे प्रक्रिया तेज़ होगी।
2026 में कितने कांवड़ शिविरों को अनुमति मिलेगी?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 2025 में जिन कांवड़ समितियों और स्थलों को स्वीकृति दी गई थी, उसी सूची को 2026 के लिए अंतिम माना जाएगा। इस वर्ष कोई नई समिति या नया स्थल अनुमोदित नहीं किया जाएगा।
दिल्ली में कांवड़ शिविरों की संख्या कितनी बढ़ी है?
वर्ष 2024 में दिल्ली में 170 कांवड़ शिविर लगाए गए थे, जो 2025 में बढ़कर 308 हो गए — यानी लगभग दोगुनी वृद्धि। इसी बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए अनुदान राशि में वृद्धि का निर्णय लिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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