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द्वारका में ₹92.70 करोड़ का श्रीकृष्ण संग्रहालय: 9 थीम गैलरी, डिजिटल तकनीक और रोजगार के नए अवसर

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द्वारका में ₹92.70 करोड़ का श्रीकृष्ण संग्रहालय: 9 थीम गैलरी, डिजिटल तकनीक और रोजगार के नए अवसर

सारांश

गुजरात के द्वारका में ₹92.70 करोड़ की लागत से बनने वाला श्रीकृष्ण संग्रहालय महज एक धार्मिक स्थल नहीं — यह आधुनिक तकनीक और प्राचीन विरासत के मेल का एक बड़ा प्रयोग है, जो सांस्कृतिक पर्यटन को आर्थिक विकास से जोड़ने की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।

मुख्य बातें

गुजरात के द्वारका में ₹92.70 करोड़ की लागत से श्रीकृष्ण संग्रहालय बनाया जा रहा है।
संग्रहालय में नौ थीम आधारित गैलरी , 3डी प्रोजेक्शन मैपिंग , इमर्सिव ऑडियो-विजुअल और मोशन सेंसर तकनीक होगी।
यह परियोजना मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में विकसित हो रही है।
संग्रहालय द्वारकाधीश मंदिर से लगभग 1.6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगा।
परियोजना से परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय व्यापार और आतिथ्य क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
यह पहल PM मोदी के 'विकास भी, विरासत भी' दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक कदम है।

गुजरात के द्वारका में ₹92.70 करोड़ की लागत से श्रीकृष्ण संग्रहालय का निर्माण किया जा रहा है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकास भी, विरासत भी' के दृष्टिकोण के अनुरूप भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और आधुनिक तकनीक को एकीकृत करने वाला केंद्र बनेगा। द्वारकाधीश मंदिर से लगभग 1.6 किलोमीटर की दूरी पर विकसित हो रहा यह संग्रहालय गुजरात के सांस्कृतिक पर्यटन को नई दिशा देने के लिए तैयार किया जा रहा है।

परियोजना की रूपरेखा और नेतृत्व

यह महत्वाकांक्षी सांस्कृतिक परियोजना मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में आगे बढ़ रही है। कुल ₹92.70 करोड़ की लागत से तैयार होने वाला यह संग्रहालय भगवान श्रीकृष्ण के जीवन चरित्र, दिव्य लीलाओं, जीवन मूल्यों और श्रीमद्भगवद्गीता के शाश्वत संदेश को एक ही छत के नीचे प्रस्तुत करेगा। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें धार्मिक पर्यटन को आर्थिक विकास के इंजन के रूप में विकसित कर रही हैं।

नौ थीम गैलरी: मुख्य आकर्षण

संग्रहालय की सबसे प्रमुख विशेषता इसकी नौ थीम आधारित गैलरी होंगी, जिनमें भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से लेकर महाभारत तक के प्रसंग जीवंत रूप में प्रस्तुत किए जाएंगे। गोकुल और वृंदावन के प्रसंग, गोवर्धन पर्वत धारण करने की लीला, कालिया नाग का मर्दन और रासलीला विशेष रूप से दर्शाए जाएंगे।

इसके अतिरिक्त मथुरा गमन, कंस वध, स्वर्णनगरी द्वारका की स्थापना और महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका को मूर्तियों, चित्रों, कलाकृतियों, हस्तशिल्प और प्रतिकृतियों के माध्यम से प्रस्तुत करने की योजना है।

अत्याधुनिक डिजिटल तकनीक का उपयोग

संग्रहालय में इमर्सिव ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियाँ, 3डी प्रोजेक्शन मैपिंग, टचस्क्रीन सूचना कियोस्क और मोशन सेंसर आधारित अनुभव विकसित किए जाएंगे। थीम आधारित लाइटिंग, साउंडस्केप, डिजिटल स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया प्रोजेक्शन के जरिये श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक संपूर्ण अनुभव मिलेगा।

गौरतलब है कि यह पहल केवल धार्मिक दर्शन तक सीमित नहीं है — इसका लक्ष्य नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक ज्ञान से रोचक तरीके से जोड़ना है।

आम जनता और क्षेत्र पर असर

संग्रहालय परिसर में कमल तालाब, लाइट एंड साउंड प्रोजेक्शन शो, एम्फीथिएटर और विशेष लैंडस्केप क्षेत्र भी विकसित किए जाएंगे। आगंतुकों की सुविधा के लिए दिव्यांगजनों के लिए प्रवेश सुविधाएँ, कैफे, स्मृति चिह्नों की दुकान और व्यवस्थित पार्किंग की व्यवस्था भी होगी।

परियोजना से परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय व्यापार और आतिथ्य क्षेत्र में रोजगार एवं व्यवसाय के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। द्वारका पहले से ही देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है और यहाँ देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

क्या होगा आगे

इस संग्रहालय के पूरा होने के बाद द्वारका को धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ सांस्कृतिक और शैक्षणिक पर्यटन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की उम्मीद है। परंपरागत विरासत को संरक्षित करते हुए आधुनिक तकनीक के माध्यम से उसे नई पीढ़ी तक पहुँचाने की यह कोशिश गुजरात के सांस्कृतिक पर्यटन मानचित्र को नए सिरे से परिभाषित कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी होगी कि रोजगार के दावे किस हद तक सत्यापन योग्य आँकड़ों में तब्दील होते हैं। गौरतलब यह भी है कि इस तरह की परियोजनाओं का दीर्घकालिक सांस्कृतिक असर तभी सुनिश्चित होता है जब स्थानीय समुदाय, कारीगर और शिक्षाविद् सक्रिय रूप से जुड़े हों — न कि केवल निर्माण और तकनीक आपूर्ति तक सीमित रहें।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

द्वारका में बनने वाला श्रीकृष्ण संग्रहालय क्या है?
यह गुजरात के द्वारका में ₹92.70 करोड़ की लागत से निर्मित हो रहा एक सांस्कृतिक संग्रहालय है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, लीलाओं और श्रीमद्भगवद्गीता के संदेश को नौ थीम आधारित गैलरियों और आधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। यह द्वारकाधीश मंदिर से लगभग 1.6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगा।
श्रीकृष्ण संग्रहालय में कौन-कौन सी तकनीकी सुविधाएँ होंगी?
संग्रहालय में इमर्सिव ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियाँ, 3डी प्रोजेक्शन मैपिंग, इंटरएक्टिव डिजिटल डिस्प्ले, टचस्क्रीन सूचना कियोस्क और मोशन सेंसर आधारित अनुभव शामिल होंगे। इसके अलावा लाइट एंड साउंड प्रोजेक्शन शो और एम्फीथिएटर जैसी सुविधाएँ भी विकसित की जाएंगी।
इस परियोजना से द्वारका में रोजगार कैसे बढ़ेगा?
संग्रहालय के विकसित होने से पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि की उम्मीद है, जिससे परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय व्यापार और आतिथ्य क्षेत्र में नए रोजगार एवं व्यवसाय के अवसर पैदा होने की संभावना है। कैफे, स्मृति चिह्नों की दुकान और विजिटर सेवाएँ भी स्थानीय रोजगार का स्रोत बन सकती हैं।
इस परियोजना का नेतृत्व कौन कर रहा है?
यह परियोजना गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में विकसित की जा रही है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकास भी, विरासत भी' के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
श्रीकृष्ण संग्रहालय में किन प्रसंगों को दर्शाया जाएगा?
संग्रहालय में श्रीकृष्ण की बाल लीलाएँ, गोकुल-वृंदावन के प्रसंग, गोवर्धन पर्वत धारण, कालिया नाग मर्दन, रासलीला, मथुरा गमन, कंस वध, स्वर्णनगरी द्वारका की स्थापना और महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका को मूर्तियों, चित्रों, कलाकृतियों और डिजिटल माध्यमों से जीवंत किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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