हल्द्वानी में अदालती आदेश: बनभूलपुरा में रेलवे संपत्ति से अतिक्रमण हटाने का फैसला

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हल्द्वानी में अदालती आदेश: बनभूलपुरा में रेलवे संपत्ति से अतिक्रमण हटाने का फैसला

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे की भूमि पर अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने रेलवे की संपत्ति के अधिकार पर ज़ोर दिया और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को शुरू करने का निर्देश दिया। जानिए इस मामले में क्या है नया और प्रभावित परिवारों के लिए क्या उपाय किए जाएंगे।

Key Takeaways

  • सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे की भूमि पर अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया।
  • अधिकांश प्रभावित परिवारों को PMAY के तहत आवास का लाभ मिलेगा।
  • अगली सुनवाई अप्रैल 2026 में होगी।
  • रेलवे की ज़मीन पर लगभग 50,000 लोग रहते हैं।
  • अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।

नई दिल्ली, 24 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे की संपत्ति पर अतिक्रमण हटाने के संबंध में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में पीठ ने स्पष्ट किया कि रेलवे की भूमि से अतिक्रमण हटाना आवश्यक है, क्योंकि यह सरकारी संपत्ति है और रेलवे को इसके उपयोग का पूरा अधिकार है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अतिक्रमण करने वालों को यह अधिकार नहीं है कि वे उसी स्थान पर रहने का दावा करें या रेलवे को भूमि के उपयोग का निर्णय लेने के लिए बाधित करें। यह मामला काफी समय से चल रहा है।

बनभूलपुरा, गफूर बस्ती और अन्य क्षेत्रों में रेलवे की लगभग 30 हेक्टेयर भूमि पर हजारों अवैध निर्माण हो चुके हैं, जहां लगभग 5,000 से अधिक परिवार (लगभग 50,000 लोग) निवास करते हैं।

रेलवे ने बताया कि इस भूमि की सख्त आवश्यकता है, खासकर ट्रैक विस्तार और अन्य परियोजनाओं के लिए, क्योंकि नदी के कारण मौजूदा ट्रैक में समस्याएँ आ रही हैं। यह क्षेत्र उत्तराखंड में रेलवे विस्तार के लिए आखिरी संभावित स्थान है, उसके बाद पहाड़ी क्षेत्र शुरू हो जाता है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि यहाँ 50,000 लोग दशकों से रह रहे हैं, कई पट्टे वाली भूमि पर बसे हैं और रेलवे ने पहले कभी भी कोई मांग नहीं की।

उन्होंने एक मानचित्र प्रस्तुत किया, जिसमें पास की खाली भूमि के उपयोग का सुझाव दिया गया। भूषण ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत आवास प्रदान करना संभव नहीं है, और दिल्ली की झुग्गी नीति में भी कट-ऑफ तिथि होती है।

केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि प्रभावित परिवारों को विस्थापन के बाद छह महीने तक प्रति माह 2,000 रुपये का भत्ता दिया जाएगा। रेलवे और राज्य सरकार ने सामूहिक रूप से प्रभावित परिवारों की पहचान करने और पुनर्वास की व्यवस्था का आश्वासन दिया।

कोर्ट ने निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों की सूची तैयार की जाए, खासकर ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) के लोगों को पीएमएवाई के तहत आवास के लिए आवेदन करने में मदद मिले।

कोर्ट ने आदेश दिया कि नैनीताल जिले की राजस्व प्राधिकरण, केंद्र और राज्य सरकार मिलकर एक सप्ताह का कैंप लगाएं, जहां पीएमएवाई के फॉर्म भरे जा सकें। यह कैंप 19 मार्च से शुरू होगा। बनभूलपुरा में पुनर्वास केंद्र स्थापित किया जाएगा, जहां हर परिवार का मुखिया जाकर फॉर्म भर सके। नैनीताल के जिलाधिकारी और एसडीएम हल्द्वानी को लॉजिस्टिक्स समर्थन देने के निर्देश दिए गए। सामाजिक कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर लोगों को पीएमएवाई के बारे में जागरूक करने का कार्य सौंपा गया। कोर्ट ने सभी योग्य परिवारों को पीएमएवाई के तहत आवास प्रदान करने को सुनिश्चित करने का आदेश दिया।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि झुग्गियों में रहने वालों के प्रति पूरी सहानुभूति है, लेकिन बेहतर और सुरक्षित स्थान पर रहने का अधिकार सभी का है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अवैध कब्जा हटाना आवश्यक है, और यह उत्तराखंड के अन्य अतिक्रमण मामलों पर लागू नहीं होगा।

मामले की अगली सुनवाई अप्रैल 2026 में होगी। तब तक रेलवे भूमि से अतिक्रमण हटाने की कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। केंद्र ने बताया कि 13 भूमि पर फ्रीहोल्ड है, और हर्जाना राज्य और रेलवे दोनों देंगे।

Point of View

बल्कि उन परिवारों के लिए भी एक संभावित पुनर्वास योजना का मार्ग प्रशस्त करता है, जो दशकों से यहाँ निवास कर रहे हैं। यह मामला संवेदनशील है, और इसका सही समाधान ही समाज में संतुलन बनाए रखेगा।
NationPress
19/04/2026

Frequently Asked Questions

सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने का आदेश क्यों दिया?
क्योंकि यह रेलवे की सरकारी संपत्ति है और रेलवे को इसका उपयोग करने का पूरा अधिकार है।
क्या प्रभावित परिवारों को पुनर्वास मिलेगा?
जी हाँ, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने आश्वासन दिया है कि विस्थापित परिवारों को भत्ता और पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी।
अगली सुनवाई कब होगी?
मामले की अगली सुनवाई अप्रैल 2026 में होगी।
क्या परिवारों के लिए पीएमएवाई का लाभ मिलेगा?
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवारों को पीएमएवाई के तहत आवास के लिए आवेदन करने में मदद मिलेगी।
रेलवे की जमीन पर कितने परिवार निवास करते हैं?
लगभग 5,000 से अधिक परिवार इस भूमि पर निवास करते हैं।
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