मुंगेर कोर्ट में आग: ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट दफ्तर के अहम रिकॉर्ड जलकर राख, शॉर्ट सर्किट की आशंका
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के मुंगेर जिले में किले के परिसर स्थित ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (फर्स्ट क्लास) किरण कुमारी के कार्यालय में 1 अगस्त 2026 की सुबह भीषण आग लग गई, जिससे दर्जनों केस फाइलें, कानूनी दस्तावेज़ और वर्षों पुराने न्यायिक अभिलेख जलकर नष्ट हो गए। कोर्ट स्टाफ के अनुसार, आग सुबह लगभग 9:50 बजे लगी — ठीक उस समय जब कोर्ट खुलने में कुछ ही मिनट बाकी थे और कार्यालय में कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था।
मुख्य घटनाक्रम
आग की सूचना मिलते ही फायर डिपार्टमेंट को तत्काल अलर्ट किया गया। दो दमकल वाहन मौके पर पहुँचे और दमकलकर्मियों ने करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग की खबर फैलते ही कोर्ट परिसर में अफरातफरी का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में वकील, पुलिसकर्मी और न्यायालय कर्मचारी घटनास्थल पर जमा हो गए।
आग का कारण और जाँच
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी, हालाँकि अधिकारी सटीक कारण निर्धारित करने के लिए जाँच कर रहे हैं। बिजली की वायरिंग और केबल का तकनीकी निरीक्षण भी शुरू किया गया है। इसके साथ ही जाँचकर्ता उन व्यक्तियों की पहचान करने में जुटे हैं जो घटना के समय उस क्षेत्र में मौजूद थे या उसके आसपास देखे गए थे।
न्यायिक अभिलेखों का नुकसान
कोर्ट प्रशासन ने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है और आग में नष्ट हुई फाइलों एवं दस्तावेज़ों की विस्तृत सूची तैयार की जा रही है। गौरतलब है कि न्यायालय के अभिलेखों के नष्ट होने से सक्रिय मामलों से जुड़े दस्तावेज़ों को पुनः प्राप्त करने और पुनर्निर्मित करने की चुनौती खड़ी हो गई है। इस घटना के कारण शनिवार को सूचीबद्ध सभी मामलों की सुनवाई स्थगित कर दी गई है और अगली तारीखें जल्द घोषित किए जाने की उम्मीद है।
सुरक्षा उपाय और भविष्य की तैयारी
इस घटना के बाद पूरे कोर्ट परिसर में वायरिंग और केबल की व्यापक जाँच की जा रही है, ताकि कोर्टरूम, ज्यूडिशियल हॉल, जजों के चैंबर, कैफेटेरिया और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर भविष्य में ऐसी दुर्घटना को रोका जा सके। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
आगे क्या होगा
प्रशासन नष्ट हुए दस्तावेज़ों की पुनर्प्राप्ति की संभावनाएँ तलाश रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के न्यायालयों में डिजिटल अभिलेख प्रणाली अपनाने की माँग लगातार उठती रही है। मुंगेर की इस घटना ने एक बार फिर न्यायिक परिसरों में अग्नि सुरक्षा और दस्तावेज़ संरक्षण की खामियों को उजागर किया है।