वेस्ट एशिया में तनाव के मध्य सरकार का महत्वपूर्ण निर्णय, न्यूज चैनलों की टीआरपी पर 4 हफ्तों की रोक

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वेस्ट एशिया में तनाव के मध्य सरकार का महत्वपूर्ण निर्णय, न्यूज चैनलों की टीआरपी पर 4 हफ्तों की रोक

सारांश

भारत सरकार ने वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव को ध्यान में रखते हुए न्यूज चैनलों की टीआरपी रिपोर्टिंग पर चार हफ्तों के लिए रोक लगाने का निर्णय लिया है। यह कदम मीडिया की जिम्मेदारी को बढ़ाने के लिए उठाया गया है, ताकि अनावश्यक डर और भ्रम को रोका जा सके।

Key Takeaways

  • टीआरपी रिपोर्टिंग पर चार हफ्तों की रोक।
  • वेस्ट एशिया में तनाव का प्रभाव।
  • समाज में डर फैलाने वाली रिपोर्टिंग पर नियंत्रण।
  • बीएआरसी की भूमिका।
  • मीडिया की जिम्मेदारी बढ़ी।

नई दिल्ली, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बीएआरसी) को यह निर्देश दिया है कि अगले चार हफ्तों या अगले आदेश तक न्यूज चैनलों की टीआरपी (टेलीविजन रेटिंग पॉइंट्स) रिपोर्टिंग पर रोक लगाई जाए। सरकार का कहना है कि यह निर्णय वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव को देखते हुए लिया गया है।

मंत्रालय के बयान में कहा गया, ''इससे पहले 6 मार्च को भी बीएआरसी को इसी तरह का निर्देश जारी किया गया था, जिसमें चार हफ्तों के लिए टीआरपी को रोकने के लिए कहा गया था। चूंकि स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है, इसीलिए इस आदेश को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।''

सरकार के अनुसार, ''कुछ न्यूज चैनल वेस्ट एशिया संघर्ष को अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर और बिना पूरी पुष्टि के दिखा रहे हैं। ऐसी रिपोर्टिंग से लोगों में डर और भ्रम पैदा हो सकता है, विशेष रूप से उन लोगों पर जिनके परिवार या रिश्तेदार उस क्षेत्र में हैं।''

मंत्रालय ने बताया कि इस तरह की सनसनीखेज खबरें समाज में अनावश्यक डर फैला सकती हैं, जिसे रोकना आवश्यक है।

मंत्रालय ने कहा, ''वेस्ट एशिया में स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है और पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। ऐसे में मीडिया की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वह सही और संतुलित खबरें प्रस्तुत करे। जनहित को ध्यान में रखते हुए टीआरपी रोकने का निर्णय जारी रखने का फैसला किया गया है। इस निर्णय के तहत अब अगले चार हफ्तों तक या जब तक नया आदेश नहीं आता, तब तक न्यूज चैनलों की टीआरपी सार्वजनिक नहीं की जाएगी।''

टीआरपी किसी भी टीवी चैनल के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इसके आधार पर यह निर्धारित होता है कि कौन सा चैनल कितना देखा जा रहा है। विज्ञापनदाताओं के लिए भी टीआरपी महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि वे इसी के आधार पर तय करते हैं कि उन्हें किस चैनल पर विज्ञापन देना है और कितनी राशि खर्च करनी है। इस प्रकार, टीआरपी बंद होने से न्यूज चैनलों के व्यवसाय पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने ऐसा कदम उठाया है। वर्ष 2020 में भी टीआरपी से संबंधित एक बड़ा विवाद सामने आया था, जिसमें कुछ चैनलों पर टीआरपी में गड़बड़ी करने के आरोप लगाए गए थे। उस समय मुंबई पुलिस ने जांच की थी और इसी कारण कुछ समय के लिए टीआरपी को निलंबित कर दिया गया था। उस घटना के बाद भी इस मुद्दे पर काफी चर्चा हुई थी।

बीएआरसी की स्थापना 2010 में की गई थी। यह भारत में टीवी दर्शकों के आंकड़े मापने वाली एकमात्र अधिकृत संस्था है। इसके द्वारा जारी आंकड़ों के आधार पर करोड़ों रुपए के विज्ञापन सौदों का निर्धारण होता है। इस प्रकार, टीआरपी को रोकने का निर्णय न केवल संपादकीय प्रथाओं को प्रभावित करता है, बल्कि टीवी न्यूज़ उद्योग के व्यापारिक डायनेमिक्स को भी प्रभावित करता है।

Point of View

खासकर जब हम एक संवेदनशील क्षेत्र की बात कर रहे हैं।
NationPress
11/04/2026

Frequently Asked Questions

टीआरपी क्यों रोकी गई है?
टीआरपी को वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव के कारण रोका गया है ताकि अनावश्यक डर और भ्रम न फैले।
यह निर्णय कब तक लागू रहेगा?
यह निर्णय अगले चार हफ्तों तक या अगले आदेश तक लागू रहेगा।
सरकार ने पहले भी ऐसा कदम उठाया है?
हाँ, वर्ष 2020 में भी टीआरपी को निलंबित करने का निर्णय लिया गया था।
टीआरपी का महत्व क्या है?
टीआरपी चैनलों की लोकप्रियता को दर्शाती है और विज्ञापनदाताओं के लिए महत्वपूर्ण होती है।
बीएआरसी क्या है?
बीएआरसी भारत में टीवी दर्शकों के आंकड़े मापने वाली एकमात्र अधिकृत संस्था है।
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