ध्रुव राठी के खिलाफ साकेत कोर्ट का जमानती वारंट, 2018 मानहानि केस में 31 अक्टूबर को अगली सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली की साकेत कोर्ट ने लोकप्रिय यूट्यूबर ध्रुव राठी के विरुद्ध 2018 के मानहानि मामले में जमानती वारंट जारी किया है। शिकायतकर्ता विकास सांकृत्यायन उर्फ विकास पांडे द्वारा दायर केस नंबर 5786/2018 में यह कार्रवाई तब हुई जब नोटिस तामील कराने गए प्रोसेस सर्वर को राठी का घर बंद मिला। इस मामले की अगली सुनवाई 31 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद मई 2018 में ध्रुव राठी द्वारा अपलोड किए गए यूट्यूब वीडियो 'भाजपा आईटी सेल पार्ट-2' से उपजा था। उस वीडियो में राठी ने कथित तौर पर आरोप लगाया था कि विकास पांडे भारतीय जनता पार्टी (BJP) की आईटी सेल में वरिष्ठ पद पर हैं और उन्होंने महावीर प्रसाद नामक व्यक्ति को फेक न्यूज़ से जुड़े बयान वापस लेने के बदले ₹50 लाख की पेशकश की थी।
शिकायतकर्ता विकास सांकृत्यायन 'आई सपोर्ट नरेंद्र मोदी' नामक सोशल मीडिया पेज के संस्थापक हैं। उन्होंने इन आरोपों को मानहानिकारक बताते हुए कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था।
समन और नोटिस तामील की लंबी कवायद
साकेत जिला कोर्ट ने ध्रुव राठी को पहली बार जुलाई 2019 में समन भेजा था। हालाँकि, कई वर्षों तक नोटिस तामील नहीं हो सके, क्योंकि राठी मुख्यतः विदेश में रहते हैं। शिकायतकर्ता के वकील ने अर्ली हियरिंग के लिए अर्जी दायर की और बताया कि राठी उस समय भारत में थे और हरियाणा के गुरुग्राम में एक आवास में ठहरे हुए थे।
इसके बाद साकेत कोर्ट के न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 12 अक्टूबर को ध्रुव राठी को फ्रेश और दस्ती समन जारी किए। इन समनों के बावजूद प्रोसेस सर्वर को राठी का घर बंद मिला, जिसके बाद कोर्ट ने जमानती वारंट जारी करने का निर्णय लिया।
राठी की वर्तमान स्थिति
रिपोर्टों के अनुसार, ध्रुव राठी इस समय लंदन में हैं। उन्होंने स्वयं एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के ज़रिये अपने लंदन में होने की जानकारी दी। गौरतलब है कि राठी का यूट्यूब चैनल करोड़ों सब्सक्राइबर्स के साथ भारत के सबसे बड़े राजनीतिक-सामग्री प्लेटफॉर्मों में से एक है, जो इस मामले को व्यापक सार्वजनिक महत्व का बनाता है।
आगे क्या होगा
मामले की अगली सुनवाई 31 अक्टूबर 2026 को होनी है। अब यह देखना होगा कि जमानती वारंट की तामील हो पाती है या नहीं, और क्या ध्रुव राठी अगली तारीख से पहले कोर्ट के समक्ष उपस्थित होते हैं। यह मामला डिजिटल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स और मानहानि कानून के परिप्रेक्ष्य में एक महत्त्वपूर्ण कानूनी नज़ीर बन सकता है।