2 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दिल्ली में 3 किलोवाट रूफटॉप सोलर सिस्टम अब शून्य अग्रिम लागत पर, CM रेखा गुप्ता का बड़ा ऐलान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दिल्ली में 3 किलोवाट रूफटॉप सोलर सिस्टम अब शून्य अग्रिम लागत पर, CM रेखा गुप्ता का बड़ा ऐलान

सारांश

दिल्ली सरकार ने सोलर नीति में दूसरा संशोधन कर बड़ा दांव खेला है — 3 किलोवाट तक के रूफटॉप सोलर सिस्टम अब बिना एक रुपए अग्रिम दिए लगेंगे। केंद्र और दिल्ली सरकार की ₹78,000-₹78,000 की दोहरी सब्सिडी के साथ, आम घर अब बिजली उपभोक्ता से उत्पादक बन सकेंगे।

मुख्य बातें

CM रेखा गुप्ता ने 1 सितंबर 2026 को 'दिल्ली सोलर एनर्जी पॉलिसी-2023' में दूसरे संशोधन की घोषणा की।
वित्त वर्ष 2025-26 में 400 यूनिट तक खपत वाले उपभोक्ताओं को 3 किलोवाट तक का सोलर सिस्टम शून्य अग्रिम लागत पर मिलेगा।
केंद्र सरकार की ₹78,000 और दिल्ली सरकार की ₹78,000 — दोनों की कैपिटल सब्सिडी का संयुक्त लाभ।
200 यूनिट तक उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को 100% बिजली सब्सिडी जारी रहेगी और एनर्जी-सेविंग इंसेंटिव भी मिलेगा।
सोलर सिस्टम का रखरखाव वेंडर द्वारा 5 वर्षों तक अनिवार्य; डिस्कॉम के ज़रिए 25 वर्षों तक जारी रखने का विकल्प।
अतिरिक्त सोलर बिजली ग्रिड को भेजने पर डिस्कॉम की औसत खरीद लागत पर भुगतान मिलेगा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 1 सितंबर 2026 को दिल्ली सचिवालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि वित्त वर्ष 2025-26 में 400 यूनिट तक औसत मासिक खपत वाले घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 3 किलोवाट तक के रूफटॉप सोलर सिस्टम बिना किसी शुरुआती लागत के लगाए जाएंगे। यह घोषणा 'दिल्ली सोलर एनर्जी पॉलिसी-2023' में किए गए दूसरे संशोधन के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य राजधानी के आम घरों तक सौर ऊर्जा की पहुँच सुनिश्चित करना है।

सब्सिडी संरचना और वित्तीय प्रावधान

नई नीति के अंतर्गत केंद्र सरकार की ₹78,000 की सब्सिडी के साथ-साथ दिल्ली सरकार भी ₹78,000 की अतिरिक्त कैपिटल सब्सिडी प्रदान करेगी। इसके अलावा, दिल्ली सरकार एक अतिरिक्त टॉप-अप के माध्यम से सोलर प्लांट की टेंडर लागत और दी जाने वाली सब्सिडी के बीच के अंतर को भी वहन करेगी। इस प्रकार उपभोक्ता को स्थापना के समय कोई भुगतान नहीं करना होगा।

गौरतलब है कि पहले उपभोक्ताओं को सोलर सिस्टम लगवाने के लिए अग्रिम भुगतान करना पड़ता था, जबकि इंसेंटिव बाद के वर्षों में मिलते थे। नई व्यवस्था इस क्रम को पलटती है और शुरुआती चरण में ही आर्थिक सहायता को प्राथमिकता देती है।

ऊर्जा बचत प्रोत्साहन और नेट मीटरिंग

200 यूनिट तक बिजली उपयोग करने वाले पात्र उपभोक्ताओं को मौजूदा 100 प्रतिशत बिजली सब्सिडी जारी रहेगी। इसके साथ ही, वे सोलर पावर से ऊर्जा बचाने पर एनर्जी-सेविंग इंसेंटिव भी अर्जित कर सकेंगे। 3 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगभग 300 यूनिट बिजली उत्पन्न कर सकता है — यदि कोई परिवार केवल 200 यूनिट उपयोग करता है, तो शेष 100 यूनिट ग्रिड को भेजकर अतिरिक्त आय प्राप्त की जा सकती है।

ग्रिड को आपूर्ति की गई अतिरिक्त सोलर बिजली का भुगतान डिस्कॉम (बिजली वितरण कंपनी) की औसत बिजली खरीद लागत के आधार पर किया जाएगा। पात्र उपभोक्ताओं को मासिक बिजली बिलों पर नेट मीटरिंग का लाभ भी मिलेगा।

रखरखाव और दीर्घकालिक व्यवस्था

सरकार द्वारा स्थापित सोलर सिस्टम का संचालन और रखरखाव संबंधित वेंडर द्वारा अनिवार्य रूप से पाँच वर्षों तक किया जाएगा। इसके बाद उपभोक्ताओं के पास डिस्कॉम के माध्यम से सोलर इंस्टॉलेशन का रखरखाव सिस्टम के 25 वर्षीय जीवनकाल तक जारी रखने का विकल्प होगा, जिससे उन्हें तकनीकी देखभाल की चिंता से मुक्ति मिलेगी।

पीएम सूर्य घर योजना से जुड़ाव

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस नीति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के विज़न को दिल्ली में और सुदृढ़ करने की दिशा में एक कदम बताया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऊर्जा मंत्री आशीष सूद भी उपस्थित रहे।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में रूफटॉप सोलर अपनाने की गति को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर नीतिगत प्रयास कर रही हैं। दिल्ली का यह कदम उन राज्यों के लिए एक मॉडल बन सकता है जो अग्रिम लागत की बाधा को सौर ऊर्जा विस्तार की सबसे बड़ी चुनौती मानते हैं।

आगे की राह

नई नीति के लागू होने के बाद दिल्ली के घरेलू उपभोक्ता न केवल बिजली के उपभोक्ता रहेंगे, बल्कि उत्पादक की भूमिका भी निभाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि इस संशोधित नीति से अधिक से अधिक परिवार सोलर ऊर्जा की ओर रुख करें और दिल्ली के ऊर्जा क्षेत्र में हरित बदलाव को गति मिले।

संपादकीय दृष्टिकोण

टेंडर लागत और सब्सिडी के बीच के अंतर को भरने का वित्तीय बोझ, और 25 वर्षीय रखरखाव व्यवस्था की विश्वसनीयता — ये सब अभी स्पष्ट नहीं हैं। देश के अन्य राज्यों में ऐसी योजनाओं में वेंडर की गुणवत्ता और देरी प्रमुख शिकायतें रही हैं। दिल्ली अगर इन खामियों को दूर कर सके, तो यह मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर अनुकरणीय बन सकता है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में 3 किलोवाट रूफटॉप सोलर सिस्टम शून्य लागत पर कैसे मिलेगा?
केंद्र सरकार की ₹78,000 और दिल्ली सरकार की ₹78,000 की कैपिटल सब्सिडी मिलाकर तथा टेंडर लागत और सब्सिडी के अंतर को दिल्ली सरकार के टॉप-अप से भरकर उपभोक्ता की अग्रिम लागत शून्य कर दी जाएगी। यह सुविधा वित्त वर्ष 2025-26 में 400 यूनिट तक औसत मासिक खपत वाले घरेलू उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध होगी।
इस योजना का लाभ कौन उठा सकता है?
वे घरेलू उपभोक्ता जिनकी औसत मासिक बिजली खपत 400 यूनिट तक है, इस योजना के पात्र हैं। 200 यूनिट तक उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को मौजूदा 100% बिजली सब्सिडी के साथ-साथ एनर्जी-सेविंग इंसेंटिव का भी लाभ मिलेगा।
सोलर सिस्टम लगने के बाद रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी होगी?
सरकार द्वारा स्थापित सोलर सिस्टम का संचालन और रखरखाव संबंधित वेंडर द्वारा अनिवार्य रूप से पाँच वर्षों तक किया जाएगा। इसके बाद उपभोक्ता डिस्कॉम के माध्यम से सिस्टम के 25 वर्षीय जीवनकाल तक रखरखाव जारी रखने का विकल्प चुन सकते हैं।
क्या सोलर सिस्टम से अतिरिक्त बिजली बेची जा सकती है?
हाँ, ग्रिड को आपूर्ति की गई अतिरिक्त सोलर बिजली के लिए डिस्कॉम की औसत बिजली खरीद लागत के आधार पर भुगतान किया जाएगा। 3 किलोवाट का सिस्टम लगभग 300 यूनिट उत्पन्न कर सकता है, और यदि परिवार 200 यूनिट उपयोग करता है तो शेष 100 यूनिट ग्रिड को भेजकर आय अर्जित की जा सकती है।
'दिल्ली सोलर एनर्जी पॉलिसी' में यह संशोधन पहले से कैसे अलग है?
पहले उपभोक्ताओं को सोलर सिस्टम लगवाने के लिए अग्रिम भुगतान करना पड़ता था और इंसेंटिव बाद के वर्षों में मिलते थे। नया संशोधन इस क्रम को पलटता है — शुरुआती चरण में ही पूरी वित्तीय सहायता दी जाएगी ताकि उपभोक्ता पर कोई आर्थिक बोझ न पड़े।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले