देहरादून के झाझरा स्थित श्री बालाजी धाम: भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र
सारांश
Key Takeaways
- श्री बालाजी धाम में भक्त नकारात्मकता से मुक्ति के लिए आते हैं।
- यहां मंगलवार और शनिवार को विशेष पूजा होती है।
- भक्तगण यहां अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए अर्जी लगाते हैं।
- मंदिर की स्थापना 1957 में हुई थी।
- यहां विशेष प्रसाद अर्पित करने की परंपरा है।
देहरादून, १० मार्च (राष्ट्र प्रेस)। देवभूमि उत्तराखंड अपने प्राचीन मंदिरों और उनके अद्भुत चमत्कारों के लिए जाना जाता है। इनमें से एक है देहरादून जिले के झाझरा में स्थित श्री बालाजी धाम। यह मंदिर राजस्थान के प्रसिद्ध बालाजी धाम की शैली में निर्मित है।
श्री बालाजी धाम मंदिर को जीवन में चल रही नकारात्मकता को समाप्त करने के लिए जाना जाता है। यहां भक्तगण नकारात्मक शक्तियों, संकटों या बुरी ऊर्जा से मुक्ति पाने के लिए दूर-दूर से आते हैं। श्रद्धालु यहां अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए अर्जी लगाते हैं।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर की विशेषताओं पर प्रकाश डाला है। मंगलवार को उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का एक विशेष वीडियो साझा किया। उन्होंने मंदिर और इसके महत्व को उजागर करते हुए लिखा, "देहरादून के झाझरा में स्थित श्री बालाजी धाम श्रद्धा और आस्था का एक प्रमुख केंद्र है। मंगलवार और शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं और श्री हनुमान जी से अपनी इच्छाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। आप भी देहरादून आने पर इस पावन धाम के दर्शन अवश्य करें।"
मंदिर की एक विशेषता यह है कि यहां भक्तगण बालाजी महाराज को लड्डू और भैरव बाबा को बताशा (या उड़द दाल से संबंधित प्रसाद) अर्पित करते हैं, जबकि प्रेतराज जी को घी, नारियल और बूरा अर्पित किया जाता है।
मंगलवार और शनिवार को यहां भक्तों की भारी भीड़ जुटती है। इन दिनों हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं और हनुमान जी से आशीर्वाद मांगते हैं। मान्यता है कि मंगलवार और शनिवार को की गई प्रार्थना और अर्जी का फल अवश्य मिलता है। मंदिर में एक बार अर्जी लगाई जाती है और सात बार भोग अर्पित किया जाता है।
यह मंदिर बाबा रामकृष्ण दास बर्फानी द्वारा वर्ष १९५७ में स्थापित किया गया था। बालाजी धाम का प्रबंधन बाबा बाल रामदास हठयोगी महाराज करते हैं। इस मंदिर में मुख्य रूप से बालाजी के बाल स्वरूप और भैरव बाबा, भोलेनाथ, राधा कृष्ण और मां भगवती दुर्गा की पूजा की जाती है। मंदिर में एक बड़ा पेड़ है, जिस पर हजारों की संख्या में बालाजी को चोला चढ़ाया जाता है।