क्या पश्चिम बंगाल में रेत तस्करी मामले में ईडी ने आरोपपत्र दाखिल किया?
सारांश
Key Takeaways
- ईडी ने 14 कंपनियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया।
- मामले में 145 करोड़ रुपए का भ्रष्टाचार शामिल है।
- अरुण शरफ को 6 नवंबर को गिरफ्तार किया गया।
- रेत तस्करी में जाली कागजात का उपयोग हुआ।
- जांच का उद्देश्य भ्रष्टाचार पर रोक लगाना है।
कोलकाता, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रेत तस्करी मामले में आरोपपत्र पेश किया है। केंद्रीय एजेंसी के सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
ईडी अधिकारियों ने बताया कि अरुण शरफ और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के 60 दिनों के भीतर ही ईडी ने आरोपपत्र दाखिल किया है।
बैंकशाल कोर्ट परिसर में स्थित ईडी की विशेष अदालत में शनिवार को कुल 14 कंपनियों के खिलाफ आरोपपत्र पेश किया गया।
ईडी ने दावा किया है कि 145 करोड़ रुपए का भ्रष्टाचार हुआ है।
ईडी अधिकारियों ने आगे कहा कि जांच एजेंसी का यह भी दावा है कि जीडी माइनिंग सहित 14 कंपनियों के माध्यम से कथित तौर पर इस धन का मनी लॉन्ड्रिंग किया गया था।
जीडी माइनिंग के मालिक अरुण शरफ को ईडी ने पिछले साल 6 नवंबर को गिरफ्तार किया था।
ईडी ने आरोप लगाया है कि अरुण शरफ ने हर संभव प्रकार की धोखाधड़ी की है।
आरोप है कि अरुण शरफ ने पश्चिम बंगाल रेत (खनन, परिवहन, भंडारण और बिक्री) या डब्ल्यूबीएमडीटीसीएल के सभी नियमों और विनियमों की पूरी तरह से अवहेलना की और अवैध रेत खनन और बिक्री से भारी मुनाफा कमाया।
केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों ने दावा किया कि रेत परिवहन के लिए अधिकृत ट्रक का लाइसेंस प्लेट नंबर देना अनिवार्य था।
हालांकि, आरोप है कि इस रेत तस्करी अभियान में शामिल कई ट्रकों के लिए एक ही नंबर का इस्तेमाल किया गया था।
कई मामलों में राज्य अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
ऊपरी तौर पर देखने पर ऐसा लगता था कि रेत अधिकृत ट्रक द्वारा ही ले जाई जा रही थी, लेकिन वास्तव में इस रेत भ्रष्टाचार को अंजाम देने के लिए एक ही लाइसेंस प्लेट नंबर वाले कई ट्रकों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
रेत परिवहन परमिट में एक क्यूआर कोड शामिल था। आरोप है कि यह क्यूआर कोड भी जाली था।
ईडी की जांच में पता चला कि नदी/भंडारण स्थलों से चुराई गई रेत के अवैध परिवहन के लिए जाली/अमान्य चालानों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
आरोपी व्यक्ति/संस्थाएं आवंटित या नीलाम की गई खानों/भंडार स्थलों से प्राप्त रेत को अवैध रूप से स्थानांतरित करते थे।
जांच में यह भी पता चला कि उपरोक्त गतिविधियों से अर्जित अवैध नकदी को नियमित खातों में अस्पष्ट जमा के माध्यम से मिला दिया गया था।
इन धोखाधड़ी के तरीकों को अपनाकर, आरोपी व्यक्ति/संस्थाओं ने बड़े पैमाने पर रेत की चोरी, अवैध परिवहन और बिक्री की, जिससे कई लोगों को अनुचित लाभ हुआ।
इस मामले की जांच के बाद अंततः ईडी ने आरोप पत्र दाखिल किया।