29 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पूर्व IAS दिव्या मित्तल का राजनीति में प्रवेश: 13 साल की सेवा छोड़ UP से मांगेंगी 'हिसाब'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पूर्व IAS दिव्या मित्तल का राजनीति में प्रवेश: 13 साल की सेवा छोड़ UP से मांगेंगी 'हिसाब'

सारांश

13 साल की IAS सेवा छोड़कर दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में कदम रखा है — बिना किसी दल के, सीधे जनता से जुड़ने के इरादे के साथ। गायब स्कूलों, दबी फाइलों और सड़क हादसों का 'हिसाब' माँगने का उनका संकल्प, 2027 विधानसभा चुनाव से पहले UP की सियासत में एक नई आवाज का संकेत है।

मुख्य बातें

दिव्या मित्तल ने 29 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया वीडियो के जरिए राजनीति में प्रवेश का ऐलान किया।
उत्तर प्रदेश कैडर में करीब 13 वर्षों की IAS सेवा के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया, जो 15 सितंबर 2026 से प्रभावी हुआ।
उन्होंने किसी स्थापित राजनीतिक दल से न जुड़कर स्वतंत्र राजनीतिक यात्रा शुरू करने की बात कही।
मीरजापुर के लहुरियादह गांव में मंजूर स्कूल के 3 साल बाद भी न बनने का उदाहरण देकर प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठाए।
उनका प्रवेश UP 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच हुआ है।
लोगों से व्हाट्सऐप के जरिए जुड़ने की अपील कर डिजिटल जनसंवाद की रणनीति अपनाई।

उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी दिव्या मित्तल ने 29 सितंबर 2026 को राजनीति में प्रवेश का औपचारिक ऐलान किया — करीब 13 वर्षों की प्रशासनिक सेवा के बाद इस्तीफा देकर वह अब उत्तर प्रदेश से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने की तैयारी में हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी स्थापित दल से नहीं जुड़ेंगी, बल्कि स्वतंत्र रूप से अपनी राह बनाएंगी।

वीडियो संदेश में क्या कहा

सोशल मीडिया पर जारी करीब 10 मिनट के वीडियो संदेश में दिव्या मित्तल ने कहा, 'नमस्कार, मैं दिव्या मित्तल! अभी कुछ दिन पहले मैंने आईएएस से त्यागपत्र दिया और आपके मन में कई सवाल छोड़ दिए। कुछ दिनों तक जवाब नहीं दिया, क्योंकि काम बड़ा था और मैं हौसला जुटा रही थी।' उन्होंने आगे कहा, 'पहला सवाल: आगे क्या? राजनीति! मुझे आवाज बनना है — उन लोगों की आवाज, जिनकी आवाज किसी दफ्तर तक नहीं पहुंच पाती और अगर पहुंच भी जाए तो सुनी नहीं जाती।'

मित्तल ने कहा कि उन्हें 'देश की आजादी के 80 सालों का हिसाब चाहिए' — एक ऐसी भाषा जो प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक जिम्मेदारी दोनों को एक साथ संबोधित करती है।

मीरजापुर का स्कूल और 'इरादे' की बात

अपने प्रशासनिक अनुभव का हवाला देते हुए दिव्या मित्तल ने मीरजापुर के लहुरियादह गांव का उदाहरण साझा किया। उन्होंने बताया कि एक पहाड़ी क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान एक महिला ने पेंशन या मकान की मांग नहीं की, बल्कि पाँचवीं कक्षा के बाद की पढ़ाई के लिए स्कूल माँगा।

मित्तल के अनुसार उन्होंने नियमों के अनुसार स्कूल को मंजूरी दी, लेकिन '3 साल बीत जाने के बाद वह स्कूल बनना शुरू नहीं हुआ।' उन्होंने कहा, 'अगर इरादा होता तो पहाड़ भी रास्ता दे देता, और इरादा नहीं था तो एक फाइल ही पहाड़ बन गई। मुझे उन गायब स्कूलों का हिसाब चाहिए।'

भूमिहीन व्यक्ति और 'ऊपर से मना' की कहानी

राजस्व विभाग में विशेष सचिव रहते हुए उनके पास एक भूमिहीन व्यक्ति आया था, जिसे सरकारी जमीन का पट्टा मिलने के बावजूद कब्जा नहीं दिया जा रहा था। मित्तल ने बताया कि दस्तावेज जाँचने पर संबंधित रिपोर्ट गलत पाई गई और कार्रवाई हुई, लेकिन जमीन पर कब्जा दिलाने के मामले में कथित तौर पर यह जवाब मिला कि 'ऊपर से मना किया गया है।'

उन्होंने सवाल उठाया, 'यह ऊपर कौन है? संविधान तो कहता है कि सबसे ऊपर लोग हैं। जो ऊपर से दिया जाए, वह कृपा — और न्याय तो हक है।' उन्होंने कहा कि उन्हें 'उन पन्नियों में लिपटे अन्याय का हिसाब चाहिए।'

बुनियादी सुविधाओं पर सवाल

दिव्या मित्तल ने हजारों गांवों में सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं की अनुपस्थिति का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि नदी होने के बावजूद पुल न होने से बारिश में गांव 'टापू' बन जाते हैं। सड़कों के गड्ढों और उनसे होने वाली मौतों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'जब फिक्र नहीं होती तो मौत हादसा नहीं, फैसला होती है। मुझे उन मौतों का हिसाब चाहिए।'

इस्तीफा और आगे की राह

दिव्या मित्तल का इस्तीफा केंद्र सरकार ने स्वीकार किया था और यह 15 सितंबर 2026 से प्रभावी हुआ। इस्तीफे के बाद उन्होंने कवि जयशंकर प्रसाद के नाटक 'चंद्रगुप्त' की पंक्ति — 'प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो' — साझा की थी। अपने वीडियो में उन्होंने लोगों से व्हाट्सऐप के जरिए जुड़ने की अपील की, जो उनकी डिजिटल-केंद्रित राजनीतिक रणनीति का संकेत देती है।

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। हालांकि मित्तल ने अभी तक किसी दल से जुड़ने की घोषणा नहीं की है, उनका प्रवेश प्रशासनिक पृष्ठभूमि से आने वाले राजनेताओं की उस परंपरा को आगे बढ़ाता है जो सीधे जन-मुद्दों को केंद्र में रखते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

संगठन और चुनावी ढाँचे के UP जैसे जटिल राज्य में अकेले आवाज उठाना और सत्ता तक पहुँचना दो अलग-अलग बातें हैं। 2027 के चुनाव में उनकी भूमिका — निर्दलीय प्रत्याशी, किसी दल की सहयोगी, या जन-आंदोलन की अगुआ — यह अभी तय नहीं है। मुख्यधारा की कवरेज उनके भावनात्मक भाषण पर केंद्रित है, लेकिन असली सवाल यह है कि प्रशासनिक जानकारी को राजनीतिक पूंजी में बदलने का उनका रोडमैप क्या है।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिव्या मित्तल कौन हैं और उन्होंने IAS क्यों छोड़ा?
दिव्या मित्तल उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व IAS अधिकारी हैं, जिन्होंने करीब 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद इस्तीफा दिया। उनका इस्तीफा 15 सितंबर 2026 से प्रभावी हुआ और उन्होंने कहा कि वह उन लोगों की 'आवाज' बनने के लिए राजनीति में आ रही हैं जिनकी बात सरकारी दफ्तरों तक नहीं पहुँच पाती।
दिव्या मित्तल किस राजनीतिक दल से जुड़ेंगी?
दिव्या मित्तल ने स्पष्ट किया है कि वह किसी स्थापित राजनीतिक दल से नहीं जुड़ेंगी। उन्होंने उत्तर प्रदेश से स्वतंत्र राजनीतिक यात्रा शुरू करने की बात कही है, हालांकि आगे की रणनीति का विस्तृत ब्यौरा अभी सामने नहीं आया है।
दिव्या मित्तल ने मीरजापुर के स्कूल का उदाहरण क्यों दिया?
मीरजापुर के लहुरियादह गांव में एक महिला ने उनसे पाँचवीं के बाद की पढ़ाई के लिए स्कूल माँगा था। मित्तल के अनुसार उन्होंने नियमानुसार स्कूल को मंजूरी दी, लेकिन 3 साल बाद भी वह स्कूल बनना शुरू नहीं हुआ। इसे उन्होंने 'इरादे की कमी' का प्रतीक बताया।
दिव्या मित्तल का राजनीति में प्रवेश UP 2027 चुनाव से कैसे जुड़ा है?
उनका ऐलान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोर पकड़ रही हैं। हालांकि उन्होंने चुनाव लड़ने या किसी दल से गठबंधन का कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है, उनकी सक्रियता को इसी चुनावी संदर्भ में देखा जा रहा है।
दिव्या मित्तल लोगों से कैसे जुड़ने की योजना बना रही हैं?
उन्होंने अपने वीडियो संदेश में लोगों से व्हाट्सऐप के जरिए जुड़ने की अपील की है। यह उनकी डिजिटल-केंद्रित जनसंवाद रणनीति का हिस्सा है, जो पारंपरिक दलीय संगठन से अलग एक सीधे जन-संपर्क का तरीका अपनाने का संकेत देती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 6 महीने पहले