10 अगस्त 2026
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पनामा पेपर्स मानहानि केस: राहुल गांधी ने MP हाईकोर्ट में तथ्यात्मक भूल स्वीकारी, लिखित खेद दर्ज

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पनामा पेपर्स मानहानि केस: राहुल गांधी ने MP हाईकोर्ट में तथ्यात्मक भूल स्वीकारी, लिखित खेद दर्ज

सारांश

पनामा पेपर्स से जुड़े 2018 के एक बयान पर राहुल गांधी ने MP हाईकोर्ट में लिखित खेद दर्ज कराया और इसे तथ्यात्मक भूल बताया। प्रतिवादी पक्ष ने कार्यवाही समाप्त करने का संकेत दिया है, लेकिन अदालत का अंतिम आदेश अभी बाकी है।

मुख्य बातें

राहुल गांधी ने MP हाईकोर्ट में 2018 के पनामा पेपर्स संबंधी बयान को तथ्यात्मक भूल बताते हुए लिखित खेद प्रस्तुत किया।
मूल मुकदमा कार्तिकेय चौहान ने भोपाल की MP-MLA कोर्ट में दर्ज कराया था, जिसमें केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की कथित संलिप्तता का भी परोक्ष संदर्भ था।
निचली अदालत के समन आदेश को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया था।
प्रतिवादी पक्ष ने खेद और स्पष्टीकरण को आधार मानते हुए कार्यवाही समाप्त करने पर विचार का संकेत दिया।
न्यायालय का अंतिम आदेश अभी लंबित है।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से जुड़े पनामा पेपर्स मानहानि मामले में 25 जून 2026 को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। गांधी की ओर से अदालत में एक लिखित बयान प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने 2018 में दिए गए अपने बयान को तथ्यात्मक भूल पर आधारित बताते हुए खेद व्यक्त किया। अधिवक्ता संकल्प कोचर ने इस मामले की पृष्ठभूमि और ताज़ा सुनवाई का ब्यौरा साझा किया।

मामले की पृष्ठभूमि

अधिवक्ता संकल्प कोचर के अनुसार, यह विवाद 2018 में एक जनसभा के दौरान राहुल गांधी द्वारा दिए गए बयान से उपजा था। उस बयान में गांधी ने कहा था कि कार्तिकेय चौहान का नाम पनामा पेपर्स में शामिल है और परोक्ष रूप से तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं वर्तमान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की कथित संलिप्तता की ओर भी संकेत किया था। इस बयान को आधार बनाकर कार्तिकेय चौहान ने भोपाल स्थित MP-MLA कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।

निचली अदालत का समन और हाईकोर्ट में चुनौती

निचली अदालत ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राहुल गांधी के विरुद्ध समन जारी किए और उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए। इसी आदेश को चुनौती देते हुए गांधी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था। कोचर के अनुसार, हाईकोर्ट में पक्षकारों की ओर से दायर जवाबों पर विचार करते हुए सुनवाई आगे बढ़ाई जा रही है।

राहुल गांधी का लिखित खेद बयान

मामले की सुनवाई के दौरान राहुल गांधी की ओर से अदालत में प्रस्तुत लिखित बयान में स्पष्ट किया गया कि 2018 का वह बयान तथ्यात्मक भूल पर आधारित था। अधिवक्ता कोचर के अनुसार, गांधी ने यह भी कहा कि बाद में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने अपने बयान को स्पष्ट करने का प्रयास किया था। बुधवार को हुई सुनवाई में भी इस लिखित खेद बयान का उल्लेख किया गया।

प्रतिवादी पक्ष का रुख

अधिवक्ता संकल्प कोचर ने बताया कि प्रतिवादी पक्ष की ओर से अदालत को अवगत कराया गया कि राहुल गांधी द्वारा व्यक्त खेद और दिए गए स्पष्टीकरण को ध्यान में रखते हुए मामले की कार्यवाही समाप्त करने पर विचार किया जा सकता है। हालाँकि, अभी इस पर न्यायालय का अंतिम निर्णय आना शेष है।

आगे क्या होगा

अदालत ने मामले से जुड़े दस्तावेज़ों और दोनों पक्षों के तर्कों पर विचार करते हुए आगे की प्रक्रिया तय की है। फिलहाल न्यायालय के अंतिम आदेश का इंतज़ार है। यह मामला राजनीतिक बयानबाज़ी और मानहानि कानून के बीच की बारीक रेखा को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ले आया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन न्यायिक जवाबदेही के मामले में यह मामला एक नज़ीर बन सकता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर 'खेद' की औपचारिकता पर रुक जाती है — असली सवाल यह है कि क्या यह स्वीकृति भविष्य में राजनीतिक बयानबाज़ी पर अंकुश लगाएगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी के खिलाफ पनामा पेपर्स मानहानि केस क्या है?
यह मामला 2018 में एक जनसभा के दौरान राहुल गांधी द्वारा दिए गए उस बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने कार्तिकेय चौहान का नाम पनामा पेपर्स में होने का दावा किया था और शिवराज सिंह चौहान की कथित संलिप्तता का परोक्ष संकेत दिया था। कार्तिकेय चौहान ने इस पर भोपाल की MP-MLA कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।
राहुल गांधी ने MP हाईकोर्ट में क्या खेद व्यक्त किया?
राहुल गांधी की ओर से अदालत में प्रस्तुत लिखित बयान में 2018 के बयान को तथ्यात्मक भूल पर आधारित बताया गया और खेद व्यक्त किया गया। अधिवक्ता संकल्प कोचर के अनुसार, गांधी ने यह भी कहा कि एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने अपने बयान को स्पष्ट करने का प्रयास किया था।
राहुल गांधी ने MP हाईकोर्ट का रुख क्यों किया?
भोपाल की निचली अदालत ने मानहानि शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राहुल गांधी को समन जारी किए और व्यक्तिगत उपस्थिति के निर्देश दिए। इसी आदेश को चुनौती देने के लिए वे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट गए।
इस मामले में अब आगे क्या होगा?
प्रतिवादी पक्ष ने संकेत दिया है कि राहुल गांधी के खेद और स्पष्टीकरण को देखते हुए कार्यवाही समाप्त करने पर विचार किया जा सकता है। हालाँकि, अदालत का अंतिम आदेश अभी लंबित है और न्यायालय दोनों पक्षों के तर्कों पर विचार कर रहा है।
इस केस में शिवराज सिंह चौहान की क्या भूमिका है?
राहुल गांधी ने 2018 के बयान में परोक्ष रूप से तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की कथित संलिप्तता की ओर संकेत किया था। हालाँकि, मानहानि का मुकदमा कार्तिकेय चौहान ने दायर किया है, न कि शिवराज सिंह चौहान ने।
राष्ट्र प्रेस
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