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क्या गोरक्षपीठाधीश्वर गुरु गोरखनाथ को लोक आस्था की खिचड़ी अर्पित करेंगे?

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क्या गोरक्षपीठाधीश्वर गुरु गोरखनाथ को लोक आस्था की खिचड़ी अर्पित करेंगे?

सारांश

गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ इस मकर संक्रांति पर गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी अर्पित करेंगे, जिससे श्रद्धालुओं की सुख-समृद्धि की कामना होगी। लाखों श्रद्धालु इस पर्व पर बाबा को खिचड़ी चढ़ाने के लिए पहुंचेंगे। जानिए इस विशेष परंपरा के बारे में और कैसे यह लोक आस्था का प्रतीक है।

मुख्य बातें

मकर संक्रांति पर गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा महत्वपूर्ण है।
इस पर्व पर लाखों श्रद्धालु मंदिर में आते हैं।
सुरक्षा और सुविधा के लिए प्रशासन ने व्यापक प्रबंध किए हैं।
खिचड़ी चढ़ाने से मन्नत पूरी होने की मान्यता है।
यह पर्व सभी धर्मों का एकता का प्रतीक है।

गोरखपुर, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मकर संक्रांति के इस पावन पर्व पर, गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाथपंथ की अद्वितीय परंपरा के अनुसार गुरुवार तड़के (15 जनवरी) को ब्रह्म मुहूर्त में शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ को लोक आस्था की खिचड़ी चढ़ाकर समस्त जनमानस की सुख-समृद्धि की मंगलकामना करेंगे। हालांकि, बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी अर्पित करने के लिए श्रद्धालुओं का आना मंगलवार की रात से ही प्रारंभ हो चुका है।

कई श्रद्धालु बुधवार को भी खिचड़ी चढ़ाएंगे, जबकि गुरुवार को यहां आस्था का विशाल जनसागर देखने को मिलेगा। सूर्यदेव के उत्तरायण होने पर खिचड़ी चढ़ाने की यह अनूठी परंपरा पूरी तरह से लोक को समर्पित है। मान्यता है कि महायोगी गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी अर्पित करने वाला कभी भी निराश नहीं होता। अरुणोदय काल में मकर संक्रांति का महापर्व गुरुवार को मनाया जाएगा।

इस दिन उत्तर प्रदेश, बिहार और देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ पड़ोसी देश नेपाल से भी लाखों श्रद्धालु बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने के लिए उपस्थित होंगे। आनुष्ठानिक कार्यक्रमों की शुरुआत गुरुवार सुबह ही होगी। सबसे पहले गोरक्षपीठ की तरफ से पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ खिचड़ी चढ़ाकर बाबा को भोग अर्पित करेंगे। इसके पश्चात मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे और जनसामान्य की आस्था खिचड़ी के रूप में निवेदित होना शुरू हो जाएगी।

मंदिर और प्रशासन ने खिचड़ी महापर्व को लेकर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए व्यापक प्रबंध किए हैं। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री स्वयं सभी व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। मकर संक्रांति पर्व को लेकर मंदिर और मेला परिसर पूरी तरह सज-धजकर तैयार है। समूचा मंदिर क्षेत्र रंग-बिरंगी रोशनी में नहाया हुआ है। श्रद्धालुओं का आना मंगलवार रात से ही प्रारंभ हो गया है। मंदिर प्रबंधन ने उनके ठहरने और अन्य सुविधाओं का इंतजाम किया है। प्रशासन की तरफ से रैन बसेरों में भी पूरी व्यवस्था की गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अपितु समाज की एकजुटता और परंपराओं का सम्मान भी निहित है। यह पर्व न केवल स्थानीय लोगों के लिए, बल्कि दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह हमें एकजुटता और संस्कृति की गरिमा को बनाए रखने का संदेश देता है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा कब से है?
यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और मकर संक्रांति के अवसर पर विशेष रूप से होती है।
क्या खिचड़ी चढ़ाने से कोई विशेष लाभ होता है?
मान्यता है कि खिचड़ी चढ़ाने से मन्नत मांगने वाला कभी निराश नहीं होता।
इस पर्व पर कितने श्रद्धालु आते हैं?
इस पर्व पर लाखों श्रद्धालु बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने के लिए आते हैं।
गोरक्षपीठ में सुरक्षा व्यवस्था कैसी होती है?
मंदिर प्रशासन श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए व्यापक प्रबंध करता है।
क्या यह पर्व केवल हिंदुओं के लिए है?
यह पर्व सभी धर्मों के लोगों के लिए एकता और आस्था का प्रतीक है।
राष्ट्र प्रेस
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