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क्या धर्मांतरण देश के लिए एक बड़ा मुद्दा है? महाराष्ट्र सरकार का निर्णय सराहनीय: संजय निरुपम

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क्या धर्मांतरण देश के लिए एक बड़ा मुद्दा है? महाराष्ट्र सरकार का निर्णय सराहनीय: संजय निरुपम

सारांश

धर्मांतरण के मुद्दे पर संजय निरुपम ने कहा कि संविधान में स्पष्ट प्रावधान हैं। महाराष्ट्र सरकार जल्द ही इस दिशा में कदम उठाने जा रही है, जो स्वागत योग्य है। जानें संजय निरुपम के विचार और उत्तराखंड सरकार के फैसले पर उनकी राय।

मुख्य बातें

धर्मांतरण के खिलाफ कानून का स्वागत।
संविधान में स्पष्ट प्रावधान हैं।
उत्तराखंड में गीता का अध्ययन बच्चों के लिए लाभदायक।
फर्जी बाबाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता।
भारत-चीन संबंधों में पाकिस्तान का मुद्दा महत्वपूर्ण।

नई दिल्ली, 16 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र सरकार आगामी सत्र में धर्मांतरण विरोधी कानून लाने पर विचार कर रही है। इस पर शिवसेना नेता संजय निरुपम का बयान आया है। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान में धर्मांतरण के लिए स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं। महाराष्ट्र में भी ऐसा कानून जल्द ही लाया जाएगा, जिसका हम स्वागत करते हैं।

संजय निरुपम ने कहा, "भारत में धर्मांतरण हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है। जब हम गुलामी में थे और मुगलों या अंग्रेजों का शासन था, तब हमारे पास इतनी ताकत नहीं थी कि हम धर्मांतरण के खिलाफ खड़े हो सकें। आज हम एक स्वतंत्र देश में हैं। भारत के संविधान में यह स्पष्ट है कि किसी को जोर-जबरदस्ती या लालच देकर धर्मांतरण नहीं कराया जा सकता। विभिन्न राज्यों में इस दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। महाराष्ट्र भी जल्द ही ऐसा कानून लाने वाला 11वां राज्य बनेगा, जिसका हम स्वागत करते हैं।"

उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों में श्रीमद्भगवद्गीता पढ़ाने के निर्णय की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा, "उत्तराखंड सरकार का यह निर्णय सराहनीय है। गीता में जीवन के ज्ञान के सूत्र हैं, जो मानव के चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बच्चों को गीता का अध्ययन कराने से वे न केवल अच्छे इंसान बनेंगे, बल्कि समाज में उपयोगी नागरिक भी बनेंगे। यह कदम बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए सकारात्मक रहेगा।"

उत्तराखंड में 300 से अधिक फर्जी बाबाओं की गिरफ्तारी पर संजय निरुपम ने कहा, "धर्म के नाम पर कई लोग अपनी दुकान चला रहे हैं। ऐसे फर्जी बाबाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। मैं उत्तराखंड सरकार को बधाई देता हूं, जिन्होंने इस दिशा में कदम उठाया है।"

विदेश मंत्री जयशंकर के आतंकवाद पर दिए बयान पर उन्होंने कहा, "भारत इस समय चीन के साथ द्विपक्षीय वार्ता में शामिल है। हमारे विदेश मंत्री चीन के दौरे पर हैं और भारत-चीन संबंधों में सबसे बड़ा मुद्दा पाकिस्तान है। पाकिस्तान भारत को अस्थिर करने की कोशिश करता है और आतंकवाद को बढ़ावा देता है।"

अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की पृथ्वी पर वापसी को लेकर संजय निरुपम ने कहा, "पूरे देश ने शुभांशु का स्वागत किया है। उन्होंने अंतरिक्ष में महत्वपूर्ण अध्ययन किए हैं। उनके साथ पूरी टीम की सुरक्षित वापसी भारत के लिए गर्व का विषय है। हम सभी उनका हार्दिक स्वागत करते हैं।"

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि धर्मांतरण का मुद्दा देश में एक संवेदनशील विषय है। संविधान में इसके खिलाफ प्रावधान होने के बावजूद, कई राज्यों में इसे लेकर कानून बनाए जा रहे हैं। इस विषय पर संतुलित दृष्टिकोण और संवेदनशीलता की आवश्यकता है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धर्मांतरण विरोधी कानून का क्या महत्व है?
यह कानून धर्मांतरण के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करेगा और इसे बिना सहमति के करने से रोकेगा।
संजय निरुपम का इस विषय पर क्या कहना है?
उन्होंने कहा है कि यह मुद्दा हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है और संविधान में इसके खिलाफ प्रावधान हैं।
उत्तराखंड में गीता पढ़ाने का निर्णय क्यों लिया गया?
इस निर्णय का उद्देश्य बच्चों के चरित्र विकास में गीता के ज्ञान का उपयोग करना है।
राष्ट्र प्रेस
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