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नरेश बालियान के मकोका मामले में गैंगस्टर नंदू के खिलाफ दूसरा NBW जारी, 9 जुलाई तक पेशी का आदेश

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नरेश बालियान के मकोका मामले में गैंगस्टर नंदू के खिलाफ दूसरा NBW जारी, 9 जुलाई तक पेशी का आदेश

सारांश

राउज एवेन्यू कोर्ट ने AAP नेता नरेश बालियान से जुड़े मकोका मामले में गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू के खिलाफ दूसरा गैर-जमानती वारंट जारी किया है। आरोपी पर विदेश से संगठित अपराध संचालन का आरोप है; 20 जुलाई से आरोप-निर्धारण सुनवाई शुरू होगी।

मुख्य बातें

राउज एवेन्यू कोर्ट ने 9 जून 2026 को कथित गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू के खिलाफ दूसरा गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया।
दिल्ली पुलिस को आदेश दिया गया है कि आरोपी को 9 जुलाई तक अदालत में पेश किया जाए।
जाँच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर विदेश से संगठित आपराधिक गिरोह चला रहा है।
AAP नेता नरेश बालियान का नाम इस मकोका मामले की जाँच के दायरे में है।
आरोप तय करने की सुनवाई 20 जुलाई 2026 से शुरू होगी।

राउज एवेन्यू कोर्ट ने 9 जून 2026 को आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता नरेश बालियान से जुड़े मकोका (महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम) मामले में कथित गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू के खिलाफ दूसरा गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया। अदालत ने दिल्ली पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिया है कि आरोपी को 9 जुलाई तक न्यायालय के समक्ष अनिवार्य रूप से पेश किया जाए।

मुख्य घटनाक्रम

सुनवाई के दौरान अदालत को अवगत कराया गया कि कपिल सांगवान उर्फ नंदू लगातार न्यायिक प्रक्रिया से अनुपस्थित बना हुआ है और मकोका मामले में चल रहे ट्रायल में भाग नहीं ले रहा। अदालत ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए दूसरा NBW जारी किया। गौरतलब है कि यह पहले जारी किए गए गैर-जमानती वारंट के बाद भी आरोपी के न्यायालय में न आने पर उठाया गया दूसरा सख्त कदम है।

जाँच एजेंसियों का दावा

जाँच एजेंसियों के अनुसार, कपिल सांगवान उर्फ नंदू पर आरोप है कि वह कथित तौर पर विदेश में रहकर एक संगठित आपराधिक गिरोह का संचालन कर रहा है। पुलिस का दावा है कि आरोपी विभिन्न आपराधिक गतिविधियों को विदेश से नियंत्रित करता रहा है और उसके नेटवर्क की जाँच जारी है। इसी आधार पर उसके खिलाफ मकोका के तहत कार्रवाई की गई है।

नरेश बालियान की भूमिका

इस मामले में AAP नेता नरेश बालियान का नाम भी जाँच के दायरे में है। हालाँकि, मामला अभी प्रारंभिक कानूनी चरण में है और अदालत आरोप तय करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आरोप तय करने संबंधी सुनवाई 20 जुलाई से शुरू होगी।

दिल्ली पुलिस पर जिम्मेदारी

अदालत के आदेश के बाद दिल्ली पुलिस की जिम्मेदारी है कि वह कपिल सांगवान उर्फ नंदू को निर्धारित तिथि तक न्यायालय के समक्ष पेश करे। पुलिस अब आरोपी के संभावित ठिकानों और उसकी गतिविधियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जाँच कर रही है। यदि आरोपी 9 जुलाई तक अदालत में उपस्थित नहीं होता, तो उसके खिलाफ और कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

आगे क्या होगा

अब सभी की नज़रें 20 जुलाई से शुरू होने वाली आरोप-निर्धारण सुनवाई पर टिकी हैं। यह सुनवाई मामले की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। मकोका जैसे गंभीर कानून के तहत दर्ज इस मामले में अदालत की सक्रियता संकेत देती है कि न्यायिक प्रक्रिया में और देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो पुलिस की प्रत्यर्पण क्षमता पर सवाल खड़ा करता है। AAP नेता नरेश बालियान का नाम जाँच में होना राजनीतिक दृष्टि से भी संवेदनशील है, लेकिन आरोप-निर्धारण से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुँचना न्यायोचित नहीं होगा। 20 जुलाई की सुनवाई बताएगी कि अदालत इस मामले को किस दिशा में ले जाना चाहती है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नरेश बालियान से जुड़ा मकोका मामला क्या है?
यह महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत दर्ज एक मामला है, जिसमें AAP नेता नरेश बालियान का नाम जाँच के दायरे में है। इस मामले में कथित गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू भी प्रमुख आरोपी है।
कपिल सांगवान उर्फ नंदू के खिलाफ दूसरा NBW क्यों जारी हुआ?
आरोपी लगातार न्यायिक प्रक्रिया से अनुपस्थित रहा और मकोका ट्रायल में शामिल नहीं हुआ। पहले NBW के बावजूद पेश न होने पर राउज एवेन्यू कोर्ट ने 9 जून 2026 को दूसरा गैर-जमानती वारंट जारी किया।
कपिल सांगवान नंदू पर क्या आरोप हैं?
जाँच एजेंसियों के अनुसार, कपिल सांगवान पर कथित तौर पर विदेश में रहकर एक संगठित आपराधिक गिरोह चलाने का आरोप है। पुलिस का दावा है कि वह विभिन्न आपराधिक गतिविधियों को विदेश से नियंत्रित करता रहा है।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
राउज एवेन्यू कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आरोप तय करने संबंधी सुनवाई 20 जुलाई 2026 से शुरू होगी। इससे पहले दिल्ली पुलिस को 9 जुलाई तक आरोपी को अदालत में पेश करना है।
मकोका कानून क्या है और यह सामान्य आपराधिक कानून से कैसे अलग है?
मकोका (महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम) संगठित आपराधिक गिरोहों पर लगाम लगाने के लिए बना कठोर कानून है, जिसमें जमानत मिलना अत्यंत कठिन होता है। यह सामान्य आईपीसी धाराओं की तुलना में अधिक कड़ी सज़ा और सख्त प्रावधान रखता है।
राष्ट्र प्रेस
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