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गुजरात के 136 बस स्टैंडों पर ग्राम हाट शुरू, सखी मंडलों को मिलेगा व्यापक बाज़ार

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गुजरात के 136 बस स्टैंडों पर ग्राम हाट शुरू, सखी मंडलों को मिलेगा व्यापक बाज़ार

सारांश

नवरात्रि से पहले मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राजकोट से 27 जिलों के 136 बस स्टैंडों पर ग्राम हाट शुरू किए। 30 लाख ग्रामीण बहनों को सीधा बाज़ार, 13 MoU, और अमूल के साथ 18,000 गाँवों में मिल्क पार्लर — यह गुजरात की महिला आर्थिक क्रांति का नया अध्याय है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राजकोट से 27 जिलों के 136 बस स्टैंडों पर सखी मंडल संचालित ग्राम हाटों का ई-लोकार्पण किया।
GLPC ने अमूल, रेलवे, GSRTC, NIFT, MICA सहित 13 संस्थाओं के साथ MoU संपन्न किए।
अमूल गुजरात के 18,000 गाँवों में महिला संचालित मिल्क पार्लर खोलेगा।
गुजरात में अब तक 8.5 लाख से अधिक बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं; राष्ट्रीय लक्ष्य 2029 तक 6 करोड़ लखपति दीदी।
पाँच वर्षों में 236 सरस मेलों में 8,500 स्वयं सहायता समूहों ने लगभग ₹40 करोड़ की बिक्री की।
राज्य सरकार ने पिछले वर्ष महिला सशक्तीकरण क्षेत्र में ₹800 करोड़ की सहायता दी।

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 11 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि से पूर्व राजकोट से 27 जिलों के बस स्टेशनों पर सखी मंडल संचालित 136 ग्राम हाटों का ई-लोकार्पण किया, जिससे राज्यभर की ग्रामीण महिलाओं के हस्तशिल्प और खाद्य उत्पादों को सीधे यात्रियों तक पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त हुआ। रेसकोर्स ग्राउंड, राजकोट में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने तीन दिवसीय 'सरस मेले' का भी शुभारंभ किया और महिला सशक्तीकरण से जुड़ी कई नई पहलों की घोषणा की।

ग्राम हाट और 13 एमओयू : क्या हैं मुख्य प्रावधान

राज्य के बस और रेलवे स्टेशनों पर स्वयं सहायता समूहों की बहनों के उत्पादों की बिक्री के लिए स्थायी स्थान सुनिश्चित किए गए हैं। इस अवसर पर गुजरात लाइवलीहुड प्रमोशन कंपनी (GLPC) ने रेलवे, GSRTC, अमूल, NIFT, MICA, EDII, सरदार पटेल कृषि विश्वविद्यालय तथा SBI, PNB, ICICI, BOB और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया सहित कुल 13 समझौता ज्ञापन (MoU) किए।

इसके अतिरिक्त, विभिन्न स्वयं सहायता समूहों को अमूल पार्लर आवंटन पत्र, ₹45 लाख के कैश क्रेडिट चेक, डेयरी से जुड़े समूहों को ₹40 लाख के कैश क्रेडिट चेक तथा ई-कॉमर्स प्रोत्साहन के रूप में ₹1,08,640 के चेक वितरित किए गए।

अमूल के साथ मिल्क पार्लर और डिजिटल उद्यमिता पहल

मुख्यमंत्री पटेल ने घोषणा की कि अमूल राज्य के 18,000 गाँवों में महिला संचालित मिल्क पार्लर शुरू करेगा, जिसके लिए GLPC और अमूल के बीच MoU संपन्न किया गया। साथ ही, महिलाओं को सफल डिजिटल उद्यमी बनाने के लिए NIFT, MICA और DWII जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा मेंटरशिप और मार्गदर्शन की विशेष पहल भी आरंभ की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने महिला आर्थिक सशक्तीकरण के क्षेत्र में पिछले वर्ष ₹800 करोड़ की सहायता प्रदान की है और आने वाले वर्षों में यह सहायता कई गुना बढ़ाने की तैयारी है।

लखपति दीदी और सखी मंडलों की उपलब्धि

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्यभर में लगभग ढाई लाख सखी मंडलों की 30 लाख ग्रामीण बहनें अपने कौशल से पर्याप्त आर्थिक आय अर्जित कर रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2029 तक देशभर में 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने की मंशा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि गुजरात में अब तक 8.5 लाख से अधिक बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं।

गौरतलब है कि पिछले पाँच वर्षों में राज्यभर में लगभग 236 सरस मेलों में करीब 8,500 स्वयं सहायता समूहों ने लगभग ₹40 करोड़ की बिक्री की है। ग्राम विकास मंत्री कुंवरजी बावळिया ने बताया कि 'मिशन मंगलम' अभियान ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

घुमंतू जाति परिवारों को भूखंड आवंटन

कार्यक्रम में अंत्योदय की भावना को साकार करते हुए मुख्यमंत्री ने राजकोट जिले के घुमंतू एवं विमुक्त जाति के 139 परिवारों को आवास के उद्देश्य से निःशुल्क भूखंड वितरित किए।

राजकोट जिले के प्रभारी मंत्री जीतूभाई वाघाणी ने कहा कि सहकारिता एवं पशुपालन विभाग के समन्वय से महिलाओं की आर्थिक उड़ान को नए पंख मिलेंगे। GLPC की प्रबंध निदेशक प्रशस्ति पारीक ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए महिला उत्थान में GLPC के प्रयासों का विस्तृत विवरण दिया।

आगे की राह

यह पहल ऐसे समय में आई है जब केंद्र और राज्य सरकारें ग्रामीण महिलाओं को आपूर्ति श्रृंखला में सीधे जोड़ने पर ज़ोर दे रही हैं। बस और रेलवे स्टेशनों पर स्थायी बिक्री केंद्र उपलब्ध होने से स्वयं सहायता समूहों को मौसमी मेलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। 18,000 गाँवों में अमूल मिल्क पार्लर खुलने से ग्रामीण डेयरी उद्यमिता को नई गति मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सखी मंडलों की सबसे बड़ी चुनौती — स्थायी बाज़ार तक पहुँच — को सीधे संबोधित करती है। मौसमी मेलों की जगह स्थायी बिक्री केंद्र एक ढाँचागत बदलाव है। असली परीक्षा यह होगी कि GLPC इन हाटों की गुणवत्ता, विविधता और संचालन की निरंतरता सुनिश्चित कर पाती है या नहीं — क्योंकि ऐसी कई पहलें शुभारंभ के उत्साह के बाद धीमी पड़ जाती हैं। अमूल के साथ 18,000 गाँवों में मिल्क पार्लर का MoU महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसका क्रियान्वयन राज्य की डेयरी सहकारिता व्यवस्था की क्षमता पर निर्भर करेगा।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात के बस स्टैंडों पर ग्राम हाट क्या हैं?
ग्राम हाट, सखी मंडल संचालित बिक्री केंद्र हैं जो गुजरात के 27 जिलों के 136 बस स्टेशनों पर खोले गए हैं। इनका उद्देश्य ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों के हस्तशिल्प, खाद्य सामग्री और घरेलू उद्योग उत्पादों को यात्रियों तक सीधे पहुँचाना है।
इस कार्यक्रम में कौन-कौन से MoU हुए?
GLPC ने रेलवे, GSRTC, अमूल, NIFT, MICA, EDII, सरदार पटेल कृषि विश्वविद्यालय तथा SBI, PNB, ICICI, BOB और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के साथ कुल 13 MoU किए। इनमें से अमूल के साथ MoU 18,000 गाँवों में महिला संचालित मिल्क पार्लर के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
गुजरात में लखपति दीदी योजना की स्थिति क्या है?
गुजरात में अब तक 8.5 लाख से अधिक बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य 2029 तक पूरे देश में 6 करोड़ लखपति दीदी बनाना है।
सरस मेलों से अब तक कितनी बिक्री हुई है?
पिछले पाँच वर्षों में राज्यभर में आयोजित लगभग 236 सरस मेलों में करीब 8,500 स्वयं सहायता समूहों ने लगभग ₹40 करोड़ की बिक्री की है। तीन दिवसीय सरस मेले का शुभारंभ भी इसी कार्यक्रम में किया गया।
राज्य सरकार ने महिला सशक्तीकरण पर कितना खर्च किया है?
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के अनुसार गुजरात सरकार ने पिछले वर्ष महिला आर्थिक सशक्तीकरण के क्षेत्र में ₹800 करोड़ की सहायता प्रदान की है और आने वाले वर्षों में यह राशि कई गुना बढ़ाने की तैयारी है।
राष्ट्र प्रेस
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