ईडी की बड़ी कार्रवाई: म्यांमार सुपारी तस्करी केस में ₹8.12 करोड़ की 10 संपत्तियाँ जब्त
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के आइजोल सब-जोनल ऑफिस ने 4 सितंबर 2026 को जारी प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के तहत म्यांमार से सूखी सुपारी की संगठित सीमा-पार तस्करी से जुड़े मामले में ₹8.12 करोड़ मूल्य की 10 अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से जब्त की हैं। मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 5(1) के अंतर्गत की गई यह कार्रवाई मिजोरम के चम्फाई और उसके आसपास के क्षेत्रों में अंजाम दी गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी की जाँच एसीबी, सीबीआई, इंफाल द्वारा दर्ज प्राथमिकी और तत्पश्चात 29 अगस्त 2025 को दायर चार्जशीट के आधार पर आरंभ हुई थी। सीबीआई की जाँच में आरोप लगाया गया था कि फर्ज़ी ई-वे बिल, जाली दस्तावेज़ों और अन्य छद्म तरीकों का सहारा लेकर मिजोरम के रास्ते म्यांमार से भारत में सूखी सुपारी की बड़े पैमाने पर तस्करी की गई।
जाँच एजेंसियों के अनुसार, लगभग 3,103 मीट्रिक टन सूखी सुपारी की तस्करी की गई, जिसका अनुमानित बाज़ार मूल्य लगभग ₹1,022.25 करोड़ था। इस अवैध व्यापार के कारण सरकारी खज़ाने को लगभग ₹408.90 करोड़ की बेसिक कस्टम ड्यूटी का नुकसान हुआ — एक राजकोषीय क्षति जो इस मामले की गंभीरता को और रेखांकित करती है।
तस्करी नेटवर्क का खुलासा
जाँच में सामने आया है कि एक सुनियोजित संगठित नेटवर्क के तहत म्यांमार/बर्मी आपूर्तिकर्ताओं ने टियाउ नदी और जोखावथर/चम्फाई के सीमावर्ती इलाकों से भारत में सुपारी पहुँचाई। मिजोरम में मौजूद स्थानीय सहयोगियों ने तस्करी की गई सुपारी खरीद कर उसके भंडारण और परिवहन की व्यवस्था की, और उसे असम सहित अन्य राज्यों में भेजा।
जाँच में यह भी उजागर हुआ कि सीमा शुल्क अधिकारियों के समक्ष पकड़े गए माल के दावेदार के रूप में स्थानीय लोगों का इस्तेमाल किया गया। म्यांमार में आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान के लिए बैंक खातों और मनी एक्सचेंजर्स के ज़रिए बड़ी धनराशि का लेन-देन हुआ। इससे पहले, तलाशी अभियान के दौरान आरोपियों और अन्य लाभार्थियों के बैंक खातों में लगभग ₹1.20 करोड़ की राशि पीएमएलए की धारा 17(1ए) के तहत फ्रीज़ की गई थी।
मुख्य आरोपी और संपत्तियाँ
जाँच में जोसांगपुई, थांगखानमुंगा, जोनसांगा और सांगनीहवेला की पहचान उन व्यक्तियों के रूप में हुई है, जो म्यांमार से तस्करी की गई सुपारी की खरीद, परिवहन, भंडारण और व्यापार में सक्रिय रूप से शामिल थे और जिन्हें इससे पर्याप्त आर्थिक लाभ हुआ।
जब्त की गई संपत्तियों में सबसे प्रमुख है बेथेल वेंग, चम्फाई में स्थित 'होटल जेड' और उससे जुड़ी भूमि, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹6.29 करोड़ है। जाँच में खुलासा हुआ है कि इस होटल का निर्माण तस्करी और सुपारी व्यापार से अर्जित अपराध-धन से किया गया था।
कुल जब्ती का आँकड़ा
₹8.12 करोड़ की अचल संपत्तियों की अस्थायी जब्ती और ₹1.20 करोड़ के बैंक बैलेंस की फ्रीज़िंग को मिलाकर इस मामले में अपराध से अर्जित कुल संपत्ति का मूल्य अब लगभग ₹9.33 करोड़ हो गया है। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत में सीमा-पार तस्करी रोकने की दिशा में केंद्रीय एजेंसियाँ सक्रियता से काम कर रही हैं।
आगे की जाँच
ईडी के अनुसार, इस मामले से संबंधित जाँच अभी जारी है। गौरतलब है कि मिजोरम की म्यांमार से लगती लंबी और दुर्गम सीमा तस्करी के लिए एक संवेदनशील मार्ग रही है। इस कार्रवाई से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में इस नेटवर्क से जुड़े और ज़्यादा व्यक्तियों व संपत्तियों पर शिकंजा कस सकता है।