गाजियाबाद हत्याकांड: बहू रेनू की लोहे की रॉड से हत्या, पति-ससुर-सास तीनों गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
गाजियाबाद के मधुबन बापूधाम थाना क्षेत्र के सदरपुर गांव में मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को एक महिला की उसके ही परिवार के तीन सदस्यों द्वारा निर्मम हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार, पीड़िता रेनू के पति अरुण कुमार, ससुर विनोद कुमार और सास रोहताशी ने मिलकर उसके सिर पर लोहे की रॉड से वार किए, जिससे उसकी मौत हो गई। तीनों आरोपियों को घटना के कुछ ही घंटों बाद गिरफ्तार कर लिया गया।
घटना का विवरण
आरोपियों के बयान के अनुसार, घर में रोज़ाना छोटी-छोटी बातों और खाना बनाने को लेकर विवाद होता था, जिससे तंग आकर तीनों ने मिलकर रेनू की हत्या की साजिश रची। अधिकारियों के अनुसार, तीनों ने उसके सिर पर लोहे की रॉड से वार किए और मारपीट कर उसकी जान ले ली। यह घटना घरेलू हिंसा की उस भयावह श्रृंखला की ओर ध्यान दिलाती है, जिसमें परिजन ही अपराधी बन जाते हैं।
शिकायत और मुकदमा दर्ज होना
पीड़िता की ओर से उसके भाई राहुल राठी — जो अलीगढ़ जिले के जलालपुर गांव, थाना पिसावा के निवासी हैं — ने मधुबन बापूधाम थाने में लिखित तहरीर दी। उन्होंने बताया कि उनकी बहन रेनू की हत्या उसके पति अरुण कुमार (38 वर्ष), ससुर विनोद कुमार (58 वर्ष) और सास रोहताशी (करीब 55 वर्ष) ने मिलकर की है। तहरीर के आधार पर मुकदमा संख्या 312/26, धारा 85/103(1) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया।
गिरफ्तारी और साक्ष्य
उच्चाधिकारियों के निर्देश पर एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने चेकिंग अभियान के दौरान बुनकर मार्ट पुलिस चौकी, मधुबन बापूधाम के समीप सड़क से तीनों आरोपियों को पकड़ लिया। पुलिस ने आरोपियों के पास से घटना में प्रयुक्त लोहे की रॉड भी बरामद कर ली है, जो इस मामले में महत्वपूर्ण भौतिक साक्ष्य है।
आरोपियों का बयान
पुलिस पूछताछ में तीनों आरोपियों ने एकमत होकर स्वीकार किया कि रेनू रोज़ाना घरेलू मसलों पर विवाद करती थी। आरोपियों ने दावा किया कि घर में लगातार कलह से तंग होकर उन्होंने यह कदम उठाया — हालांकि पुलिस इस बयान की स्वतंत्र पुष्टि कर रही है। कथित कारण चाहे जो भी हों, कानून में इसका कोई औचित्य नहीं।
आगे की कार्रवाई
गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों हत्यारोपियों को समय पर गिरफ्तार किया। तीनों के विरुद्ध आगे की कानूनी कार्यवाही जारी है। यह मामला घरेलू विवादों के घातक रूप लेने की गंभीर सामाजिक समस्या को एक बार फिर उजागर करता है, और अधिकारी यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि दोष सिद्ध हो तो दंड भी सुनिश्चित हो।