पावागढ़ पुनर्विकास: ₹359 करोड़ के मेगा प्लान के दो चरण पूरे, महाकाली मंदिर परिसर 5 गुना बड़ा
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल चंपानेर-पावागढ़ के कायाकल्प के लिए बनाए गए ₹359 करोड़ के चार-चरणीय मास्टर प्लान के पहले दो चरण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। इन दो चरणों में ₹121 करोड़ की लागत से महाकाली मंदिर परिसर का विस्तार और तीर्थयात्रियों के लिए आधारभूत सुविधाओं का आमूल सुधार किया गया है। शेष दो चरणों में ₹238 करोड़ का अतिरिक्त निवेश प्रस्तावित है।
मुख्य घटनाक्रम
गुजरात पवित्र यात्राधाम विकास बोर्ड के माध्यम से क्रियान्वित इस परियोजना में महाकाली मंदिर परिसर को तीन स्तरों पर 545 वर्ग मीटर से बढ़ाकर लगभग 2,980 वर्ग मीटर कर दिया गया है — यानी परिसर का क्षेत्रफल पाँच गुने से अधिक हो गया है। इसके अलावा माची चौक को मंदिर से जोड़ने वाली 2,374 सीढ़ियों सहित 3.01 किलोमीटर लंबा तीर्थ-पथ तैयार किया गया है।
मंदिर परिसर में बिजली की व्यवस्था, पब्लिक एड्रेस सिस्टम और सीसीटीवी निगरानी नेटवर्क भी स्थापित किए गए हैं, जिससे लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित हो सके।
सरकार का विज़न
अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के मार्गदर्शन में संचालित हो रही है। राज्य सरकार ने कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकास भी, विरासत भी' के विज़न से प्रेरित है, जिसमें धरोहर संरक्षण और आधुनिक पर्यटन अवसंरचना को एक साथ साधने का प्रयास किया जा रहा है।
आगामी चरणों में क्या होगा
चरण 3ए के अंतर्गत माची चौक पर ₹13.68 करोड़ की लागत से मल्टी-लेवल पार्किंग सुविधा पहले ही पूरी की जा चुकी है। ₹135.19 करोड़ के बजट वाले चरण 3बी में चंपानेर में आंतरिक-बाह्य सड़कें, पैदल पथ, बिजली व्यवस्था, लैंडस्केपिंग, 600 से अधिक दो-पहिया व चार-पहिया वाहनों के लिए पार्किंग और बस अवसंरचना का निर्माण शामिल है।
इसके अतिरिक्त 'वाडा तालाब' क्षेत्र के पुनर्विकास की योजना है, जिसमें सुंदर बगीचे, घाट, वॉटर जेटी, फुटब्रिज, थीम पार्क, बच्चों के खेलने की जगह, एक्टिविटी जोन, बर्डवॉच टावर, क्राफ्ट स्टॉल और लगभग 500 कारों के लिए पार्किंग की व्यवस्था प्रस्तावित है।
आम जनता और तीर्थयात्रियों पर असर
चंपानेर-पावागढ़ गुजरात के सबसे प्रमुख तीर्थ एवं पुरातात्विक स्थलों में से एक है। महाकाली मंदिर में नवरात्रि जैसे पर्वों पर लाखों श्रद्धालु आते हैं। विस्तारित परिसर और बेहतर पहुँच मार्ग से भीड़ प्रबंधन में सुधार और तीर्थयात्रियों के अनुभव में उल्लेखनीय बदलाव आने की उम्मीद है।
यह ऐसे समय में आया है जब गुजरात सरकार सोमनाथ, द्वारका और अंबाजी सहित अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी बड़े पैमाने पर पुनर्विकास कार्य कर रही है, जो राज्य की धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
आगे की राह
शेष चरणों के पूरा होने के बाद चंपानेर-पावागढ़ क्षेत्र में पर्यटन और तीर्थाटन की क्षमता में बड़ा इज़ाफा होने की संभावना है। राज्य सरकार के अनुसार यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के दर्जे को बनाए रखते हुए आधुनिक सुविधाएँ जोड़ना इस पूरी परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती और प्राथमिकता दोनों है।