क्या दिल्ली सरकार निजी ईवी वाहनों को शेयर टैक्सी के रूप में चलाने का निर्णय लेगी?
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को साझा टैक्सी के रूप में चलाने की योजना बना रही है।
- इससे प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी।
- वाहन कंपनियों को ग्राहकों को राहत देनी होगी।
- महिला ड्राइवरों के लिए टैक्सी सेवा शुरू की जाएगी।
- चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना है।
नई दिल्ली, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को वाहन निर्माता कंपनियों और ओला, उबर जैसी एग्रीगेटर कंपनियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इसका उद्देश्य राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर लोगों का रुझान बढ़ाना और साझा परिवहन को प्रोत्साहित करना है।
दिल्ली सरकार ने निजी ईवी वाहनों को शेयर टैक्सी के रूप में चलाने के लिए सहमति जताई है और कहा है कि इस दिशा में नियमों में बदलाव किए जाएंगे। इसके साथ ही कंपनियों की समस्याओं के समाधान के लिए एक प्रभावी तंत्र विकसित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि दिल्ली में प्रदूषण को प्रभावी और स्थायी रूप से नियंत्रित करने के लिए सड़कों पर वाहनों की संख्या को कम करना आवश्यक है। परिवहन से जुड़ी कंपनियों को इस मिशन में सहयोग देना होगा, ताकि राजधानी को विकसित दिल्ली के रूप में परिवर्तित किया जा सके।
दिल्ली सचिवालय में आयोजित इस बैठक में परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह, परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ टाटा मोटर्स, महिंद्रा, मारुति सुजुकी, टोयोटा, होंडा और एग्रीगेटर कंपनियों जैसे ओला, उबर, रैपिडो के प्रतिनिधि शामिल हुए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदूषण के खिलाफ एक लंबी और प्रभावी लड़ाई लड़ी जानी है। इसके लिए तात्कालिक उपायों के अलावा दीर्घकालिक रणनीति भी अपनानी होगी। सरकार कंपनियों को सहूलियत देने के लिए तैयार है, लेकिन उन्हें भी वाहन खरीदने वालों को राहत देनी होगी, ताकि लोगों का ईवी में रुझान बढ़े।
बैठक में वाहन कंपनियों ने बताया कि प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों का संचालन और जनोपयोगी ईवी नीति लाना आवश्यक है। उन्होंने चार्जिंग स्टेशन खोलने के लिए कुछ राहत की उम्मीद भी जताई। मुख्यमंत्री ने उनसे कहा कि सरकार चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए जमीन देने को तैयार है, लेकिन कंपनियों को सोलर एनर्जी से वाहनों को चार्ज करने के लिए संभावनाएं तलाशनी होंगी।
मुख्यमंत्री ने कंपनियों से कहा कि वे एक योजना तैयार करें कि कब तक वे दिल्ली में ईवी की आपूर्ति को मांग के अनुसार पूरा कर सकेंगी। साथ ही, कंपनियों को अपने वाहनों के दाम इस तरह तय करने होंगे कि लोग उनकी ओर आकर्षित हों।
मुख्यमंत्री ने एग्रीगेटर कंपनियों के प्रतिनिधियों से भी चर्चा की। कंपनियों ने शेयर टैक्सी चलाने पर सहमति जताई और कहा कि एक माह के भीतर महिला ड्राइवर वाली टैक्सियों को भी चलाना शुरू कर दिया जाएगा। इसके लिए नियमों में बदलाव जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा के उपाय कंपनियों को अवश्य करने होंगे।
उन्होंने कहा कि कंपनियों को ई-रिक्शा को भी जोड़ने की संभावना तलाशने को कहा और साथ ही रिंग रोड शटल या हवाई अड्डे से अपने वाहनों को चलाने पर विचार करने के लिए कहा। इसके लिए सरकार उनकी पूरी मदद करेगी।
उन्होंने कहा कि कंपनियां चाहें तो पहले पायलट योजना पर काम कर लें, ताकि उसकी उपयोगिता की जानकारी मिल सके। मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली सरकार हर हाल में दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण को कम करने के प्रयास करेगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार प्रदूषण नियंत्रण को केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और भविष्य की पीढ़ियों से जुड़ा मिशन मानकर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि परिवहन क्षेत्र दिल्ली के प्रदूषण का बड़ा कारण रहा है, इसलिए सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों, साझा परिवहन, ई-रिक्शा और महिला-हितैषी टैक्सी मॉडल को बढ़ावा देने में जुटी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता को सस्ती, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल परिवहन सुविधा देना प्राथमिक लक्ष्य रहेगा। उन्होंने दोहराया कि दिल्ली सरकार हरसंभव नीति, तकनीक और सहभागिता के माध्यम से दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण को स्थायी रूप से कम करने के लिए प्रतिबद्ध है।