क्या मैं गुरु तेग बहादुर जी के सम्मान में विशेष सिक्का और स्मारक डाक टिकट जारी करके गौरवान्वित हूं?: पीएम मोदी
सारांश
Key Takeaways
- गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान दिवस का आयोजन
- विशेष सिक्का और स्मारक डाक टिकट का विमोचन
- कुरुक्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का महत्व
- आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करने का प्रयास
- सरकार का गुरु परंपराओं को मान्यता देने का कदम
नई दिल्ली, २५ नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में नौवें सिख गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर जी के ३५०वें बलिदान दिवस के उपलक्ष्य में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाग लिया। पीएम मोदी ने इस आयोजन में उपस्थित संगत को नमन किया।
कार्यक्रम के पश्चात, प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कहा कि कुरुक्षेत्र में श्री गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान दिवस से जुड़े आयोजन में भारी संख्या में उपस्थित संगत को मेरा कोटि-कोटि नमन।
उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र की प्रदर्शनी में श्री गुरु तेग बहादुर जी के अदम्य साहस, त्याग और हमारी सांस्कृतिक विरासत का साक्षी बनने का सौभाग्य मिला। इसके साथ ही, उनके सम्मान में विशेष सिक्का और स्मारक डाक टिकट जारी कर मैं बहुत गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी उपस्थित थे।
पीएम मोदी ने कहा कि कुरुक्षेत्र का 'महाभारत अनुभव केंद्र' अद्भुत है और हमारी सांस्कृतिक विरासत का सशक्त प्रतीक है। यहां हर किसी को महाभारत के प्रसंगों का जीवंत अनुभव होगा। उन्होंने आगे कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य शंख पंचजन्य के सम्मान में कुरुक्षेत्र में बना पंचजन्य स्मारक न्याय और सत्य की विजय का प्रतीक है। यह आने वाली पीढ़ियों को सद्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता रहेगा।
उन्होंने कहा कि आज के सशक्त भारत में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जैसे युगपुरुषों का त्याग और समर्पण भी समाहित है। मुझे गर्व है कि पिछले ११ वर्षों में हमारी सरकार ने हमारे गुरुओं और सिख समुदाय से जुड़ी पावन परंपराओं को राष्ट्रीय उत्सव के रूप में स्थापित किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पवित्र ‘जोड़ा साहिब’ से जुड़े सभी तथ्यों को देखते हुए हमने यह सामूहिक निर्णय लिया कि इन्हें तख्त श्री पटना साहिब को समर्पित किया जाएगा। इससे यह पावन धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रहेगी। गुरु साहिब से प्रेरणा लेकर आज का भारत अदम्य साहस और पूर्ण शक्ति से आगे बढ़ रहा है। ऑपरेशन सिंदूर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।