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क्या दिलीप घोष का कहना है कि बंगाल सरकार एसआईआर को सही तरीके से नहीं होने देना चाहती?

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क्या दिलीप घोष का कहना है कि बंगाल सरकार एसआईआर को सही तरीके से नहीं होने देना चाहती?

सारांश

पश्चिम बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया पर दिलीप घोष के आरोपों का असर जारी है। क्या सच में सरकार नहीं चाहती कि यह प्रक्रिया सही ढंग से हो? जानिए इस विवाद के पीछे की सच्चाई और ताजा घटनाक्रम।

मुख्य बातें

दिलीप घोष ने बंगाल सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
एसआईआर की प्रक्रिया में हो रहे विरोध प्रदर्शनों का असर।
सरकार को कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
बंगाल में लोग न्याय के लिए कोर्ट का सहारा ले रहे हैं।
लोकतंत्र पर हमले का आरोप।

मिदनापुर, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता दिलीप घोष ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के खिलाफ हो रहे लगातार विरोध प्रदर्शनों के बीच राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल सरकार चाहती ही नहीं कि राज्य में एसआईआर सही तरीके से संपन्न हो।

भाजपा नेता दिलीप घोष ने बुधवार को समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर की स्थिति बेहद खराब हो गई है। हर जगह झड़पें, अशांति और गड़बड़ी की घटनाएं बढ़ रही हैं। एसआईआर पूरे देश में हो रहा है, लेकिन ऐसी स्थिति और कहीं नहीं देखी जा रही।

उन्होंने यह भी कहा कि एसआईआर को लागू करने वाले कर्मचारी राज्य सरकार के हैं और कानून व्यवस्था भी उनके हाथ में है। इसलिए, जिम्मेदारी भी राज्य सरकार को लेनी होगी। दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी की सरकार नहीं चाहती कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर सही तरीके से हो। जब तक एसआईआर सफलतापूर्वक नहीं होता, तब तक चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं होनी चाहिए।

भाजपा नेता ने यह भी कहा कि वर्तमान हालात ऐसे हैं कि लोगों को हर चीज के लिए कोर्ट का सहारा लेना पड़ता है। तो फिर सरकार का क्या मतलब है? यहां पर कोई कानून-व्यवस्था नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है कि संविधान का अस्तित्व ही नहीं है। हर घटना सरकार के नियंत्रण से बाहर है और सरकार इन घटनाओं की जांच करने में रुचि नहीं रखती।

पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिलों में फॉर्म 7 जमा करने को लेकर तनाव बना रहा। इस दौरान तृणमूल और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच विवाद और विरोध देखने को मिले। हुगली के मोगरा में भाजपा कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय सुरक्षा बल की मौजूदगी में फॉर्म 7 जमा करने की मांग की। एक दिन पहले मोगरा में बीडीओ ऑफिस के अंदर तनाव फैल गया, जब कथित तौर पर तृणमूल कार्यकर्ताओं ने भाजपा समर्थकों को भगा दिया। तृणमूल कार्यकर्ताओं ने भी विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किए।

इसी बीच, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि टीएमसी सरकार के इशारे पर काम कर रही पश्चिम बंगाल पुलिस ने अमित मंडल जैसे एक बेगुनाह नागरिक और पंचायत के चुने हुए प्रतिनिधि को सिर्फ फॉर्म 7 भरने के लिए कैसे गिरफ्तार किया, जबकि यह चुनावी लिस्ट के एसआईआर प्रक्रिया का एक अनिवार्य और कानूनी हिस्सा है?

उन्होंने कहा कि यह सिर्फ लोकतंत्र पर हमला नहीं है, बल्कि यह भारत के चुनाव आयोग की अथॉरिटी का खुला मजाक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्थिति न केवल पश्चिम बंगाल के लिए बल्कि पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन होना चाहिए। किसी भी सरकार को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए और नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में एसआईआर क्या है?
एसआईआर का मतलब विशेष गहन पुनरीक्षण है, जो मतदाता सूची की सफाई और अद्यतन के लिए किया जाता है।
दिलीप घोष ने बंगाल सरकार पर क्या आरोप लगाया है?
उन्होंने कहा कि बंगाल सरकार नहीं चाहती कि एसआईआर सही तरीके से हो और स्थिति बिगड़ती जा रही है।
क्या बंगाल में कानून व्यवस्था की स्थिति खराब है?
भाजपा नेता के अनुसार, वर्तमान में कानून व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब है और लोगों को न्याय के लिए कोर्ट का सहारा लेना पड़ रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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