दिल्ली LG टीएस संधू ने GGSIPU में PPP मॉडल अपनाने का आह्वान किया, 'विकसित दिल्ली 2027' का हवाला दिया
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली के उपराज्यपाल टीएस संधू ने 13 अक्टूबर 2026 को उच्च शिक्षा संस्थानों से पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल अपनाने का आग्रह किया, ताकि शहर में बेहतर सार्वजनिक सेवाएँ सुनिश्चित की जा सकें। उन्होंने यह बात गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU), द्वारका में आयोजित एक कैपेसिटी बिल्डिंग कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही।
क्या बोले उपराज्यपाल
संधू ने अपनी बात एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की। उन्होंने लिखा, 'PPP का मतलब सिर्फ फाइनेंसिंग नहीं, बल्कि इसका मकसद बेहतर नतीजे देने के लिए पब्लिक मकसद को प्राइवेट क्षमता के साथ जोड़ना है।' उन्होंने आगे कहा कि 'एक प्रैक्टिकल PPP प्लेबुक' अधिकारियों को साझेदारियों को 'विकसित दिल्ली 2027' के दृष्टिकोण के अनुरूप कुशल और जवाबदेह सार्वजनिक सेवाओं में बदलने में मदद करेगी।
सफलता के चार स्तंभ
एक बयान के अनुसार, संधू ने PPP की सफलता के लिए चार आधारभूत स्तंभ गिनाए। पहला — सही PPP मॉडल का चुनाव जहाँ वास्तविक मूल्यवर्धन हो। दूसरा — ठोस तैयारी जिसमें संपूर्ण जाँच-पड़ताल और संतुलित जोखिम-साझाकरण शामिल हो। तीसरा — बेहतर समन्वय ताकि तालमेल और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित हो। चौथा — मापने योग्य नतीजे और पूरे जीवनचक्र में पारदर्शिता के लिए जवाबदेही।
तकनीकी विश्वविद्यालयों को शहरी समस्याओं का हल ढूंढने का निर्देश
यह ऐसे समय में आया है जब संधू पहले ही तकनीकी विश्वविद्यालयों से दिल्ली की नागरिक समस्याओं — जैसे सफाई, यातायात प्रबंधन, सड़कों की दशा और बाढ़ प्रबंधन — के लिए व्यावहारिक समाधान विकसित करने को कह चुके हैं। गौरतलब है कि पिछले महीने उन्होंने नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (NSUT) की छठी कोर्ट बैठक की अध्यक्षता की थी, जहाँ उन्होंने शोध-पत्रों को दिल्ली की असल चुनौतियों के समाधान में बदलने का आह्वान किया था।
संधू ने NSUT को MCD, NDMC, दिल्ली पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, PWD और परिवहन विभाग जैसी सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय करके उनकी विशिष्ट ज़रूरतों के मुताबिक तकनीकी समाधान उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
AI शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा पर ज़ोर
संधू ने AI-आधारित शिक्षा को वैश्विक सहयोग के ज़रिए भविष्य के लिए तैयार करने की ज़रूरत पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि 'एआई शिक्षा को ग्लोबल सहयोग के जरिए भविष्य के लिए तैयार रहना चाहिए, जिसमें ट्रांसफॉर्मेटिव एप्लीकेशन — खासकर सरकारी अस्पतालों में एआई-इनेबल्ड हेल्थकेयर — पर फोकस हो।'
आगे की राह
संधू ने स्पष्ट किया कि 'विकसित दिल्ली' की राह शोध से समाधान की ओर और नवाचार से असर की ओर बढ़ने में है। उनके यह संदेश ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण हैं जब दिल्ली के विश्वविद्यालय सरकारी एजेंडे में शहरी नवाचार के केंद्र के रूप में स्थापित होने की कोशिश में हैं। अब देखना होगा कि ये संस्थान PPP ढाँचे को किस हद तक अपने पाठ्यक्रम और शोध कार्यों में आत्मसात कर पाते हैं।