क्या 'फारबिसगंज' में भाजपा का दो दशक पुराना वर्चस्व टूटेगा?

सारांश
Key Takeaways
- फारबिसगंज में भाजपा का दो दशकों से अधिक का वर्चस्व है।
- 2024 के चुनाव में मतदाता संख्या में वृद्धि हुई है।
- विद्यासागर केशरी ने पिछले चुनावों में महत्वपूर्ण जीत हासिल की।
- फारबिसगंज की भौगोलिक स्थिति इसे एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र बनाती है।
- यहां की मिट्टी उपजाऊ है, जो कृषि को बढ़ावा देती है।
पटना, 27 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के अररिया जिले की फारबिसगंज विधानसभा सीट भाजपा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसका महत्व इस तथ्य से स्पष्ट होता है कि 2005 से यह सीट लगातार भाजपा के नियंत्रण में है। पिछले दो दशकों में बिहार की राजनीति में कई परिवर्तन आए, लेकिन फारबिसगंज में भाजपा का वर्चस्व अडिग बना रहा है।
फारबिसगंज एक सामान्य वर्ग की विधानसभा सीट है, जिसकी स्थापना 1951 में हुई थी। अब तक यहां 17 बार चुनाव हो चुके हैं। प्रारंभ में इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा था, लेकिन नए राजनीतिक दलों के उदय के बाद कांग्रेस पीछे हटती चली गई।
1952, 1957, 1967, 1969, 1972, 1977, 1980 और 1985 में कांग्रेस ने यहां जीत हासिल की। वहीं, 1990, 1995, 2005 (दो चुनावों में), 2010, 2015 और 2020 में भाजपा ने सफलता प्राप्त की है। 1962 और 2000 में यहां अन्य दलों ने जीत हासिल की थी।
फारबिसगंज अररिया जिले और लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है, जो फारबिसगंज ब्लॉक और आसपास के ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों का सम्मिलन है। यह अररिया जिले के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित है, जो नेपाल सीमा से मात्र 8 किमी और पटना से लगभग 300 किमी दूर है। यह सड़क और रेल मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है, और इसका रेलवे स्टेशन बरौनी-कटिहार-राधिकापुर रेल लाइन पर स्थित है।
फारबिसगंज का नाम ब्रिटिश अधिकारी अलेक्जेंडर फोर्ब्स के नाम पर रखा गया है। इसकी सीमावर्ती स्थिति और रेल कनेक्टिविटी के कारण यह व्यापारिक, प्रशासनिक और शैक्षणिक गतिविधियों का केंद्र बन गया है। भौगोलिक दृष्टि से फारबिसगंज गंगा-कोसी के जलोढ़ मैदानों में बसा है। यहां मानसून के दौरान बाढ़ और जलभराव की समस्या सामान्य है, जो कृषि और बुनियादी ढांचे को प्रभावित करती है। फिर भी यहां की मिट्टी उपजाऊ है और इसका लाभ कृषि में देखा जा सकता है। धान, गेहूं, मक्का, दालें, जूट, सब्जियां और तिलहन यहां की प्रमुख फसलें हैं।
2020 विधानसभा चुनाव में यहां 3,40,760 पंजीकृत मतदाता थे, जिनमें 1,15,176 (लगभग 33.80 प्रतिशत) मुस्लिम मतदाता शामिल थे। 2024 के लोकसभा चुनावों में मतदाताओं की संख्या बढ़कर 3,56,438 हो गई।
2015 से यहां के विधायक विद्यासागर केशरी हैं, जिन्होंने 2015 और 2020 के चुनाव में भाजपा के टिकट से जीत हासिल की है। विद्यासागर केशरी ने 2020 के चुनाव में कांग्रेस के जाकिर हुसैन खान को 19,702 मतों के अंतर से हराया था।
विधानसभा चुनाव के समान, लोकसभा चुनाव में भी भाजपा का दबदबा इस क्षेत्र में बना रहा है। प्रदीप कुमार सिंह ने लोकसभा चुनाव 2024 में राजद के मोहम्मद शहनवाज आलम को बड़े अंतर से हराया था।
फारबिसगंज 2025 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा के लिए सुरक्षित सीट मानी जा रही है।