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गांधीधाम रेलवे अस्पताल में 2026 की चौथी घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी सफल, 66 वर्षीय लाभार्थी को मिली राहत

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गांधीधाम रेलवे अस्पताल में 2026 की चौथी घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी सफल, 66 वर्षीय लाभार्थी को मिली राहत

सारांश

गांधीधाम उपमंडल रेलवे अस्पताल ने 2026 में चौथी घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की। डॉ. पार्थ राठी की टीम ने 66 वर्षीय रेलवे लाभार्थी का ऑपरेशन कर उन्हें दर्द और गतिशीलता की समस्या से राहत दी — और साबित किया कि विशेष ऑर्थोपेडिक देखभाल अब बड़े शहरों की बाट नहीं जोहती।

मुख्य बातें

गांधीधाम उपमंडल रेलवे अस्पताल ने 19 अक्टूबर 2026 को 2026 की चौथी सफल घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी की।
मरीज 66 वर्षीय रेलवे लाभार्थी थे, जिन्हें घुटने में तीव्र दर्द और चलने में गंभीर दिक्कत थी।
पार्थ राठी (ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ) और डॉ.
हितेश शाह (एनेस्थेटिस्ट) ने संपन्न की।
अस्पताल पश्चिमी रेलवे के अहमदाबाद डिवीजन के अंतर्गत आता है।
स्थानीय सुविधा से रेलवे परिवारों को बड़े शहरों में इलाज के लिए जाने की ज़रूरत कम हो रही है।

गांधीधाम उपमंडल रेलवे अस्पताल ने 19 अक्टूबर 2026 को एक 66 वर्षीय रेलवे लाभार्थी की सफल घुटना प्रत्यारोपण (नी रिप्लेसमेंट) सर्जरी कर इस वर्ष की अपनी चौथी ऐसी प्रक्रिया पूरी की। पश्चिमी रेलवे के अहमदाबाद डिवीजन के अंतर्गत आने वाले इस अस्पताल ने स्थानीय स्तर पर विशेष ऑर्थोपेडिक देखभाल उपलब्ध कराकर क्षेत्र के रेलवे परिवारों को बड़े शहरों तक जाने की मजबूरी से राहत दी है।

सर्जरी का विवरण

ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. पार्थ राठी और एनेस्थेटिस्ट डॉ. हितेश शाह ने मिलकर यह सर्जरी संपन्न की। मरीज को घुटने में तीव्र दर्द था और दैनिक चलने-फिरने में गंभीर कठिनाई हो रही थी। सर्जरी के दौरान क्षतिग्रस्त घुटने के जोड़ की सतह को कृत्रिम घटकों से बदला गया, जिसका उद्देश्य दर्द को कम करना और रोगी की गतिशीलता बहाल करना था।

इस वर्ष का सर्जरी रिकॉर्ड

2026 की शुरुआत में अस्पताल में तीन अन्य सफल घुटना प्रतिस्थापन ऑपरेशन किए जा चुके थे। 19 अक्टूबर की इस नवीनतम सर्जरी के साथ इस वर्ष की कुल संख्या चार हो गई है। गांधीधाम जैसे उपमंडल स्तर के रेलवे अस्पताल में इतनी संख्या में जटिल ऑर्थोपेडिक प्रक्रियाएं किया जाना उल्लेखनीय माना जा रहा है।

रेलवे लाभार्थियों पर असर

घुटना प्रत्यारोपण आमतौर पर तब की जाने वाली प्रक्रिया है जब घुटने के जोड़ में क्षति के कारण लगातार दर्द और गतिशीलता की समस्या उत्पन्न हो जाती है। इस तरह की विशेषज्ञ सर्जरी पहले केवल बड़े शहरों के अस्पतालों में उपलब्ध थी। गांधीधाम में यह सुविधा मिलने से रेलवे लाभार्थियों और उनके परिवारों को यात्रा, रहने और लॉजिस्टिक खर्चों से राहत मिल रही है।

पश्चिमी रेलवे का रुख

पश्चिमी रेलवे के अहमदाबाद डिवीजन ने कहा है कि वह स्वास्थ्य सुविधाओं को रेलवे लाभार्थियों के लिए निरंतर अधिक सुलभ बनाने की दिशा में प्रयासरत है। यह पहल उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है जिसमें रेलवे अपने कर्मचारियों और उनके आश्रितों को स्थानीय स्तर पर ही उच्च गुणवत्ता की चिकित्सा सेवा देना चाहता है। गौरतलब है कि इस तरह की विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार छोटे डिवीजनल अस्पतालों तक होना रेलवे स्वास्थ्य नेटवर्क की बढ़ती क्षमता का संकेत है।

आगे की राह

अस्पताल में ऑर्थोपेडिक सुविधाओं के विस्तार से उम्मीद है कि आने वाले समय में और अधिक रेलवे लाभार्थी स्थानीय स्तर पर ही जटिल सर्जरी करा सकेंगे। पश्चिमी रेलवे के इस प्रयास से गांधीधाम और आसपास के क्षेत्र में रहने वाले रेलवे परिवारों को दीर्घकालिक राहत मिलने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस नीतिगत दिशा की ओर इशारा करती है जिसमें विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं बड़े केंद्रों से विकेंद्रीकृत होकर फील्ड-स्तर के अस्पतालों तक पहुंच रही हैं। रेलवे लाभार्थियों के लिए यह राहत की बात है क्योंकि जटिल सर्जरी के लिए दूर-दराज जाना न केवल आर्थिक बोझ बल्कि स्वास्थ्य जोखिम भी बढ़ाता है। असली कसौटी यह होगी कि क्या इस क्षमता को टिकाऊ और नियमित बनाया जा सकता है, या यह कुछ विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपस्थिति पर निर्भर एकल-बिंदु सेवा बनी रहेगी।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गांधीधाम रेलवे अस्पताल में 2026 में कितनी घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी हुईं?
2026 में गांधीधाम उपमंडल रेलवे अस्पताल में कुल चार सफल घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी हुईं। 19 अक्टूबर 2026 को की गई सर्जरी इस वर्ष की चौथी थी।
19 अक्टूबर की सर्जरी किसने की और मरीज कौन थे?
ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. पार्थ राठी और एनेस्थेटिस्ट डॉ. हितेश शाह ने मिलकर यह सर्जरी की। मरीज 66 वर्षीय रेलवे लाभार्थी थे, जिन्हें घुटने में तीव्र दर्द और चलने-फिरने में गंभीर कठिनाई थी।
घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी क्या होती है?
घुटना प्रत्यारोपण (नी रिप्लेसमेंट) एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें घुटने के जोड़ की क्षतिग्रस्त सतहों को कृत्रिम घटकों से बदला जाता है। इसका उद्देश्य दर्द को कम करना और रोगी की दैनिक गतिशीलता में सुधार करना होता है।
गांधीधाम में यह सुविधा होने से रेलवे लाभार्थियों को क्या फायदा है?
इससे रेलवे लाभार्थियों को विशेष ऑर्थोपेडिक सर्जरी के लिए अन्य बड़े शहरों के अस्पतालों तक लंबी यात्रा नहीं करनी पड़ती। इससे यात्रा, रहने और लॉजिस्टिक से जुड़ी कठिनाइयाँ और खर्च दोनों कम होते हैं।
यह अस्पताल किस रेलवे डिवीजन के अंतर्गत आता है?
गांधीधाम उपमंडल रेलवे अस्पताल पश्चिमी रेलवे के अहमदाबाद डिवीजन के अंतर्गत आता है। पश्चिमी रेलवे ने कहा है कि वह क्षेत्र में रेलवे लाभार्थियों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं अधिक सुलभ बनाने के प्रयास जारी रखेगा।
राष्ट्र प्रेस
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