कांवड़ यात्रा 2025: दिल्ली सरकार ने उच्च स्तरीय समिति का पुनर्गठन किया, कपिल मिश्रा बने अध्यक्ष
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आगामी कांवड़ यात्रा को सुव्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से उच्च स्तरीय 'कांवड़ समिति' का पुनर्गठन किया है। दिल्ली सरकार के संस्कृति और कानून मंत्री कपिल मिश्रा को इस समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि पाँच विधायकों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। यह घोषणा मुख्यमंत्री ने 30 मई को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट के माध्यम से की।
समिति की संरचना और सदस्य
नवगठित कांवड़ समिति में अध्यक्ष कपिल मिश्रा के अतिरिक्त पाँच विधायक — अजय माहवार, अनिल शर्मा, करनैल सिंह, संजय गोयल और उमंग बजाज — को सदस्य के रूप में नामित किया गया है। ये विधायक दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। समिति शीघ्र ही दिल्ली के सभी जिलाधिकारियों, दिल्ली पुलिस, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित करेगी।
समिति का मुख्य फोकस
समिति का ध्यान रूट मैनेजमेंट, वाटरप्रूफ टेंटों की गुणवत्ता, चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता, 24 घंटे निर्बाध बिजली-पानी की आपूर्ति और समग्र सुरक्षा व्यवस्था पर केंद्रित रहेगा। मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि दिल्ली की सीमा में प्रवेश करने वाले प्रत्येक शिवभक्त को अतिथि के रूप में सम्मानजनक और श्रेष्ठ सुविधाएँ मिलें।
पिछले वर्षों की तुलना में बड़ा विस्तार
दिल्ली सरकार के आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में राजधानी में केवल 170 कांवड़ शिविरों को मंजूरी मिली थी, जबकि वर्ष 2025 में सरकार की सरल मंजूरी प्रक्रिया के चलते यह संख्या बढ़कर 374 पंजीकृत कांवड़ शिविर हो गई — जो एक रिकॉर्ड वृद्धि है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने पुरानी टेंडर प्रथा को समाप्त कर शिविरों को सीधे बैंक खातों में डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) के माध्यम से ₹50,000 से लेकर अधिकतम ₹11 लाख तक की पारदर्शी आर्थिक सहायता प्रदान की। इस सहायता का 50 प्रतिशत हिस्सा आयोजन से पहले ही अग्रिम रूप से जारी किया गया था।
बिजली और अन्य रियायतें
वित्तीय बोझ कम करने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने प्रत्येक पंजीकृत शिविर को 1,200 यूनिट तक मुफ्त बिजली और अस्थायी मीटर के सिक्योरिटी डिपॉजिट में 75 प्रतिशत की छूट भी प्रदान की थी। मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल एक पारंपरिक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और जनआस्था का विराट महोत्सव है। आगामी सावन माह में इन व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ किए जाने की उम्मीद है।