14 अक्टूबर 2026
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गुजरात नवरात्रि: राजकोट में 19 साल पुरानी 'इंधोनी रास' और जामनगर में 52 साल पुरानी 'स्वास्तिक अंगारा रास' परंपरा

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गुजरात नवरात्रि: राजकोट में 19 साल पुरानी 'इंधोनी रास' और जामनगर में 52 साल पुरानी 'स्वास्तिक अंगारा रास' परंपरा

सारांश

गरबा-डांडिया से परे, गुजरात की नवरात्रि में आग और अंगारों के बीच नृत्य की ऐसी परंपराएँ हैं जो दशकों से जीवित हैं — राजकोट की 19 साल पुरानी इंधोनी रास और जामनगर की 52 साल पुरानी स्वास्तिक अंगारा रास विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित कर रही हैं।

मुख्य बातें

राजकोट के मावड़ी चौक पर श्री बजरंग गरबी मंडल द्वारा 19 वर्षों से 'इंधोनी रास' का आयोजन किया जा रहा है।
कलाकार सिर पर जलती इंधोनी और घड़े रखकर हाथों में मशालें थामे लगभग 20 मिनट तक गरबा करते हैं।
जामनगर में श्री रंडाल अंबिका कुमारिका गरबी मंडल की 52 साल पुरानी 'स्वास्तिक अंगारा रास' परंपरा जारी है।
आयोजक सुरेश गोंडालिया के अनुसार स्वास्तिक रास के अलावा मशाल रास, सड़क तीन-तन्नी रास और डाकला रास भी उत्सव का हिस्सा हैं।
जर्मनी और दक्षिण अफ्रीका सहित विदेशों से आए पर्यटक भी इन परंपराओं में रुचि दिखाते हैं।

गुजरात के राजकोट और जामनगर में नवरात्रि 2026 के अवसर पर पारंपरिक रास की ऐसी अनूठी झलकियाँ सामने आई हैं, जो इस त्योहार को गरबा और डांडिया से कहीं आगे ले जाती हैं। एक ओर जलती हुई इंधोनी सिर पर रखकर नृत्य किया जाता है, तो दूसरी ओर धधकते अंगारों के बीच स्वास्तिक की आकृति में रास प्रस्तुत होती है — आस्था, साहस और संस्कृति का यह संगम श्रद्धालुओं और विदेशी पर्यटकों दोनों को समान रूप से मंत्रमुग्ध कर देता है।

राजकोट में 'इंधोनी रास' की 19 साल पुरानी परंपरा

राजकोट के मावड़ी चौक पर श्री बजरंग गरबी मंडल की ओर से नवरात्रि के दौरान प्रतिवर्ष 'आग वाली इंधोनी रास' प्रस्तुत की जाती है। यह परंपरा 19 वर्षों से अनवरत चली आ रही है। इस विशेष रास में कलाकार सिर पर जलती हुई इंधोनी और गरबे के घड़े संतुलित करते हुए, हाथों में जलती मशालें थामे लगभग 20 मिनट तक लगातार गरबा करते हैं।

आग के बीच ताल और लय बनाए रखना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसके लिए कलाकार महीनों पहले से तैयारी करते हैं। इस रास में भाग लेने वाली एक युवती ने बताया, 'हमें इस रास के लिए दो महीने से ज़्यादा अभ्यास करना पड़ता है। मेरे माता-पिता को मुझ पर बहुत गर्व है और इसे करते समय ऐसा लगता है जैसे देवी नवदुर्गा हमारे साथ ही नाच रही हों।'

जामनगर में 52 साल पुराना 'स्वास्तिक अंगारा रास'

जामनगर में श्री रंडाल अंबिका कुमारिका गरबी मंडल की 52 साल पुरानी परंपरा नवरात्रि को और विशेष बनाती है। यहाँ का 'स्वास्तिक अंगारा रास' अपनी अनूठी शैली के लिए जाना जाता है, जिसमें पारंपरिक परिधानों में सजे युवा कलाकार जलती हुई लकड़ियों और धधकते अंगारों के बीच स्वास्तिक की आकृति बनाते हुए रास प्रस्तुत करते हैं।

गरबी मंडल के आयोजक सुरेश गोंडालिया के अनुसार, पिछले 52 वर्षों से यह आयोजन निर्बाध जारी है। स्वास्तिक रास के अतिरिक्त मशाल रास, सड़क तीन-तन्नी रास और डाकला रास जैसी पारंपरिक प्रस्तुतियाँ भी इस उत्सव का अभिन्न अंग हैं।

दर्शकों और विदेशी पर्यटकों की भारी भागीदारी

इन दोनों अनूठे आयोजनों को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक उमड़ते हैं। कई श्रद्धालु और उत्सुक दर्शक आसपास की ऊँची जगहों पर खड़े होकर इस नज़ारे का आनंद लेते हैं। उल्लेखनीय है कि जर्मनी और दक्षिण अफ्रीका सहित विभिन्न देशों से आए विदेशी पर्यटक भी इन परंपराओं में गहरी रुचि दिखाते हैं, जो गुजरात की सांस्कृतिक विरासत की वैश्विक पहुँच को दर्शाता है।

आस्था और साहस का प्रतीक

गौरतलब है कि ये परंपराएँ केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि गहरी आस्था और सांस्कृतिक निरंतरता का प्रतीक हैं। पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आ रहे इन आयोजनों में युवा कलाकारों की भागीदारी यह सुनिश्चित करती है कि ये अनूठी परंपराएँ आने वाले वर्षों में भी जीवित रहें। यह ऐसे समय में आया है जब नवरात्रि का वैश्विक स्वरूप तेज़ी से बदल रहा है और पारंपरिक रूपों को संरक्षित करने की चिंता बढ़ती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उन अनाम मंडलों में है जो दशकों से बिना सरकारी संरक्षण के अपनी विरासत बचाए हुए हैं। जब नवरात्रि का व्यावसायिक स्वरूप हर साल नई ऊँचाइयाँ छू रहा है, तब 52 साल पुरानी अंगारा रास का जीवित रहना सांस्कृतिक प्रतिरोध का एक मूक बयान है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि इन आयोजनों को चलाने वाले स्थानीय मंडल किसी बड़े बजट या प्रायोजक के बिना पीढ़ियों की मेहनत के बल पर टिके हैं — और यही उनकी असली विरासत है।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजकोट में 'इंधोनी रास' क्या है और यह कैसे होती है?
इंधोनी रास राजकोट के मावड़ी चौक पर श्री बजरंग गरबी मंडल द्वारा आयोजित एक पारंपरिक नवरात्रि नृत्य है, जिसमें कलाकार सिर पर जलती इंधोनी और गरबे के घड़े रखकर हाथों में जलती मशालें थामे लगभग 20 मिनट तक गरबा करते हैं। यह परंपरा 19 वर्षों से चली आ रही है।
जामनगर का 'स्वास्तिक अंगारा रास' कितना पुराना है?
जामनगर में श्री रंडाल अंबिका कुमारिका गरबी मंडल की 'स्वास्तिक अंगारा रास' परंपरा 52 वर्ष पुरानी है। इसमें कलाकार जलती लकड़ियों और धधकते अंगारों के बीच स्वास्तिक की आकृति बनाते हुए रास प्रस्तुत करते हैं।
इन रास परंपराओं में भाग लेने के लिए कितनी तैयारी करनी पड़ती है?
इंधोनी रास में हिस्सा लेने वाले कलाकारों को दो महीने से अधिक समय तक अभ्यास करना पड़ता है। आग के बीच संतुलन और लय बनाए रखना अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है, जिसके लिए अनुशासित और निरंतर प्रशिक्षण आवश्यक है।
क्या विदेशी पर्यटक भी इन परंपराओं में रुचि दिखाते हैं?
हाँ, जर्मनी और दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों से आए विदेशी पर्यटक इन परंपराओं में गहरी रुचि दिखाते हैं। ये आयोजन गुजरात की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला रहे हैं।
जामनगर की गरबी में स्वास्तिक रास के अलावा और क्या प्रस्तुत होता है?
आयोजक सुरेश गोंडालिया के अनुसार, स्वास्तिक रास के अतिरिक्त मशाल रास, सड़क तीन-तन्नी रास और डाकला रास जैसी पारंपरिक प्रस्तुतियाँ भी इस 52 साल पुराने उत्सव का हिस्सा हैं।
राष्ट्र प्रेस
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