राजनाथ सिंह का संदेश: अतीत से प्रेरणा लेकर भविष्य को मजबूत बनाएं

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राजनाथ सिंह का संदेश: अतीत से प्रेरणा लेकर भविष्य को मजबूत बनाएं

सारांश

कोलकाता में आयोजित 'मैरीटाइम कॉन्क्लेव सागर संकल्प' में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पश्चिम बंगाल की ऐतिहासिक भूमिका और आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि जो राष्ट्र अपने अतीत से सीखता है, वही भविष्य को मजबूती प्रदान करता है।

Key Takeaways

  • पश्चिम बंगाल की ऐतिहासिक भूमिका
  • आत्मनिर्भरता की आवश्यकता
  • समुद्री क्षेत्र का विकास
  • राष्ट्रीय सुरक्षा में सार्वजनिक क्षेत्र का योगदान
  • भविष्य की दिशा में प्रेरणा

कोलकाता, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पश्चिम बंगाल के अपने दौरे के दौरान कोलकाता में आयोजित "मैरीटाइम कॉन्क्लेव सागर संकल्प" में भाग लिया। इस कार्यक्रम में अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की भूमि की एक विशेष ऊर्जा है। इस भूमि ने न केवल भारत को साहित्य और कला प्रदान की है, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्रीय गर्व को भी प्रेरित किया है। एक समय था जब समुद्री मार्ग से वस्तुएं आती थीं, और कोलकाता एक प्रमुख केंद्र था। यह शहर देश की आर्थिक मजबूती का प्रतीक रहा है।

राजनाथ सिंह ने जीआरएसई लिमिटेड द्वारा आयोजित इस कॉन्क्लेव में कहा कि मीडिया केवल सूचना देने का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज को एक दिशा भी देता है। उन्होंने कहा, "जब हम भारत के गौरवमयी इतिहास पर ध्यान देते हैं, तो हमें यह ज्ञात होता है कि ढाई हजार वर्ष पहले से लेकर मध्यकालीन युग तक भारत वैश्विक व्यापार का एक प्रमुख केंद्र रहा है।"

उन्होंने आगे कहा कि उस समय जब विश्व के कई हिस्से विकास के प्रारंभिक चरण में थे, तब भारत ज्ञान, व्यापार और संस्कृति के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। भारतीय जहाज समुद्री मार्गों पर दूर-दूर तक यात्रा करते थे और हमारा संपर्क रोमन साम्राज्य और मेसोपोटामिया सभ्यता से भी था। उस समय श्रीलंका और दक्षिण पूर्व एशिया, कंबोडिया और इंडोनेशिया तक भारतीय व्यापारियों की पहुँच थी।

रक्षा मंत्री ने कहा कि समुद्री क्षेत्र की महत्वपूर्णता को समझते हुए, यह अनिवार्य है कि हम अपने प्राचीन ज्ञान और आधुनिक तकनीक को एकीकृत करें। जो राष्ट्र अपने अतीत से सीखता है, वही भविष्य को मजबूती प्रदान करता है।

आज का समुद्री क्षेत्र पहले से बहुत बदल चुका है। अब यह केवल व्यापार के रास्ते या नौसैनिक शक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास, तकनीकी नवाचार और रणनीतिक स्वायत्तता का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुका है।

रक्षा क्षेत्र में आज उन्नत और सटीक तकनीक का उपयोग हो रहा है। इसीलिए केंद्र सरकार ने हमेशा यह विचार रखा है कि इस अनिश्चितता के समय में सप्लाई चेन में रुकावटों से बचने का एकमात्र उपाय आत्मनिर्भरता है। हमारी आत्मनिर्भरता के विज़न का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम हैं। अब पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन, प्रदर्शन बेंचमार्किंग और अनुसंधान एवं विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

रक्षा मंत्री ने कहा, "भारत के रक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र की हमेशा प्राथमिकता रही है। पहले ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड ने इस निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चार शिपयार्ड सहित विभिन्न क्षेत्रों में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने राष्ट्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।"

उन्होंने आगे कहा, "इन शिपयार्ड को उत्पादन इकाइयों के साथ-साथ प्रौद्योगिकी केंद्रों में विकसित करने का लक्ष्य है। हम इन्हें वैश्विक मानकों पर लाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर आधुनिकीकरण, डिजिटल शिप डिजाइन टूल्स, मॉड्यूलर निर्माण तकनीक और आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण के माध्यम से प्रयास कर रहे हैं।"

रक्षा मंत्री ने बताया कि "हमारा उद्देश्य यही रहा है कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र मिलकर आगे बढ़ें और यह हो रहा है। आज देश में रक्षा सामग्री, प्लेटफॉर्म और उपकरणों में लगभग 25 प्रतिशत योगदान निजी उद्योगों से आ रहा है।"

उन्होंने गर्व से कहा, "पिछले वित्त वर्ष में हमारा घरेलू रक्षा उत्पादन डेढ़ लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड आंकड़े को पार कर चुका है।" हमें इन आंकड़ों से अभिभूत नहीं होना है, बल्कि और आगे बढ़ना है। आत्मनिर्भरता अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक वास्तविकता बन चुकी है। आज भारतीय नौसेना के लिए जितने युद्धपोत और पनडुब्बियां ऑर्डर पर हैं, वे सभी भारतीय शिपयार्ड में बन रही हैं। जब हम कहते हैं कि हम बिल्डर्स नेवी बन चुके हैं, तो यह कोई नारा नहीं, बल्कि सच्चाई है।

Point of View

बल्कि भविष्य के विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।
NationPress
06/03/2026

Frequently Asked Questions

राजनाथ सिंह ने किस कार्यक्रम में भाग लिया?
राजनाथ सिंह ने कोलकाता में आयोजित 'मैरीटाइम कॉन्क्लेव सागर संकल्प' में भाग लिया।
राजनाथ सिंह ने आत्मनिर्भरता के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता केवल नारा नहीं, बल्कि अब एक व्यावहारिक वास्तविकता बन चुकी है।
भारत का समुद्री व्यापार इतिहास क्या है?
भारत हजारों वर्षों से वैश्विक व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।
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