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कैनो स्लैलम: तेजी, संतुलन और रणनीति का जल खेल

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कैनो स्लैलम: तेजी, संतुलन और रणनीति का जल खेल

सारांश

कैनो स्लैलम एक रोमांचक जल खेल है, जिसमें खिलाड़ी तेज बहाव वाली नदी में गेट्स के बीच से नाव चलाते हैं। संतुलन, गति और दिशा नियंत्रण इसकी खासियत हैं। जानें इस खेल के इतिहास और प्रतियोगिताओं के बारे में।

मुख्य बातें

कैनो स्लैलम में तेजी , संतुलन और रणनीति इसकी शुरुआत १९३० में हुई थी ओलंपिक में इस खेल की पहचान बढ़ी है खिलाड़ियों की तकनीकी क्षमता में सुधार स्वास्थ्य और मानसिक एकाग्रता को बढ़ावा

नई दिल्ली, १७ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा करने वाले रोमांचक जल खेलों में से एक है 'कैनो स्लैलम', जिसमें खिलाड़ी (कयाक) तेज बहाव वाली नदी में बने कृत्रिम या प्राकृतिक गेट्स के बीच से अपनी नाव चलाते हैं। इस खेल में संतुलन, गति और दिशा नियंत्रण अत्यंत आवश्यक होते हैं। कयाक को कम समय में बिना किसी गलती के गेट पार कर जीत हासिल करनी होती है।

इस खेल में कैनो एक छोटी नाव को कहते हैं, जिसमें कयाक घुटनों के बल बैठकर सिंगल-ब्लेड चप्पू का उपयोग करता है।

कैनो स्लैलम की शुरुआत १९३० में स्विट्जरलैंड में हुई थी, लेकिन उस समय यह प्रतियोगिता शांत पानी (फ्लैटवाटर) में होती थी। साल १९४६ में इंटरनेशनल कैनो फेडरेशन (आईसीएफ) का गठन हुआ और १९४९ में पहली विश्व चैम्पियनशिप आयोजित की गई।

१९६० और १९७० के बीच कृत्रिम व्हाइट वाटर कोर्स का निर्माण हुआ। १९७० के दशक में नाव को हल्का और तेज बनाने के लिए 'केवलर' और 'कार्बन फाइबर' का उपयोग शुरू हुआ। १९७२ म्यूनिख ओलंपिक में पहली बार कैनो स्लैलम को प्रदर्शनी खेल के रूप में शामिल किया गया। १९९२ ओलंपिक खेलों में यह मेडल खेल बना।

२०१६ रियो ओलंपिक तक इसमें चार इवेंट थे, जिनमें सी-१ कैनो, के-१ कायक, सी-२ कैनो (पुरुष डबल्स) और के-१ कायक (महिला) शामिल थे। इसके बाद २०२० टोक्यो ओलंपिक में सी-२ को महिला सी-१ प्रतियोगिता में बदल दिया गया।

आज के समय में ३०० मीटर तक की दूरी वाले कोर्स इस तरह पूरे किए जाते हैं कि प्रमुख एथलीट्स ९०-११० सेकंड के बीच पूरा कर सकें। इस दौरान अधिकतम २५ अपस्ट्रीम (पानी की धारा के विपरीत) और डाउनस्ट्रीम (पानी की धारा की दिशा में) को कम से कम समय में पार करना होता है।

एक गेट (नदी के ऊपर लटकते हुए डंडे) को छूने पर टाइम पेनाल्टी दो सेकंड होती है, जबकि एक गेट छूट जाने या गलत दिशा से पार करने पर ५० सेकंड की पेनाल्टी लगती है।

एक्सट्रीम कायक में चार प्रतियोगी पानी से दो मीटर से अधिक ऊँचाई वाले स्टार्ट रैंप से स्लाइड करते हैं। इस दौरान गेट और अन्य नावों के साथ संपर्क होने पर पेनाल्टी नहीं लगती, लेकिन गेट चूक जाने या कोर्स पर कायक रोल नहीं कर पाने की स्थिति में एथलीट को अयोग्य करार दिया जाता है।

कैनो स्लैलम में तेजी, संतुलन और रणनीति का अनोखा मिश्रण है, जिससे एथलीट्स की तकनीकी क्षमता में सुधार हुआ है। इसके अलावा, इस खेल ने फिटनेस और मानसिक एकाग्रता को भी बढ़ावा दिया। ओलंपिक खेल में शामिल होने के बाद इसकी वैश्विक पहचान और भी बढ़ी, जिससे कई देशों में इसकी ट्रेनिंग और सुविधाओं का विकास हुआ।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न केवल खिलाड़ियों की तकनीकी क्षमता को चुनौती देता है, बल्कि उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से भी तैयार करता है। ओलंपिक में इस खेल की उपस्थिति ने इसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कैनो स्लैलम क्या है?
कैनो स्लैलम एक जल खेल है, जिसमें खिलाड़ी तेज बहाव वाली नदी में गेट्स के बीच अपनी नाव चलाते हैं।
इस खेल की शुरुआत कब हुई थी?
इस खेल की शुरुआत १९३० में स्विट्जरलैंड में हुई थी।
कैनो स्लैलम में कौन से इवेंट शामिल होते हैं?
इसमें सी-१ कैनो, के-१ कायक, सी-२ कैनो (पुरुष डबल्स) और के-१ कायक (महिला) शामिल होते हैं।
कितनी दूरी के कोर्स होते हैं?
आज के दौर में ३०० मीटर तक के कोर्स होते हैं।
खिलाड़ियों को गेट छूने पर क्या पेनाल्टी होती है?
एक गेट को छूने पर दो सेकंड की पेनाल्टी लगती है।
राष्ट्र प्रेस
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