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मकोका मामले में नरेश बाल्यान को झटका: दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की

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मकोका मामले में नरेश बाल्यान को झटका: दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की

सारांश

दिल्ली हाईकोर्ट ने मकोका मामले में AAP के पूर्व विधायक नरेश बाल्यान की जमानत याचिका खारिज कर दी। दिसंबर 2024 में गिरफ्तार बाल्यान पर फरार गैंगस्टर कपिल सांगवान के सिंडिकेट से जुड़े होने का आरोप है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब AAP पहले से ही कई कानूनी मोर्चों पर दबाव में है।

मुख्य बातें

दिल्ली हाईकोर्ट ने 3 अगस्त को AAP के पूर्व विधायक नरेश बाल्यान की मकोका मामले में जमानत याचिका खारिज की।
जस्टिस मनोज जैन ने यह आदेश पारित किया; आरोप कथित गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू के सिंडिकेट से जुड़े होने के हैं।
बाल्यान को दिसंबर 2024 में गिरफ्तार किया गया था; दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
आरोप मुख्यतः बाल्यान और सांगवान के बीच कथित मोबाइल बातचीत की ऑडियो क्लिप पर आधारित हैं।
31 जुलाई को कड़कड़डूमा कोर्ट ने AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में उम्रकैद सुनाई।

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार, 3 अगस्त को आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व विधायक नरेश बाल्यान की जमानत याचिका खारिज कर दी। यह मामला महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत दर्ज है, जिसमें बाल्यान पर कथित गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू के संगठित अपराध सिंडिकेट से जुड़े होने का आरोप है। जस्टिस मनोज जैन की पीठ ने यह आदेश पारित किया।

मामले की पृष्ठभूमि

नरेश बाल्यान को इस मामले में दिसंबर 2024 में गिरफ्तार किया गया था। उन पर लगे आरोप मुख्य रूप से बाल्यान और फरार गैंगस्टर कपिल सांगवान के बीच कथित मोबाइल बातचीत की एक ऑडियो क्लिप पर आधारित हैं। इसके बाद दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने बाल्यान और कई अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।

गौरतलब है कि मकोका एक कड़ा कानून है जो संगठित अपराध से जुड़े मामलों में जमानत मिलना अत्यंत कठिन बना देता है। इस कानून के तहत अभियोजन पक्ष को केवल यह दर्शाना होता है कि आरोपी के संगठित अपराध से जुड़े होने के 'उचित आधार' हैं।

कोर्ट का रुख

जस्टिस मनोज जैन ने जमानत याचिका खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया कि मकोका के तहत दर्ज मामले में जमानत देने के लिए आवश्यक शर्तें पूरी नहीं होती हैं। अदालत ने कथित ऑडियो क्लिप और अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को संज्ञान में लेते हुए यह निर्णय सुनाया।

आप से जुड़े अन्य मामलों का संदर्भ

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब 31 जुलाई को कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

अंकित शर्मा हत्याकांड फरवरी 2020 का है। दंगों के दौरान उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी और उनका शव चांदबाग इलाके में एक नाले से बरामद हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उनके शरीर पर 40 से अधिक घाव पाए गए थे।

ताहिर हुसैन मामले में सजा का विवरण

कड़कड़डूमा कोर्ट ने 13 जुलाई को ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को हत्या व अन्य गंभीर धाराओं में दोषी करार दिया था। इस मामले में कुल 11 आरोपी ट्रायल का सामना कर रहे थे, जिनमें से 6 को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया। सजा सुनाए जाने के दौरान दिल्ली पुलिस ने सभी दोषियों के लिए मृत्युदंड की माँग की थी, किंतु अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

आगे क्या होगा

नरेश बाल्यान के पास हाईकोर्ट के इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने का विकल्प है। मकोका के तहत मामले की सुनवाई जारी रहेगी और चार्जशीट दाखिल होने के बाद ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। AAP के लिए यह फैसला राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी पहले से ही कई कानूनी विवादों में घिरी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो ताहिर हुसैन को उम्रकैद के महज तीन दिन बाद आया। सवाल यह है कि पार्टी इन कानूनी दबावों से राजनीतिक दूरी कैसे बनाती है, जबकि दोनों मामलों में पूर्व पदाधिकारी सीधे शामिल हैं।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नरेश बाल्यान पर मकोका के तहत क्या आरोप हैं?
नरेश बाल्यान पर फरार गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू के संगठित अपराध सिंडिकेट से जुड़े होने का कथित आरोप है। यह आरोप मुख्य रूप से दोनों के बीच कथित मोबाइल बातचीत की एक ऑडियो क्लिप पर आधारित है।
नरेश बाल्यान को कब गिरफ्तार किया गया था?
नरेश बाल्यान को दिसंबर 2024 में इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने उनके और अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत क्यों खारिज की?
जस्टिस मनोज जैन ने पाया कि मकोका के तहत जमानत देने के लिए आवश्यक कानूनी शर्तें इस मामले में पूरी नहीं होती हैं। मकोका एक कड़ा कानून है जिसमें जमानत मिलना अत्यंत कठिन होता है।
ताहिर हुसैन को किस मामले में सजा मिली?
AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी पाया गया। 31 जुलाई को कड़कड़डूमा कोर्ट ने उन्हें और 4 अन्य दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
नरेश बाल्यान के पास अब क्या कानूनी विकल्प हैं?
हाईकोर्ट के इस फैसले को नरेश बाल्यान सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दे सकते हैं। इसके साथ ही मकोका के तहत ट्रायल की प्रक्रिया भी आगे जारी रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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