29 जून 2026
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डीआरडीओ को मिली बड़ी वित्तीय स्वायत्तता: राजनाथ सिंह ने जारी किया 'डीएफपी-2026'

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डीआरडीओ को मिली बड़ी वित्तीय स्वायत्तता: राजनाथ सिंह ने जारी किया 'डीएफपी-2026'

सारांश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ के लिए 'डीएफपी-2026' जारी कर संगठन को बड़ी वित्तीय स्वायत्तता दी है। यह कदम रक्षा परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया को तेज़ करेगा और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों की सशस्त्र बलों में तैनाती को गति देगा।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 29 जून 2026 को डीएफपी-2026 (वित्तीय शक्तियों का प्रत्यायोजन-2026) जारी किया।
डीआरडीओ की विभिन्न इकाइयों को अधिक कार्यात्मक और वित्तीय अधिकार प्रदान किए गए हैं।
परीक्षण अभियानों, बाह्य अनुसंधान परियोजनाओं और प्रौद्योगिकी विकास कोष अनुदानों के लिए अलग वित्तीय प्रावधान किए गए हैं।
कार्यक्रम में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रामणी और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह उपस्थित रहे।
विशेषज्ञों के अनुसार यह व्यवस्था स्वदेशी रक्षा प्रणालियों की सशस्त्र बलों में तैनाती को तेज़ करेगी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को बल देगी।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 29 जून 2026 को नई दिल्ली में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के लिए 'वित्तीय शक्तियों का प्रत्यायोजन-2026' यानी डीएफपी-2026 जारी किया, जो संगठन की विभिन्न इकाइयों को अधिक कार्यात्मक और वित्तीय अधिकार प्रदान करता है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य सामरिक रक्षा परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा करना, जवाबदेही सुनिश्चित करना और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के विकास में तेज़ी लाना है।

डीएफपी-2026 में क्या है नया

नई व्यवस्था के तहत डीआरडीओ की विभिन्न इकाइयों को अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं की स्वीकृति और क्रियान्वयन में पहले से कहीं अधिक स्वायत्तता दी गई है। परीक्षण अभियानों और परीक्षण-मूल्यांकन गतिविधियों के लिए अलग वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। इसके साथ ही, किसी परियोजना के औपचारिक आरंभ से पूर्व अनुसंधान संबंधी प्रारंभिक गतिविधियों को स्वीकृति देने की व्यवस्था भी शामिल की गई है।

बाह्य अनुसंधान परियोजनाओं, रक्षा नवाचार उत्कृष्टता केंद्रों और प्रौद्योगिकी विकास कोष से जुड़े अनुदानों के लिए वित्तीय शक्तियों का स्पष्ट विभाजन किया गया है। इससे परियोजनाओं की स्वीकृति और क्रियान्वयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुगम होगी।

सशस्त्र बलों में तैनाती होगी तेज़

राजनाथ सिंह ने कहा कि डीएफपी-2026 के लागू होने से अनुसंधान एवं विकास तंत्र से उभरने वाली प्रणालियों, प्लेटफॉर्मों और तकनीकों का उत्पादन तथा सशस्त्र बलों में उनका समावेश पहले की तुलना में अधिक तेज़ी से होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह व्यवस्था उद्योगों, शैक्षणिक संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के साथ सहयोग को और मज़बूत करेगी, जिससे आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को नई गति मिलेगी।

कार्यक्रम में कौन-कौन रहे उपस्थित

नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रामणी और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह सहित रक्षा मंत्रालय, डीआरडीओ और वित्त प्रबंधन से जुड़े अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम डीआरडीओ की प्रशासनिक संरचना में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक माना जा रहा है।

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि डीएफपी-2026 रक्षा अनुसंधान परियोजनाओं में निर्णय लेने की प्रक्रिया को उल्लेखनीय रूप से तेज़ करेगा। यह नवाचार को प्रोत्साहित करेगा और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के विकास तथा सैन्य बलों में उनकी शीघ्र तैनाती का मार्ग प्रशस्त करेगा। गौरतलब है कि यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी रक्षा आयात-निर्भरता घटाने और घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार प्रयासरत है।

आगे क्या होगा

नई वित्तीय व्यवस्था के क्रियान्वयन से डीआरडीओ की इकाइयों को अब बड़े फैसलों के लिए लंबी प्रशासनिक प्रक्रियाओं से नहीं गुज़रना पड़ेगा। रक्षा प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस ढाँचे को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह भारत के रक्षा अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को वैश्विक मानकों के करीब ले जाने में सहायक सिद्ध हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली परीक्षा क्रियान्वयन में होगी। डीआरडीओ लंबे समय से परियोजनाओं में देरी और बजट-उपयोग की अक्षमता के लिए आलोचना झेलता रहा है — वित्तीय शक्तियों का विकेंद्रीकरण इन समस्याओं का एक ज़रूरी, पर पर्याप्त नहीं, जवाब है। असली सवाल यह है कि क्या इस स्वायत्तता के साथ जवाबदेही का कोई स्पष्ट और सत्यापन-योग्य ढाँचा भी जोड़ा गया है, या यह केवल प्रक्रियागत शिथिलता है। यदि प्रौद्योगिकी से सशस्त्र बलों तक की 'लास्ट माइल' तैनाती में वास्तविक तेज़ी आती है, तभी यह नीति रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में सार्थक कदम साबित होगी।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीएफपी-2026 क्या है और यह डीआरडीओ के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
डीएफपी-2026 यानी 'वित्तीय शक्तियों का प्रत्यायोजन-2026' एक नई व्यवस्था है जो डीआरडीओ की विभिन्न इकाइयों को अधिक वित्तीय और कार्यात्मक अधिकार प्रदान करती है। इससे रक्षा अनुसंधान परियोजनाओं की स्वीकृति और क्रियान्वयन प्रक्रिया तेज़ और अधिक पारदर्शी होगी।
डीएफपी-2026 से रक्षा परियोजनाओं पर क्या असर पड़ेगा?
नई व्यवस्था के तहत परियोजना शुरू होने से पहले अनुसंधान संबंधी प्रारंभिक गतिविधियों को स्वीकृति देना आसान होगा और परीक्षण-मूल्यांकन के लिए अलग वित्तीय प्रावधान होंगे। इससे स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का उत्पादन और सशस्त्र बलों में तैनाती तेज़ होने की उम्मीद है।
डीएफपी-2026 किसने और कब जारी किया?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 29 जून 2026 को नई दिल्ली में एक विशेष कार्यक्रम में डीएफपी-2026 जारी किया। इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रामणी और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
डीएफपी-2026 का आत्मनिर्भर भारत से क्या संबंध है?
यह व्यवस्था उद्योगों, शैक्षणिक संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के साथ डीआरडीओ के सहयोग को मज़बूत करेगी, जिससे स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों के विकास में तेज़ी आएगी। रक्षा मंत्री के अनुसार, यह आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को नई गति देगा।
डीएफपी-2026 में बाह्य अनुसंधान और नवाचार के लिए क्या प्रावधान हैं?
डीएफपी-2026 में बाह्य अनुसंधान परियोजनाओं, रक्षा नवाचार उत्कृष्टता केंद्रों और प्रौद्योगिकी विकास कोष से संबंधित अनुदानों के लिए वित्तीय शक्तियों का स्पष्ट विभाजन किया गया है। इससे नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा और अनुदान प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित होगी।
राष्ट्र प्रेस
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