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क्या दिल्ली में अवैध रूप से बने आधार कार्ड पर सख्ती की जा रही है?

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क्या दिल्ली में अवैध रूप से बने आधार कार्ड पर सख्ती की जा रही है?

सारांश

दिल्ली में आधार कार्ड की अवैध प्रक्रिया पर उपराज्यपाल का सख्त रुख, अधिकारियों को दिए गए निर्देशों के पीछे का कारण जानें। क्या यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है?

मुख्य बातें

अवैध आधार कार्ड की रोकथाम के लिए कड़े नियम लागू किए जाएंगे।
उपराज्यपाल ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं।
नामांकन प्रक्रिया को 'इन-हाउस मॉडल' के तहत संचालित किया जाएगा।
स्थानीय लोगों के रोजगार की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया गया है।
आधार नामांकन एक संवेदनशील प्रक्रिया है।

नई दिल्ली, 11 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली में अवैध रूप से रहने वाले नागरिकों के पास आधार कार्ड जैसे भारतीय पहचान पत्रों के मामलों में उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शुक्रवार को उपराज्यपाल ने दिल्ली के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए और कहा कि अब आधार नामांकन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उपराज्यपाल सचिवालय ने शुक्रवार को दिल्ली के मुख्य सचिव को एक पत्र लिखा, जिसमें आधार कार्ड जारी करने के लिए कड़े नियम लागू करने का अनुरोध किया गया है। उपराज्यपाल ने नामांकन प्रक्रिया को 'इन-हाउस मॉडल' के तहत संचालित करने का सुझाव दिया है। इसके साथ ही मुख्य सचिव से 15 जुलाई तक दिल्ली के सभी आधार नामांकन केंद्रों की सूची मांगी गई है।

मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में उपराज्यपाल सचिवालय ने लिखा, "दिल्ली सरकार के रजिस्ट्रारों की जिम्मेदारियों, विशेष रूप से फील्ड स्तर पर इंप्लीमेंटेशन, मॉनिटरिंग और वेरिफिकेशन प्रक्रियाओं की दोबारा समीक्षा की आवश्यकता है। उपराज्यपाल ने निर्देश दिया है कि सभी रजिस्ट्रारों को स्पष्ट निर्देश दिया जाए कि वे आधार (नामांकन और अद्यतन) विनियम, 2016 के प्रावधानों का सख्ती से पालन करें और दो महीने में इन-हाउस मॉडल को अपनाएं।"

पत्र में उल्लेख किया गया है, "कई मामलों में अवैध रूप से रह रहे व्यक्तियों ने गलत दस्तावेजों या तथ्यों को छिपाकर आधार कार्ड प्राप्त किए हैं। इसका एक दुष्प्रभाव यह है कि ऐसे लोग बाद में पासपोर्ट और मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेज भी हासिल कर लेते हैं, जो नागरिकता को प्रमाणित करते हैं। इसके अलावा, वे केंद्र और राज्य सरकार की कई योजनाओं का लाभ भी उठाते हैं। एक बार आधार कार्ड प्राप्त करने के बाद ये लोग नौकरियों में प्रवेश पाते हैं, जिससे स्थानीय लोगों के रोजगार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह स्थिति राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर चिंता का विषय है।"

उपराज्यपाल सचिवालय ने मुख्य सचिव से कहा है, "यह यूआईडीएआई के 14 अक्टूबर 2022 के कार्यालय ज्ञापन से स्पष्ट है कि आधार नामांकन के लिए प्रयुक्त मशीनें और ऑपरेटर या तो संबंधित रजिस्ट्रार के नियमित कर्मचारी होने चाहिए या किसी मान्यता प्राप्त मैनपावर एजेंसी से वेतन आधार पर नियोजित किए जाने चाहिए। साथ ही, उन्हें निर्धारित प्रशिक्षण मानकों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाना अनिवार्य है। इस संबंध में वर्तमान स्थिति की स्पष्ट जानकारी पेश की जाए।"

उपराज्यपाल ने निर्देश दिए हैं कि आधार नामांकन एक संवेदनशील प्रक्रिया है। इसलिए नामांकन से पहले डेटा एकत्र करने वाले व्यक्ति की जिम्मेदारी तय करना आवश्यक है ताकि किसी चूक की स्थिति में जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। यदि कोई कर्मचारी लापरवाही बरतते हुए अवैध प्रवासियों के आधार नामांकन में सहयोग करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

हमें यह समझना चाहिए कि आधार कार्ड की सुरक्षा प्रक्रिया को मजबूत करना देश की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। यह कदम न केवल अवैध प्रवासियों को रोकने में मदद करेगा, बल्कि यह स्थानीय लोगों के रोजगार की सुरक्षा भी करेगा।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में आधार कार्ड पर सख्ती क्यों की जा रही है?
उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने अवैध आधार कार्ड के मामलों को रोकने और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया है।
क्या नए नियमों का पालन करना अनिवार्य है?
जी हां, सभी रजिस्ट्रारों को निर्देश दिया गया है कि वे आधार विनियम, 2016 के प्रावधानों का सख्ती से पालन करें।
आधार नामांकन प्रक्रिया में क्या बदलाव आएंगे?
आधार नामांकन प्रक्रिया 'इन-हाउस मॉडल' पर संचालित की जाएगी, जिससे गुणवत्ता और सटीकता बढ़ सके।
राष्ट्र प्रेस
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