फर्जी आईटीसी घोटाले के खिलाफ ईडी की बड़ी कार्रवाई क्यों? कई राज्यों में एकसाथ छापेमारी

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फर्जी आईटीसी घोटाले के खिलाफ ईडी की बड़ी कार्रवाई क्यों? कई राज्यों में एकसाथ छापेमारी

सारांश

प्रवर्तन निदेशालय ने फर्जी आईटीसी घोटाले के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की है। झारखंड, मणिपुर और कोलकाता में एकसाथ छापेमारी कर 658 करोड़ रुपए के घोटाले से जुड़े व्यक्तियों और फर्मों की जांच की जा रही है। जानिए इस ऑपरेशन की विस्तृत जानकारी।

Key Takeaways

  • ईडी ने फर्जी आईटीसी घोटाले के खिलाफ छापेमारी की।
  • लगभग 658 करोड़ रुपए का घोटाला उजागर हुआ।
  • जांच में 58 शेल कंपनियों का नेटवर्क शामिल है।
  • ईडी की कार्रवाई से सरकारी खजाने की सुरक्षा में मदद मिलेगी।
  • छापेमारी में महत्वपूर्ण सबूत जुटाए गए हैं।

नई दिल्ली, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) घोटाले के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण कार्रवाई में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने झारखंड, मणिपुर, कोलकाता समेत विभिन्न राज्यों में एकसाथ छापेमारी की। लगभग 658 करोड़ रुपए के इस बड़े घोटाले से जुड़े व्यक्तियों और फर्मों के ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। इस संपूर्ण ऑपरेशन का नेतृत्व ईडी की ईटानगर इकाई कर रही है, जिसे संबंधित राज्यों की पुलिस का सहयोग प्राप्त हो रहा है।

जांच एजेंसी के अनुसार, यह मामला उन फर्मों से जुड़ा है जिन पर बिना किसी वास्तविक वस्तु या सेवा की आपूर्ति के फर्जी इनवॉइस के माध्यम से आईटीसी उत्पन्न करने और इसका लाभ उठाने का आरोप है। ऐसे फर्जी दावे न केवल सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि अक्सर मनी लॉन्ड्रिंग, शेल कंपनियों के नेटवर्क और संगठित आर्थिक अपराध से भी जुड़े होते हैं। ईडी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस मामले की शुरुआत अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर पुलिस थाने में दर्ज एक एफआईआर से हुई थी।

शिकायत में राकेश शर्मा और आशुतोष कुमार झा सहित अन्य अज्ञात व्यक्तियों पर धोखाधड़ी और दस्तावेजों की जालसाजी से जुड़े एक आपराधिक षड्यंत्र में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। शिकायत के अनुसार, एम/एस सिद्धि विनायक ट्रेड मर्चेंट्स नामक फर्म, जो कि जांच में अस्तित्वहीन (नॉन-एग्जिस्टेंट) पाई गई, ने लगभग 658.55 करोड़ रुपए मूल्य के फर्जी इनवॉइस के आधार पर 99.31 करोड़ रुपए का इनपुट टैक्स क्रेडिट अवैध रूप से प्राप्त किया। यह संपूर्ण फर्जीवाड़ा देश के विभिन्न राज्यों में फैली 58 शेल कंपनियों के माध्यम से अंजाम दिया गया।

ईडी अब इस घोटाले में फर्जी आईटीसी की आगे की लेयरिंग, शेल कंपनियों के नेटवर्क और इस प्रक्रिया के जरिए लॉन्डर किए गए धन की गहनता से जांच कर रही है। छापेमारी के दौरान दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य महत्वपूर्ण सबूतों की जांच की जा रही है, जिससे इस नेटवर्क के अन्य लाभार्थियों और सहयोगियों का भी खुलासा हो सके। इस मामले में ईडी की जांच जारी है।

Point of View

बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक अपराधों के खिलाफ एक सख्त संदेश भी भेजता है। हमें उम्मीद है कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होगी।
NationPress
20/01/2026

Frequently Asked Questions

फर्जी आईटीसी घोटाला क्या है?
फर्जी आईटीसी घोटाला उन फर्मों द्वारा किया जाता है जो बिना वास्तविक वस्तु या सेवा की आपूर्ति के फर्जी इनवॉइस के माध्यम से इनपुट टैक्स क्रेडिट उत्पन्न करती हैं।
ईडी की कार्रवाई के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
ईडी की कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य फर्जी आईटीसी के दावों का पर्दाफाश करना और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वाले अपराधियों को पकड़ना है।
इस घोटाले में कितने पैसे का लेन-देन हुआ है?
इस घोटाले में लगभग 658 करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ है।
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