दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने कपिल सांगवान गिरोह के 5 सदस्य दबोचे, छावला क्लिनिक पर फायरिंग की साजिश नाकाम
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कुख्यात गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू के गिरोह से जुड़े तीन शार्पशूटरों और दो संदिग्ध हथियार सप्लायरों को गिरफ्तार कर दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के छावला इलाके में एक क्लिनिक पर नियोजित गोलीबारी को टाल दिया। अधिकारियों ने रविवार, 24 मई 2026 को बताया कि आरोपियों के पास से तीन सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल, चार जिंदा कारतूस और तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
जांचकर्ताओं के अनुसार, जेल में बंद गैंगस्टर कपिल सांगवान ने छावला स्थित क्लिनिक पर गोली चलाने का आदेश दिया था, जो कथित तौर पर एक जबरन वसूली की कोशिश का हिस्सा था। तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस को पता चला कि पंजाब स्थित शूटरों को इस हमले के लिए भर्ती किया गया था।
एक महीने से अधिक की निरंतर निगरानी के बाद पुलिस ने 20 मार्च को अमृतसर निवासी अभिषेक को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने पूरी साजिश का खुलासा किया और अपने साथियों के नाम बताए।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं
अभिषेक की निशानदेही पर पुलिस ने अमृतसर के साहिल और हर्षदीप उर्फ पोलू को गिरफ्तार किया — ये दोनों शार्पशूटर बताए जा रहे हैं। इसके अलावा हरियाणा के कैथल जिले के करण उर्फ अंकुश और अमन को भी पकड़ा गया, जिन्होंने कथित तौर पर हमलावरों के लिए हथियार और रसद की व्यवस्था की थी।
जांचकर्ताओं ने बताया कि आरोपी फरवरी में दिल्ली आया था और छावला स्थित क्लिनिक के पास रेकी की थी। हरियाणा स्थित गिरोह के सहयोगियों के माध्यम से हथियार, गोला-बारूद और एक मोटरसाइकिल की व्यवस्था की गई थी।
गिरोह की कार्यप्रणाली
बरामद मोबाइल फोन का इस्तेमाल कथित तौर पर जेल में बंद सांगवान से संपर्क बनाए रखने के लिए किया जाता था। पुलिस के अनुसार, आरोपियों में से कुछ पहले पंजाब और हरियाणा में दर्ज आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं।
गौरतलब है कि यह ऑपरेशन दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय संगठित अपराध और जबरन वसूली गिरोहों के खिलाफ स्पेशल सेल की चल रही कार्रवाई का हिस्सा है। यह ऐसे समय में आया है जब राजधानी में गैंगस्टर-नेटवर्क से जुड़ी फिरौती की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
जांच की स्थिति
अधिकारियों ने कहा कि इन गिरफ्तारियों से नंदू गिरोह के जबरन वसूली रैकेट को बड़ा झटका लगा है। गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने और व्यापक आपराधिक नेटवर्क का पता लगाने के लिए जांच जारी है। आरोपियों से पूछताछ से गिरोह की कार्यप्रणाली और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के कथित तरीकों के बारे में अहम जानकारी मिली है।