फडणवीस ने लॉन्च किया 'महाचतुर एआई चैटबॉट': कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के लिए वन-स्टॉप प्लेटफॉर्म
सारांश
Key Takeaways
- मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने २७ अप्रैल २०२५ को मुंबई में 'महाचतुर एआई चैटबॉट' लॉन्च किया।
- यह चैटबॉट व्हाट्सएप के माध्यम से उपलब्ध है और कौशल प्रशिक्षण, रोजगार, उद्यमिता मार्गदर्शन और शिकायत निवारण का वन-स्टॉप सॉल्यूशन है।
- अप्रेंटिसशिप पंजीकरण की प्रक्रिया २-३ दिन से घटकर अब मात्र १५ मिनट में पूरी होगी।
- प्रणाली 'राइटवॉक फाउंडेशन' के सहयोग से विकसित है और सुरक्षित सरकारी सर्वरों पर ओपन-सोर्स एआई के जरिए संचालित होती है।
- कौशल मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने असंगठित कौशल क्षेत्र को संगठित करने और महाराष्ट्र युवाओं को वैश्विक श्रम बाजार से जोड़ने का संकल्प दोहराया।
मुंबई, २७ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को मुंबई में 'महाचतुर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैटबॉट' का शुभारंभ किया — एक ऐसा डिजिटल मंच जो शिक्षा से रोजगार तक की राह को सरल बनाने, कौशल विकास को गति देने और उद्यमिता मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए एकीकृत समाधान के रूप में तैयार किया गया है। यह पहल महाराष्ट्र सरकार के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जिसके तहत राज्य के युवाओं को वैश्विक श्रम बाजार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम: क्या है महाचतुर चैटबॉट?
लॉन्च समारोह में बोलते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि भारत के पास एक बड़ा 'जनसांख्यिकीय लाभ' है — देश की ६५ प्रतिशत आबादी ३५ वर्ष से कम आयु की है। उन्होंने कहा कि एक तरफ उद्योग जगत कुशल मानव संसाधन की तलाश में है, तो दूसरी तरफ युवा रोजगार के अवसरों की खोज में हैं। महाचतुर चैटबॉट इन दोनों के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का काम करेगा।
यह एआई-आधारित सहायक व्हाट्सएप के माध्यम से उपलब्ध है और कौशल प्रशिक्षण की जानकारी, आवेदन प्रक्रियाएं, रोजगार सूचनाएं, उद्यमिता मार्गदर्शन, बाजार संपर्क, मूल्यांकन और शिकायत निवारण — सभी सुविधाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर प्रदान करता है।
अप्रेंटिसशिप पंजीकरण: तीन दिन से घटकर १५ मिनट
फडणवीस के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म की सबसे उल्लेखनीय विशेषताओं में से एक है अप्रेंटिसशिप पंजीकरण प्रक्रिया का आमूल सरलीकरण। नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम और महाराष्ट्र अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम के अंतर्गत, जो पंजीकरण प्रक्रिया पहले दो से तीन दिन लेती थी, वह अब मात्र १५ मिनट में पूरी की जा सकती है।
गौरतलब है कि लंबी और जटिल पंजीकरण प्रक्रिया को अक्सर अप्रेंटिसशिप कार्यक्रमों में कम भागीदारी का एक प्रमुख कारण माना जाता रहा है। इस बाधा को दूर करना युवाओं के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकता है।
तकनीकी ढांचा: सुरक्षित सर्वर और ओपन-सोर्स एआई
मुख्यमंत्री ने बताया कि 'राइटवॉक फाउंडेशन' के सहयोग से विकसित यह प्रणाली ओपन-सोर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित है और सुरक्षित सरकारी सर्वरों पर संचालित होती है। इसका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी — दोनों क्षेत्रों के उपयोगकर्ताओं के लिए अधिकतम डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करना है।
यह ऐसे समय में आया है जब डेटा सुरक्षा को लेकर नागरिकों की चिंताएं बढ़ रही हैं और सरकारी डिजिटल सेवाओं पर भरोसे की मांग तेज हो रही है।
मंत्री लोढ़ा का संकल्प: असंगठित क्षेत्र को संगठित करना
कौशल एवं उद्यमिता मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने इस अवसर पर असंगठित कौशल क्षेत्र को संगठित करने के विभाग के दृढ़ संकल्प को रेखांकित किया। उन्होंने स्वीकार किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कुछ पारंपरिक नौकरियों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन साथ ही यह नए अवसरों का एक विशाल द्वार भी खोलता है।
लोढ़ा ने कहा कि महाराष्ट्र के युवाओं को वैश्विक श्रम बाजार से जोड़ने के प्रयास निरंतर जारी हैं और महाचतुर चैटबॉट इस दिशा में एक ठोस कदम है।
आम जनता पर असर: युवाओं के लिए क्या बदलेगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, व्हाट्सएप-आधारित होने के कारण यह प्लेटफॉर्म उन युवाओं तक भी पहुंच सकता है जिनके पास स्मार्टफोन तो है लेकिन इंटरनेट की सीमित पहुंच है। ग्रामीण महाराष्ट्र में जहां डिजिटल साक्षरता अभी भी विकसित हो रही है, व्हाट्सएप की परिचित इंटरफेस एक बड़ा फायदा साबित हो सकती है।
आने वाले महीनों में इस प्लेटफॉर्म के उपयोग के आंकड़े यह तय करेंगे कि क्या यह पहल महाराष्ट्र के कौशल विकास परिदृश्य को वास्तव में बदल पाती है — और देश के अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल बन सकती है।