दिल्ली उच्च न्यायालय ने राणा अयूब के संदेशों पर केंद्र सरकार और पुलिस से मांगा स्पष्टीकरण
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली उच्च न्यायालय ने राणा अयूब के संदेशों पर गंभीरता से विचार किया।
- केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को जवाब देने के लिए कहा गया है।
- इस मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को होगी।
- सभी पक्षों का समय पर जवाब देना आवश्यक है।
नई दिल्ली, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने पत्रकार राणा अयूब से संबंधित एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई की है। यह मामला 2013 से 2017 के बीच उनके द्वारा साझा किए गए संदेशों से जुड़ा है, जिनमें उन पर भारत के खिलाफ भावना फैलाने का आरोप लगाया गया है। अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
सुनवाई के दौरान, न्यायालय ने राणा अयूब के हिंदू देवी-देवताओं और वीर सावरकर को लेकर दिए गए कुछ संदेशों पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि ये संदेश अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक प्रतीत होते हैं, जो समाज में तनाव उत्पन्न कर सकते हैं। इस मामले में उचित कार्यवाही की आवश्यकता है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स को निर्देश दिया है कि वे इन संदेशों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराएं। अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले में कोई देरी नहीं होनी चाहिए और इसे तुरंत सुना जाना चाहिए।
न्यायालय ने राणा अयूब को भी नोटिस जारी किया है और उनसे अपना पक्ष रखने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह मामला सार्वजनिक भावना और सामाजिक सौहार्द से संबंधित है, इसलिए सभी पक्षों का समय पर जवाब आवश्यक है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि दिल्ली पुलिस, केंद्र सरकार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स अपने जवाब अगले दिन तक प्रस्तुत करें। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को तय की है, जहां इस पूरे प्रकरण पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।