दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना के कार्यकाल पर आम आदमी पार्टी का जोरदार हमला
सारांश
Key Takeaways
- वीके सक्सेना का कार्यकाल विवादों से भरा रहा।
- जनहित की योजनाओं में रुकावट आई।
- आम आदमी पार्टी ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
नई दिल्ली, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली में नए उपराज्यपाल की नियुक्ति के बाद आम आदमी पार्टी ने वीके सक्सेना के कार्यकाल पर कड़ी टिप्पणी की है। पार्टी के नेताओं का आरोप है कि उनके पूरे कार्यकाल के दौरान, चुनी हुई सरकार के कार्यों में लगातार रुकावट डाली गई और जनहित की कई योजनाओं को रोका गया।
'आप' के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि एलजी वीके सक्सेना दिल्ली से 'बे-आबरू होकर' लद्दाख चले गए और उनकी छवि दिल्ली की जनता के मन में नकारात्मक रूप से बसी रहेगी।
सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि उपराज्यपाल बनने के तुरंत बाद विनय कुमार सक्सेना ने दिल्ली के कथित एक्साइज मामले को उठाया और अपने नजदीकी अधिकारियों के माध्यम से इसकी जांच करवाई। उन्होंने कहा कि यह जांच पूरी तरह से फर्जी थी और अदालत में इसकी वास्तविकता उजागर हो गई। भारद्वाज के अनुसार, राऊज एवेन्यू कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न उठाए गए।
'आप' नेता ने कहा कि एलजी ने अपने कार्यकाल के दौरान ऐसे कई निर्णय लिए जो दिल्ली के आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बने। उन्होंने यह भी कहा कि एलजी ने यमुना नदी की सफाई को लेकर खुद को विशेषज्ञ बताया, लेकिन उनके कार्यकाल में नदी की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ।
भारद्वाज ने कहा कि जिन गरीबों को इस दौरान मुश्किलों का सामना करना पड़ा और जिनकी नौकरियां गईं, उनकी बद्दुआ उपराज्यपाल का पीछा नहीं छोड़ेगी।
वहीं, 'आप' विधायक दल के चीफ व्हिप संजीव झा ने भी उपराज्यपाल के कार्यकाल की आलोचना की है, यह कहते हुए कि दिल्ली उन्हें किसी सकारात्मक कार्य के लिए याद नहीं रखेगी, बल्कि जनहित की योजनाओं में अड़ंगा डालने के लिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई महत्वपूर्ण योजनाओं को रोका गया या उनमें अनावश्यक जांच बैठा दी गई।
संजीव झा ने बताया कि शिक्षकों की ट्रेनिंग के लिए फिनलैंड भेजने की योजना को रोका गया, मोहल्ला क्लीनिकों पर आरोप लगाकर जांच बैठाई गई और 'दिल्ली की योगशाला' जैसी पहल को भी निलंबित किया गया। इसके अतिरिक्त, 'फरिश्ते दिल्ली के' योजना के फंड को लेकर विवाद उत्पन्न किया गया और पानी के बिलों की वन-टाइम सेटलमेंट योजना को भी अटका दिया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि इसी दौरान अस्पतालों के डाटा एंट्री ऑपरेटरों और लगभग 10,000 बस मार्शलों की नौकरियां चली गईं। झा के अनुसार, दिल्ली सरकार की कई फाइलें महीनों तक रोकी गईं, जिससे प्रशासनिक कार्य में बाधा आई और चुनी हुई सरकार को कमजोर करने का प्रयास हुआ।
'आप' नेताओं का कहना है कि कथित शराब घोटाले के मामले को भी इसी समय में राजनीतिक मुद्दा बनाया गया और अरविंद केजरीवाल को बदनाम करने की कोशिश की गई। पार्टी का दावा है कि आने वाले समय में दिल्ली की जनता इस संपूर्ण काल को लोकतांत्रिक व्यवस्था में टकराव के रूप में याद रखेगी।