क्या गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलकर हमें विरासत और विचारों को आगे रखना होगा: पीएम मोदी?

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क्या गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलकर हमें विरासत और विचारों को आगे रखना होगा: पीएम मोदी?

सारांश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026' में युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि हमें गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलकर अपनी विरासत और विचारों को आगे रखना होगा। क्या यह युवा पीढ़ी देश की दिशा बदलने में सक्षम है? जानिए इस संवाद में उनका महत्वपूर्ण संदेश।

Key Takeaways

  • गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलना जरूरी है।
  • युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा में लगाना चाहिए।
  • हमें अपनी विरासत को संजोकर रखना चाहिए।
  • 'नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स' की दिशा में आगे बढ़ना है।
  • हमारी सफलता भारत की सफलता है।

नई दिल्ली, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026' के दौरान कहा कि 'नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स' का जो सिलसिला शुरू हुआ था, वह अब 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' के रूप में विकसित हो चुका है और इसका केंद्र देश की युवा शक्ति है। पीएम मोदी ने कहा कि हमें गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलकर अपनी विरासत और विचारों को हमेशा आगे रखना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026' के अपने भाषण के कुछ वीडियो साझा किए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "पिछले 11 वर्षों में, देश के हर क्षेत्र में संभावनाओं के अनंत द्वार खुल रहे हैं। कंटेंट और क्रिएटिविटी इसमें शामिल हैं, जहां हमारे युवा साथी रामायण और महाभारत की प्रेरक कहानियों को भी गेमिंग वर्ल्ड का हिस्सा बना सकते हैं। यहां तक कि हमारे हनुमान जी पूरी दुनिया की गेमिंग को चला सकते हैं।

उन्होंने आगे कहा, "हमने जो नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स का सिलसिला शुरू किया है, वह अब रिफॉर्म एक्सप्रेस बन चुका है। इसके केंद्र में हमारी युवा शक्ति है।" एक अन्य पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा, "गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलकर हमें अपनी विरासत और अपने आइडियाज को हमेशा आगे रखना है। स्वामी विवेकानंद जी का जीवन भी हमें यही सिखाता है।"

जानकारी के अनुसार, 'राष्ट्रीय युवा दिवस' के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026' के समापन सत्र में भाग लिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रवासी समुदाय के युवा प्रतिनिधियों समेत देश भर के लगभग तीन हजार युवा नेताओं के साथ बातचीत की। चुने हुए प्रतिभागियों ने राष्ट्रीय महत्व के प्रमुख क्षेत्रों से संबंधित दस अलग-अलग विषयों पर प्रधानमंत्री के सामने अपनी अंतिम प्रस्तुतियां भी दीं।

युवाओं के लिए संदेश में पीएम मोदी ने कहा, "साल 2047 में, जब हमारी आजादी के 100 साल होंगे, वहां तक की यात्रा भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। यही वह समय है, जो आपके जीवन में भी सबसे महत्वपूर्ण है, यानी बड़ा सुनहरा अवसर है। आपका सामर्थ्य भारत का सामर्थ्य बनेगा और आपकी सफलता भारत की सफलता को नई ऊंचाइयों तक जरूर ले जाएगी।"

उन्होंने कहा कि देश बिना आत्मविश्वास के आत्मनिर्भर और विकसित नहीं हो सकता। इसलिए, अपने सामर्थ्य, अपनी विरासत और अपने साजो-सामान पर गौरव का अभाव हमें खलता है। हमें उसके प्रति एक कमिटमेंट चाहिए और गौरव का भाव होना चाहिए। हमें बड़ी मजबूती से गौरव के साथ मजबूत कदमों से आगे बढ़ना चाहिए।

पीएम मोदी ने कहा कि हमें मिलकर गुलामी की इस मानसिकता को समाप्त करना है। दस साल बाद मैकाले के उस दुस्साहस को 200 साल पूरे हो रहे हैं और यह पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि 200 साल पहले हुए पाप को धोने के लिए अभी 10 साल बचे हैं। यह युवा पीढ़ी मैकाले के उस पाप को धोकर रहेगी। इसलिए देश के हर युवा को संकल्प लेकर इस मानसिकता से देश को बाहर निकालना है।

प्रधानमंत्री ने युवाओं को सुझाव दिया कि थोड़े समय बाद हम जिलों को विकसित बनाने के लिए भी संवाद शुरू करने की दिशा में जाएंगे। लेकिन हर राज्य में एक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, ताकि एक थिंक टैंक बने।

Point of View

बल्कि एक नई सोच को जन्म देता है। राष्ट्रीय दृष्टिकोण से, हमें अपनी विरासत को संजोते हुए आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
NationPress
13/01/2026

Frequently Asked Questions

पीएम मोदी ने 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026' में क्या कहा?
उन्होंने युवाओं से कहा कि गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलकर अपनी विरासत और विचारों को आगे रखना चाहिए।
गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलने का क्या मतलब है?
इसका मतलब है कि हमें अपनी संस्कृति और विचारों पर गर्व करना चाहिए और उन्हें आगे बढ़ाना चाहिए।
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