क्या दिल्ली विधानसभा परिसर में सुरक्षा में चूक हुई? संदिग्ध ने किया प्रवेश, पुलिस ने हिरासत में लिया
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली विधानसभा परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।
- संदिग्ध ने सरकारी पहचान पत्र दिखाकर प्रवेश किया।
- पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संदिग्ध को हिरासत में लिया।
- प्रदूषण के मुद्दे पर विधानसभा में हंगामा हुआ।
- आम आदमी पार्टी ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।
नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से एक महत्वपूर्ण घटना की खबर आई है। मंगलवार को, एक व्यक्ति ने दिल्ली विधानसभा परिसर में घुसने का प्रयास किया, जिसके परिणामस्वरूप पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।
पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए व्यक्ति की पहचान दिल्ली के बुद्ध विहार निवासी नवीन डबस के रूप में हुई है। नवीन डबस दिल्ली सरकार के तहत गेस्ट फैकल्टी (टीजीटी इंग्लिश) के तौर पर कार्यरत हैं और वे पिछले लगभग 12 वर्षों से शिक्षा विभाग में सेवाएं दे रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, संदिग्ध ने सरकारी पहचान पत्र दिखाकर मुख्य प्रवेश द्वार से प्रवेश किया। पूछताछ में उसने गेस्ट फैकल्टी शिक्षकों से जुड़ी नीतियों में सुधार की मांग की। उसके पास से अब तक कोई संदिग्ध या आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई।
प्रारंभिक जांच में किसी प्रकार की आपराधिक मंशा सामने नहीं आई है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से संयुक्त पूछताछ की जा रही है। संदिग्ध ने पुलिस पूछताछ में कहा कि वह दिल्ली के मंत्री के बुलावे पर आया था, लेकिन बाद में उसने मंत्री से कोई जान पहचान न होने का खुलासा किया।
ज्ञात हो कि दिल्ली की आठवीं विधानसभा का शीतकालीन सत्र 5 जनवरी से प्रारंभ हो चुका है, जो 8 जनवरी तक चलेगा। यदि आवश्यकता पड़ी, तो सदन की सहमति से इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन प्रदूषण के मुद्दे पर भारी हंगामा देखने को मिला। आम आदमी पार्टी (आप) के विधायकों ने सदन में दिल्ली प्रदूषण का मुद्दा उठाया, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष के आदेश पर मार्शलों ने 'आप' के सभी विधायकों को सदन से बाहर कर दिया। इस दौरान चार विधायकों को तीन दिन के लिए निलंबित भी कर दिया गया।
इस पर आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। 'आप' विधायक दल के चीफ व्हिप संजीव झा ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस समय दिल्लीवासियों के लिए सबसे बड़ी समस्या प्रदूषण है। ऐसे में सदन में उपराज्यपाल (एलजी) से इस मुद्दे पर सवाल पूछना अपराध कैसे हो गया? जनता की आवाज उठाने पर सरकार इतनी असहज हो गई कि चार विधायकों को निलंबित कर दिया गया।