क्या इंजीनियर युवराज की मौत पर एनजीटी सख्त होगी?

Click to start listening
क्या इंजीनियर युवराज की मौत पर एनजीटी सख्त होगी?

सारांश

नोएडा में युवराज मेहता की जलभराव के कारण मृत्यु ने एनजीटी को सक्रिय किया है। एनजीटी ने पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया है। क्या इससे प्रशासनिक लापरवाही पर असर पड़ेगा? जानिए इस मामले की पूरी कहानी।

Key Takeaways

  • युवराज मेहता की जलभराव के कारण हुई मौत ने प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया।
  • एनजीटी ने पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन का मामला दर्ज किया है।
  • जल प्रबंधन की कमी के कारण गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
  • भविष्य में इसी तरह की घटनाओं से बचने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
  • सभी संबंधित विभागों को जवाब देने के लिए 1 सप्ताह का समय दिया गया है।

नोएडा, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। नोएडा के सेक्टर 150 में जलभराव के कारण सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दुखद मृत्यु के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त कदम उठाया है। एनजीटी ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे पर्यावरण कानूनों का गंभीर उल्लंघन माना है।

एनजीटी की बेंच, जिसमें न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव (चेयरपर्सन) और डॉ. ए. सेंथिल वेल (एक्सपर्ट मेंबर) शामिल हैं, ने कहा कि यह घटना प्रशासनिक लापरवाही और स्टॉर्म वाटर मैनेजमेंट सिस्टम की विफलता को स्पष्ट करती है। जानकारी के अनुसार, सेक्टर 150 में जिस स्थान पर युवराज मेहता की मौत हुई, वह पहले एक निजी मॉल परियोजना के लिए आवंटित था, लेकिन पिछले एक दशक से वहां वर्षा जल और आसपास की हाउसिंग सोसाइटीज का वेस्ट वाटर जमा हो गया, जिससे यह क्षेत्र एक स्थायी तालाब में बदल गया।

घने कोहरे के दौरान युवराज अपनी कार से तेज मोड़ पर नियंत्रण खो बैठे और पानी से भरी गहरी ट्रेंच में गिर गए, जहां डूबने से उनकी मृत्यु हो गई। एनजीटी ने विशेष रूप से 2015 में बनाई गई स्टॉर्म वाटर मैनेजमेंट योजना के लागू न होने पर गंभीर चिंता व्यक्त की।

सिंचाई विभाग ने उस समय हिंडन नदी में पानी के नियंत्रित निकास के लिए हेड रेगुलेटर लगाने का प्रस्ताव दिया था। 2016 में नोएडा प्राधिकरण ने इसके सर्वे और डिजाइन के लिए 13.05 लाख रुपए भी जारी किए थे, लेकिन यह योजना केवल कागजों तक ही सीमित रह गई।

हेड रेगुलेटर की कमी के कारण वर्षों से जलभराव की समस्या बनी रही, जिसके चलते कई सोसायटीज के बेसमेंट तक जलमग्न हो गए। एनजीटी ने इस मामले में नोएडा अथॉरिटी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी), सिंचाई विभाग, जिलाधिकारी गौतमबुद्ध नगर, और उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी किया है।

सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले अपना जवाब हलफनामे के रूप में दाखिल करें। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि यह मामला पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के उल्लंघन से संबंधित है और इसमें पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन तथा जिम्मेदार एजेंसियों की भूमिका की गहन समीक्षा की जाएगी। इस मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।

Point of View

यह मामला केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि यह हमारे शहरों में जल प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की कमी को भी उजागर करता है। हमें इस मुद्दे पर गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके और हमारे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
NationPress
22/01/2026

Frequently Asked Questions

युवराज मेहता की मौत किन कारणों से हुई?
युवराज मेहता की मौत जलभराव के कारण हुई, जब वह अपनी कार से तेज मोड़ पर नियंत्रण खो बैठे और पानी से भरी ट्रेंच में गिर गए।
एनजीटी ने इस मामले में क्या कार्रवाई की?
एनजीटी ने स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों को नोटिस जारी किया है और अगली सुनवाई 10 अप्रैल 2026 को होगी।
स्टॉर्म वाटर मैनेजमेंट योजना क्या है?
स्टॉर्म वाटर मैनेजमेंट योजना वर्षा के पानी के प्रबंधन के लिए बनाई गई थी, जिसे 2015 में लागू किया जाना था, लेकिन यह अभी तक लागू नहीं हो पाई है।
Nation Press