चुनाव आयोग ने 1,111 केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की, सुनिश्चित करेंगे स्वतंत्र चुनाव
सारांश
Key Takeaways
- 1,111 केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति से चुनाव की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी।
- पर्यवेक्षक जमीनी स्तर पर चुनावी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।
- मतदाताओं को बिना भय के मतदान का अवसर मिलेगा।
- निर्वाचन क्षेत्रों में पहुंचने के लिए 18 मार्च की समयसीमा निर्धारित है।
- चुनाव आयोग की यह पहल लोकतंत्र को मजबूत करने में सहायक होगी।
नई दिल्ली, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। चुनाव आयोग ने मंगलवार को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभा चुनावों के साथ-साथ छह राज्यों में उपचुनावों के लिए 1,111 केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। अधिकारियों ने बताया कि कुल 1,111 पर्यवेक्षकों को तैनात किया गया है, ताकि स्वतंत्र, निष्पक्ष और प्रलोभन-मुक्त चुनाव सुनिश्चित किए जा सकें।
आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों के साथ-साथ उपचुनावों की निगरानी के लिए पर्यवेक्षकों का चयन किया गया है। उपचुनाव महाराष्ट्र व कर्नाटक (2-2 सीट), गोवा, गुजरात, नगालैंड और त्रिपुरा (1-1 सीट) पर आयोजित किए जाएंगे।
चुनाव आयोग ने कहा कि पर्यवेक्षक आयोग के 'आंख और कान' के रूप में कार्य करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रत्येक मतदाता बिना किसी भय या पक्षपात के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करते हुए हिंसा-मुक्त और पारदर्शी चुनाव पर जोर दिया। असम के 126 विधानसभा क्षेत्रों के लिए 51 सामान्य पर्यवेक्षक, 35 पुलिस पर्यवेक्षक और 50 व्यय पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं।
इसी प्रकार, केरल के 140 विधानसभा क्षेत्रों के लिए 51 सामान्य, 17 पुलिस और 40 व्यय पर्यवेक्षक होंगे।
तमिलनाडु (234 सीट) के लिए 136 सामान्य पर्यवेक्षक, 40 पुलिस पर्यवेक्षक और 151 व्यय पर्यवेक्षक आवंटित किए गए हैं।
294 सदस्यीय विधानसभा पश्चिम बंगाल के लिए 294 सामान्य पर्यवेक्षक, 84 पुलिस पर्यवेक्षक और 100 व्यय पर्यवेक्षक तैनात किए जाएंगे।
पुडुचेरी में 30 सीटों के लिए 17 सामान्य पर्यवेक्षक, चार पुलिस पर्यवेक्षक और 17 व्यय पर्यवेक्षक होंगे।
इसके अलावा उपचुनावों में सामान्य, पुलिस और व्यय निगरानी के लिए आठ-आठ पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं।
चुनाव आयोग ने सभी पर्यवेक्षकों को 18 मार्च तक अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में पहुंचने का निर्देश दिया है। वे सार्वजनिक रूप से अपने संपर्क विवरण साझा करेंगे और चुनाव संबंधी शिकायतों के समाधान के लिए उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों और नागरिकों के साथ दैनिक बातचीत करेंगे।
चुनाव आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत जमीनी स्तर पर चुनावी प्रक्रिया की निगरानी और उसे मजबूत करने के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करता है।