पूर्व IAS दिव्या मित्तल का राजनीति में प्रवेश: 13 साल की सेवा छोड़ UP से मांगेंगी 'हिसाब'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी दिव्या मित्तल ने 29 सितंबर 2026 को राजनीति में प्रवेश का औपचारिक ऐलान किया — करीब 13 वर्षों की प्रशासनिक सेवा के बाद इस्तीफा देकर वह अब उत्तर प्रदेश से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने की तैयारी में हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी स्थापित दल से नहीं जुड़ेंगी, बल्कि स्वतंत्र रूप से अपनी राह बनाएंगी।
वीडियो संदेश में क्या कहा
सोशल मीडिया पर जारी करीब 10 मिनट के वीडियो संदेश में दिव्या मित्तल ने कहा, 'नमस्कार, मैं दिव्या मित्तल! अभी कुछ दिन पहले मैंने आईएएस से त्यागपत्र दिया और आपके मन में कई सवाल छोड़ दिए। कुछ दिनों तक जवाब नहीं दिया, क्योंकि काम बड़ा था और मैं हौसला जुटा रही थी।' उन्होंने आगे कहा, 'पहला सवाल: आगे क्या? राजनीति! मुझे आवाज बनना है — उन लोगों की आवाज, जिनकी आवाज किसी दफ्तर तक नहीं पहुंच पाती और अगर पहुंच भी जाए तो सुनी नहीं जाती।'
मित्तल ने कहा कि उन्हें 'देश की आजादी के 80 सालों का हिसाब चाहिए' — एक ऐसी भाषा जो प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक जिम्मेदारी दोनों को एक साथ संबोधित करती है।
मीरजापुर का स्कूल और 'इरादे' की बात
अपने प्रशासनिक अनुभव का हवाला देते हुए दिव्या मित्तल ने मीरजापुर के लहुरियादह गांव का उदाहरण साझा किया। उन्होंने बताया कि एक पहाड़ी क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान एक महिला ने पेंशन या मकान की मांग नहीं की, बल्कि पाँचवीं कक्षा के बाद की पढ़ाई के लिए स्कूल माँगा।
मित्तल के अनुसार उन्होंने नियमों के अनुसार स्कूल को मंजूरी दी, लेकिन '3 साल बीत जाने के बाद वह स्कूल बनना शुरू नहीं हुआ।' उन्होंने कहा, 'अगर इरादा होता तो पहाड़ भी रास्ता दे देता, और इरादा नहीं था तो एक फाइल ही पहाड़ बन गई। मुझे उन गायब स्कूलों का हिसाब चाहिए।'
भूमिहीन व्यक्ति और 'ऊपर से मना' की कहानी
राजस्व विभाग में विशेष सचिव रहते हुए उनके पास एक भूमिहीन व्यक्ति आया था, जिसे सरकारी जमीन का पट्टा मिलने के बावजूद कब्जा नहीं दिया जा रहा था। मित्तल ने बताया कि दस्तावेज जाँचने पर संबंधित रिपोर्ट गलत पाई गई और कार्रवाई हुई, लेकिन जमीन पर कब्जा दिलाने के मामले में कथित तौर पर यह जवाब मिला कि 'ऊपर से मना किया गया है।'
उन्होंने सवाल उठाया, 'यह ऊपर कौन है? संविधान तो कहता है कि सबसे ऊपर लोग हैं। जो ऊपर से दिया जाए, वह कृपा — और न्याय तो हक है।' उन्होंने कहा कि उन्हें 'उन पन्नियों में लिपटे अन्याय का हिसाब चाहिए।'
बुनियादी सुविधाओं पर सवाल
दिव्या मित्तल ने हजारों गांवों में सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं की अनुपस्थिति का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि नदी होने के बावजूद पुल न होने से बारिश में गांव 'टापू' बन जाते हैं। सड़कों के गड्ढों और उनसे होने वाली मौतों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'जब फिक्र नहीं होती तो मौत हादसा नहीं, फैसला होती है। मुझे उन मौतों का हिसाब चाहिए।'
इस्तीफा और आगे की राह
दिव्या मित्तल का इस्तीफा केंद्र सरकार ने स्वीकार किया था और यह 15 सितंबर 2026 से प्रभावी हुआ। इस्तीफे के बाद उन्होंने कवि जयशंकर प्रसाद के नाटक 'चंद्रगुप्त' की पंक्ति — 'प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो' — साझा की थी। अपने वीडियो में उन्होंने लोगों से व्हाट्सऐप के जरिए जुड़ने की अपील की, जो उनकी डिजिटल-केंद्रित राजनीतिक रणनीति का संकेत देती है।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। हालांकि मित्तल ने अभी तक किसी दल से जुड़ने की घोषणा नहीं की है, उनका प्रवेश प्रशासनिक पृष्ठभूमि से आने वाले राजनेताओं की उस परंपरा को आगे बढ़ाता है जो सीधे जन-मुद्दों को केंद्र में रखते हैं।