मकोका मामले में नरेश बाल्यान को झटका: दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार, 3 अगस्त को आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व विधायक नरेश बाल्यान की जमानत याचिका खारिज कर दी। यह मामला महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत दर्ज है, जिसमें बाल्यान पर कथित गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू के संगठित अपराध सिंडिकेट से जुड़े होने का आरोप है। जस्टिस मनोज जैन की पीठ ने यह आदेश पारित किया।
मामले की पृष्ठभूमि
नरेश बाल्यान को इस मामले में दिसंबर 2024 में गिरफ्तार किया गया था। उन पर लगे आरोप मुख्य रूप से बाल्यान और फरार गैंगस्टर कपिल सांगवान के बीच कथित मोबाइल बातचीत की एक ऑडियो क्लिप पर आधारित हैं। इसके बाद दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने बाल्यान और कई अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
गौरतलब है कि मकोका एक कड़ा कानून है जो संगठित अपराध से जुड़े मामलों में जमानत मिलना अत्यंत कठिन बना देता है। इस कानून के तहत अभियोजन पक्ष को केवल यह दर्शाना होता है कि आरोपी के संगठित अपराध से जुड़े होने के 'उचित आधार' हैं।
कोर्ट का रुख
जस्टिस मनोज जैन ने जमानत याचिका खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया कि मकोका के तहत दर्ज मामले में जमानत देने के लिए आवश्यक शर्तें पूरी नहीं होती हैं। अदालत ने कथित ऑडियो क्लिप और अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को संज्ञान में लेते हुए यह निर्णय सुनाया।
आप से जुड़े अन्य मामलों का संदर्भ
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब 31 जुलाई को कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
अंकित शर्मा हत्याकांड फरवरी 2020 का है। दंगों के दौरान उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी और उनका शव चांदबाग इलाके में एक नाले से बरामद हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उनके शरीर पर 40 से अधिक घाव पाए गए थे।
ताहिर हुसैन मामले में सजा का विवरण
कड़कड़डूमा कोर्ट ने 13 जुलाई को ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को हत्या व अन्य गंभीर धाराओं में दोषी करार दिया था। इस मामले में कुल 11 आरोपी ट्रायल का सामना कर रहे थे, जिनमें से 6 को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया। सजा सुनाए जाने के दौरान दिल्ली पुलिस ने सभी दोषियों के लिए मृत्युदंड की माँग की थी, किंतु अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
आगे क्या होगा
नरेश बाल्यान के पास हाईकोर्ट के इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने का विकल्प है। मकोका के तहत मामले की सुनवाई जारी रहेगी और चार्जशीट दाखिल होने के बाद ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। AAP के लिए यह फैसला राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी पहले से ही कई कानूनी विवादों में घिरी है।